फ़ेसबुकिये दोस्त !डरे से रहते हैं ,
धोखा देने के फेर में ,
खुद धोखा खा जाते हैं ,
एक दोस्त खो जाते हैं ,
फिर 'ब्लॉक' हो जाते हैं।
रात गयी ,बात गयी ,
की तरह दोस्ती निभाते हैं ,
इतने दोस्त होकर भी,
अकेले रह जाते हैं।
फिर 'ब्लॉक' हो जाते हैं।
जहां फूल हैं ,कांटे भी बहुत ,
अच्छे लोग हैं ,बुरे भी बहुत ,
अपना चरित्र दिखलाते हैं ,
फिर 'ब्लॉक' हो जाते हैं।
नर ,नारी बन आजमाते हैं ,
शीघ्र ही 'फ्रेंक 'हो जाते हैं।
अपनी आदतों के कारण ,
फिर ' ब्लॉक' हो जाते हैं।
दोस्त !कहाँ साथ निभाते हैं ?
कितने अकेले हैं ?लोग !
इतने दोस्त बनने पर भी ,
अकेले ही रह जाते हैं।
लगता है ,कभी -कभी ,
अनजाने ही सही ,
अच्छे दोस्त बन जाते हैं।
बंदर की तरह गुलाटी दिखाते हैं
फिर 'ब्लॉक 'हो जाते हैं।
