मनु उस अनजान मंदिर में चली जाती है ,वो स्वयं ही नहीं जानती ,उसके साथ क्या हो रहा है ? मंदिर के तहखाने में जाकर ,उसे अपने पूर्वजन्म की जानकारी मिलती है और उसे एक ख़जाने की जानकारी भी मिलती है। इससे पहले की उसे सम्पूर्ण जानकारी हो पाती ,उसे संदेश मिलता है कि उसकी सखी खतरे में है। वो बाहर आ जाती है।वो अपने दोस्तों के पास गयी ,उन्होंने उसको देखते ही पूछा -चारु कहाँ है ?
कहीं उसके दोस्त घबरा न जाएँ ,इसीलिए मनु बोली -अभी तो यहीं थी ,इधर -उधर ही गयी होगी।
ये क्या जबाब हुआ ? तुम जानती हो ! यहाँ कितना खतरा है ?वो ऐसे ही इधर -उधर कैसे चली गयी ?ये कोई मॉल है क्या ?जो इधर -उधर निकल गयी ,रोहित ने पूछा।
चलो ! उसे ढूंढ़ते हैं ,कीर्ति बोली।
नहीं ,वो नहीं मिलेगी मनु घबराकर कह गयी।
क्यों ?समवेत स्वर उभरे।
क्योंकि उसे दो लोग पकड़कर ले गए।कहकर उसने सम्पूर्ण किस्सा सुना दिया किन्तु उन्हें अपने उस दरवाजे के अंदर जाने के राज़ को छुपाये रखा और उन्हें सांत्वना भी दिया ,मुझे लगता है अभी वो सुरक्षित है ,यदि उन्हें कुछ करना होता तब तुरंत ही गोली मार सकते थे। मुझे लगता है ,वो उन्हें संभाल लेगी।
सभी को ,मनु की बात पसंद नहीं आई ,किन्तु करते भी क्या ? मजबूरी थी।
तुम लोग बताओ !तुम्हें क्या जानकारी मिली ? मनु ने पूछा।
कुछ ज्यादा तो पता नहीं चल पाया ,एक लड़के को लेकर अंदर तो गए किन्तु सभी तरफ से शांति थी ,अंदर भी जा पाए ,जो एक दरवाजा है ,उसी पर पहरेदार खड़ा था।हम कोई 'सुपर हीरो 'तो हैं नहीं जो उससे भि ड़ जाते , सभी कार्य गुप्त रूप से करना है। किन्तु लगता है ,यहां अवश्य ही कोई खिचड़ी तो पक रही है किन्तु वो क्या ?हम कुछ भी जानकारी नहीं जुटा पाए ?
एक से थोड़ी उम्मीद बंधी थी उसी बेचारे को मार दिया ,कुछ सोचते हुए - किन्तु उसमें तो जान ही नहीं बची थी। तब उन्होंने उसकी लाश का क्या किया होगा ?अच्छा ,एक बात बताओ ! तुम तो बता रही थीं कि यहाँ से बाहर जाने का एक रास्ता नहर की तरफ भी जाता है। उससे निकल चलते हैं। मैं तो ,इतने वर्षो से यहां रह रहा हूँ ,मुझे तो आजतक पता नहीं चला और तुम यहाँ दूसरी या तीसरी बार आई हो ,तुम्हें यहाँ का रास्ता कैसे मालूम ?
ये समय इस बात को पूछने का नहीं है ,चलो पहले बाहर जाने का रास्ता ढूँढ लेते हैं या मुझे भ्र्म हुआ था। वो उन सबको मंदिर के उस तहखाने बराबर में बाहर की तरफ के नीचे सीढ़ियों के बराबर में ,एक ऐसे स्थान पर ले गयी जहाँ किसी का ध्यान ही नही जायेगा ,वो मंदिर के पीछे की दीवार थी जिस पर पुराने समय की कारीगरी हुई थी। तभी मनु ने उस दीवार पर हाथ फेरा और धीरे -धीरे वो दीवार खिसकने लगी ,उसके खिसकते ही एक दरवाजा बन गया और उसमें से एक रास्ता दिखलाई पड़ने लगा।
वाह !ताज्जुब है , कोई सोच भी नहीं सकता ,कि मंदिर की दीवार ही नहीं वरन एक गुप्त मार्ग भी इसी ,दीवार में छुपा हुआ है। यार....... पहले लोग किस तरह से ''प्लान ''बनाते थे।
इस तरह के गुप्त रास्ते ,पहले लोग! अपनी दुश्मनों से सुरक्षा के लिए ,बनाते थे ,ताकि जब शत्रुओं से घिर जाएँ तो इसी तरह के किसी गुप्त द्वार से अपनी जान बचाकर भाग सकें। छोटा रास्ता भी होता है।
यहाँ तो बहुत ही अँधेरा है।
उस समय क्या बिजली होती थी ?हो भी तो ऐसे गुप्त मार्गों का सिर्फ कुछ चुनिंदे और विश्वशनीय लोगों को ही पता होता था। गुप्त रूप से वे लोग मशाल की रौशनी के सहारे बाहर निकलते थे।
अब हम मशाल कहाँ से लायेंगे ?
इसके लिए हमारे पास अपनी टोर्च है ,कीर्ति मुँह बनाते हुए बोली।
अरे हाँ....... ,मैं तो मनु की बातें सुनते हुए ,उसी जमाने में पहुंच गया था ,ये तो मैंने सोचा ही नहीं था तन्मय अपनी झेंप उतारते हुए बोला।
सोचोगे तो जब ,दिमाग होगा।
अब बस करो !यहीं लड़ना आरम्भ मत कर देना।
चलो ! तो अब इसके अंदर चलकर देख लेते हैं।
नहीं ,अभी हम कहीं नहीं जा सकते क्योंकि यदि हम इस रास्ते से उस नदी तक पहुंच भी गए तो क्या वहाँ कोई बोट हमारे इंतजार में होगी ?एक बात !दूसरी बार हमारी चारु अभी उनके साथ है उसे भी तो लेना है। तीसरी बात ,हम जिस उद्देश्य से यहाँ आये हैं वो पूर्ण नहीं हुआ।
तुम क्या बात कर रही हो ? इस तरह तो हम यहीं फंसे रहेंगे बाहर नहीं निकल पाएंगे।
मनु ने कहा हमारे पास अभी भी काफी सामान बचा है ,यदि ऐसी ही कोई परेशानी आती है ,तो इसी मार्ग से बाहर निकल जायेंगे। तभी दीवार के दाई तरफ उन्हें कुछ आहट सुनाई दी ,वे लोग ,शांत हो गए और दीवार के सहारे -सहारे चलते हुए आगे बढ़े। उन्होंने देखा -कुछ लोग एक डिब्बा लेकर जा रहे हैं ,उस डिब्बे को बड़े एहतियात से पकड़ा था।
उस डिब्बे को देखकर , रोहित का माथा ठनका और बोला इस तरह का 'बॉक्स 'तो हमारी साइंस की लैब में प्रयोग करते हैं।ओह नो !
क्या हुआ ????
जो मैं सोच और समझ रहा हूँ ,यदि ये बात सही हुई ,तो यहाँ बहुत बड़ा खेल चल रहा है।
क्या हुआ ?कुछ हमें भी बताओगे !

