Blcok ho jate hein

फ़ेसबुकिये दोस्त !डरे से रहते हैं ,
धोखा देने के फेर में ,
खुद धोखा खा जाते हैं ,
एक दोस्त खो जाते हैं ,
फिर 'ब्लॉक' हो जाते हैं।


रात गयी ,बात गयी ,
की तरह दोस्ती निभाते हैं ,
इतने दोस्त होकर भी,
 अकेले रह जाते हैं।
फिर 'ब्लॉक' हो जाते हैं। 

जहां फूल हैं ,कांटे भी बहुत ,
अच्छे लोग हैं ,बुरे भी बहुत ,
अपना चरित्र दिखलाते हैं ,
 फिर 'ब्लॉक' हो जाते हैं।
 
नर ,नारी बन आजमाते हैं ,
शीघ्र ही 'फ्रेंक 'हो जाते हैं।
अपनी आदतों  के कारण ,
 फिर ' ब्लॉक' हो जाते हैं। 

दोस्त !कहाँ साथ निभाते हैं ?
कितने अकेले हैं ?लोग !
इतने दोस्त बनने पर भी ,
अकेले ही रह जाते हैं।

लगता है ,कभी -कभी ,
अनजाने ही सही ,
अच्छे दोस्त बन जाते हैं।
बंदर की तरह गुलाटी दिखाते हैं 
 फिर 'ब्लॉक 'हो जाते हैं। 

     
laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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