मनु ! मंदिर के ,तहखाने के उस कमरे में पहुंच गयी ,जो शायद किसी मंत्र द्वारा खुलता है ,जिसे शायद अभी तक कोई भी नहीं खोल पाया ,इसको चारु ने भी देखा और खोलने का प्रयत्न भी किया किन्तु वो दरवाजा ''टस से मस'' न हुआ। वो समझ नहीं पा रही थी कि मनु ने ऐसा क्या किया ? जो इतना पुराना दरवाजा उससे आराम से ही खुल गया। तभी उसे घबराहट भी हुई ,कभी उससे ''बाई चांन्स ''खुल गया हो और कहीं वो ,उसी में फंसी न रह जाये। मनु जब अंदर पहुंची ,तभी अचानक प्रकाश फैल गया और उस कमरे के बीचों -बीच उसने एक शिवलिंग देखा उसको देखते ही ,उसके कानों में घंटियाँ बजने लगीं शुरू में तो उसे ठीक ही लगा किन्तु धीरे -धीरे उन घंटियों की आवाज तीव्र होने लगी और इतनी तीव्र हुई ,मनु धीरे -धीरे अचेत होती चली गयी।
उसी अचेतावस्था में ,वो आगे बढ़ रही थी ,नीचे किहीं सीढ़ियों से उतरती जा रही थी। जब नीचे पहुंची ,तब वहां अकूत खज़ाना देखकर ,वो हैरत में पड़ गयी। इस मंदिर के नीचे इतना खज़ाना कहाँ से आया ?तभी उसे दो सर्प दिखलाई पड़े ,उन विशाल सर्पों को देखकर ,वो ड़र गयी और भागने के लिए ,सीढ़ियों की तरफ दौड़ लगाना चाहती है किन्तु उसके पैर जैसे जमीन में चिपक गए।
तभी वे सर्प इंसानी रूप में आ गए और बोले -बेटी हमसे डरने की आवश्यकता नहीं ,हम तुम्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचायेंगे।
उनसे आश्वस्त होकर मनु थोड़ा शांत हुई और हाथ जोड़ प्रणाम कर बोली - आप लोग कोेन हैं ?और इस रूप में इस तरह इस ख़जाने में क्या कर रहे हैं ?
उसकी बात सुनकर ,उनकी आँखों में आँसू आ गए और बोले -''तुमने हमें यानि आपने माता -पिता को नहीं पहचाना। हम इसी नगरी के राजा और रानी ही तो हैं। क्या तुम हमें भूल गयीं ?तुम हमारी बेटी हो ,तुम्हारे लिए ही तो हम इतने वर्षों से इस ख़जाने की रक्षा कर रहे हैं। तुम हमारी वही बेटी हो ,जिसने तांत्रिक के जबरदस्ती विवाह करने पर ,उस विवाह की वेदी में जलकर अपनी जान दे दी। तुम्हारा तन बदला है ,किन्तु आज भी हमारे लिए तुम हमारी बेटी ही हो। हम आज भी तुम्हारे इस ख़जाने की रक्षा कर रहे हैं। ये खज़ाना हमारा है ,हमारे क्षेत्र वासियों की उन्नति के लिए है। वो तांत्रिक तुमसे विवाह करके इस ख़जाने का मालिक और असीम शक्तियों का मालिक बन जाना चाहता था। आज भी वो तेरे पीछे ही लगा है ,तुम तो भस्म हो गयीं उसका कोई भी कार्य सिद्ध नहीं हो पाया। तब उसने तुम्हारे अगले जन्म की प्रतीक्षा की ,सौ वर्ष पश्चात ,तुम फिर से पैदा हुईं। वो तुम्हें खोजता हुआ फिर से हिमाचल की तलहटियों से बाहर आया। तब तुमने किसी साहूकार के यहाँ जन्म लिया। तुम साहूकार की लाड़ली बेटी थीं ,तपस्या नाम था तुम्हारा !तब तुम एक दिन अपने कॉलिज में ही ,उससे टकरा गयीं थीं ,उसकी वेशभूषा देखकर ड़र गयीं थीं किन्तु उस जन्म में एक बात ये सबसे अच्छी रही कि जिस नक्षत्र की लड़की की वो प्रतीक्षा कर रहा था। तुम्हारा जन्म उस नक्षत्र में नहीं हुआ। वो तांत्रिक हताश होकर वापस लौट गया।
मनु को इस कहानी में ,मजा आ रहा था। आये भी क्यों न ? जब किसी को पता चले कि उसके पिछले कितने जन्म हुए उनमें उसने क्या किया ?और उसके जीवन का उद्देश्य क्या है ? सच ही कहते हैं लोग !नियति पहले से ही निश्चित होती है और उसे किस जन्म में क्या करना है ?ये सब भी पहले से ही निश्चित है।
किन विचारों में खो गयीं ? बेटी ! रानी ने पूछा।
नहीं ,कुछ नहीं ,इस तरह इन बातों पर एकाएक यकीन करना थोड़ा मुश्किल सा हो जाता है किन्तु मेरे सामने आप लोग हैं , बता रहें हैं ,तो सच ही होगा। आगे क्या हुआ ?बताइये !
अभी तुम जाओ ! तुम्हारी सहेली शायद किसी परेशानी में फंस गयी है जाकर उसे बचाओ ! हम तुम्हारी प्रतीक्षा में यहीं हैं कहकर वो फिर से सर्प बन गए। मनु बाहर की तरफ भागी ,अब दरवाजा अपने आप ही खुल गया। जब वो बाहर आई ,तब दरवाजे से बाहर कुछ दूरी पर ,मनु ने देखा -चारु के सिर पर बंदूक लगी हुई है और वो लोग कह रहे हैं जो कोई भी इसके साथ है ,बाहर आ जाओ !
मनु जाने ही वाली थी ,तभी उसने सुना ,चारु कह रही थी - मेरे साथ कोई भी नहीं है , मैं तो यहाँ किसी को जानती भी नहीं ,पता नहीं ,मैं यहाँ कैसे आ गयी ?आप प्लीज़ ! मुझे यहाँ से बाहर जाने का रास्ता बता दीजिये ,मैं अपने घर वापस चली जाऊँगी।
ऐसा कैसे हो सकता है ? तुम यहाँ आई कैसे ?
तुमसे मैंने कितनी बार कहा ? मैं नहीं जानती ,मुझे तो ये भी नहीं पता ,-कि इस समय मैं कहाँ पर हूँ ?और आप लोग कौन हैं ?
चारु की बात सुनकर ,वो लोग एक तरफ जाकर ,कुछ बातें करते हैं और उसके पास आकर पूछते हैं ,तुम इस दरवाजे के पास क्या कर रही थीं ?
मैं तो यहाँ से जाने का मार्ग ढूंढ़ रही थी ,सोचा -शायद इधर से ही बाहर जाने का मार्ग मिल जाये ,इसीलिए इस दरवाज़े को खोलने का प्रयास कर रही थी किन्तु ये दरवाजा शायद बहुत पुराना है ,खुला ही नहीं ,तभी आप लोग आ गए।
मनु मन ही मन चारु की समझदारी पर खुश हो रही थी। वाह ! मेरी जान कमाल कर दिया। बस अब इन्हें अपनी विद्या का जलवा भी दिखा दे। वे लोग ,चारु को अपने साथ ले गए ,चारु उनसे पूछती रही -भाई आप लोग कौन हैं ? यहाँ क्या बन रहा है ? किन्तु उन्होंने उसके एक भी प्रश्न का उत्तर नहीं दिया और उसे लेजाकर ,एक कमरे में बैठा दिया ,एक स्वयं उस कमरे से बाहर खड़ा हो गया ,दूसरा इस बात की सूचना देने ,अपने बॉस के पास चला गया। वो एक कमरे में पहुंचा जहाँ बहुत सारे कैमरे लगे हुए थे और उसने अंदर आने की इजाजत माँगी। जब उसे अंदर बुलाया गया ,तब वो कुछ कहता ,उससे पहले ही एक आवाज़ आई -मूर्ख ! मुझे सब मालूम है ,तुम ये कैमरे नहीं देख रहे ,वो अकेली नहीं है ,उसके साथ उसके अन्य दोस्त भी हैं। हमें ये जानना है ,कि ये लोग कोई अनपढ़ ,गंवार नहीं , जो इनसे हम मजदूरी करा सकें ,हमें तो ये जानना है ,इनके यहाँ आने का उद्देश्य क्या है ? और ये लोग क्या चाहते हैं ?
उस आवाज से इजाजत लेकर ,वो बाहर आया ,उसने....... क्या किसी ने भी ,बॉस को नहीं देखा ,बस उसकी आवाज का अनुसरण करते हैं और वो वहीँ बैठा ,सब पर निगरानी करता है।
बाहर आकर उसने ,अपने साथी के पास जाकर ,धीमे -धीमे स्वर में सम्पूर्ण बातें बताईं ,अभी किसी भी कमरे पर दरवाजा नहीं लगा था ,इसीलिए एक सिपाही वहीं खड़ा रहा।
मनु चारु के इस तरह उन लोगों के साथ चले जाने पर ,अपने अन्य साथियों को ढूंढ़ रही थी ,उनके बताये अनुसार वो उसी दीवार की तरफ बढ़ रही थी। तभी वो लोग उसे अपनी तरफ आते नजर आये और बड़े ही परेशान भी दिखे। मनु भी उनकी तरफ ही बढ़ी और बोली - तुम लोगों के इस तरह होश कैसे उड़े हुए हैं ? ऐसा क्या देख लिया ? जो पता लगाने गए थे ,क्या पता लगाया ?
मनु को अकेली देखकर रोहित बोला -हम तुम्हें ये सब बाद में बताएंगे ,पहले तुम मुझे बताओ ! चारु !कहाँ है ?

