प्रेम किसी बंधन का मोहताज़ नहीं ,
नियमों से बंधा हो जो ,वो प्रेम नहीं।
प्रेम के हैं ,रूप अनेक ,
प्रेम का कोई नियम नहीं।
जीवन का ,वरदान है प्रेम !
माँ से प्रेम ,पिता का प्रेम ,
बहन से प्रेम ,पत्नी का प्रेम ,
इसी प्रेम के, नियम अलग हैं ।
दोस्त या पत्नी का प्रेम !सबसे न्यारा है।
प्यारा और दुलारा है ,नियमों से हारा है।
वो चाहे संसार बना दे ,या....
जीवन का जंजाल बना दे।
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