मेरा परिवार रिश्तों से बंधा ,
एक बुलंद किला !
जिसके अंदर अपने को , सुरक्षित कर.......
उसकी दीवारों से पार ,दुनिया देखती हूँ।
दूर से ही देखती हूँ , ज़िंदगी की रंगीनियाँ !
जो ललचाती हैं ,
वो परिवार, जिसके दायरे सीमित हैं ,
निश्चित कर दी जातीं हैं , इक सीमा.....
रिश्तों और संस्कारों से लिपटी ,
इक झीनी परत...... ,
सुरक्षित करती है ,मुझे और मेरी सोच को ,
परिवार जो वाकिफ़ है ,
बाहरी दुनिया के भेड़ियों से........
मैं !'अमूल्य निधि 'बन उस खजाने में क़ैद हूँ।
जो एक स्थान से दूसरे स्थान पर सुरक्षित ,
भेजी गयी ,वो'' निधि ''हूँ जो सुरक्षित है ,
अपने दायरों में.......
बाहरी दुनिया से बेख़बर ,एक ख़ेमे में हूँ।
