याकूब बाहर खड़ा होकर ,अपने अम्मी -अब्बू की बातें , बहुत देर से सुन रहा था। वह जानना चाहता था, कि आखिर घर में क्या चल रहा है ? अभी तक उसे, किसी ने कुछ भी नहीं बताया था। जब उसने,उनकी सारी बातें सुनी ,तब उसे बहुत गुस्सा आया और गुस्से में वह अपने अम्मी -अब्बू के कमरे में चला गया और उनसे बोला - घर में इतना सब चल रहा है और मुझे किसी ने कुछ भी नहीं बताया। हमारी बहन के साथ इतना सब कुछ हो गया , आप लोगों ने ,हमें बताना मुनासिब ही नहीं समझा।
हम उसके भाई हैं ,कम से कम हमें तो मालूम होना चाहिए था कि आखिर उसके साथ क्या हो रहा है ? यदि यह काम ख़ालिद का ही है, तो मैं उसे छोडूंगा नहीं , सच्चाई का पता लगाकर रहूँगा और यदि वह गुनहगार हुआ, तो मेरी बहन का निक़ाह उससे नहीं होगा। मैं उसे मार डालूंगा ,गुस्से से याकूब बोला।
युसूफ और सलमा जानते थे , कि याकूब गुस्से वाला है ,इसीलिए वो बच्चों से कुछ भी नहीं बताते थे। उनकी उम्र भी इतनी नहीं थी। ज़ीनत से तो दोनों ही छोटे हैं किंतु आज उसने ,उनकी सभी बातें सुन लीं। सारी वारदात की जानकारी होने पर उसका 'ख़ून खोेल उठा था.''
क्या कर सकते हैं ? तब अपने बेटे को समझाया - हो सकता है, हमें कोई गलतफहमी हो गई हो। पहले हमें सच्चाई की तह तक पहुंचना है। तभी हम आगे कदम बढ़ा सकते हैं ,सलमा सहजता से बोली किन्तु अंदर ही अंदर वो भी गुस्से से धधक रही थी।
यह हमारी बहन की जिंदगी का सवाल है। तब तो यह काम, आप लोग, मुझ पर छोड़ दीजिए ! मैं, पता लगाकर रहूंगा ,वो कौन था ?
तुम कैसे पता लगाओगे ? ख़ालिद को ,इसके बारे में कोई जानकारी नहीं होनी चाहिए , हम उसकी छानबीन कर रहे हैं ,यूसुफ़ साहब ने बेटे को समझाया।
तुम्हारे अब्बू सही कह रहे हैं , वह भी कम नहीं है , हमेशा आवारा लड़कों के साथ घूमता है।
मां के इतना कहते ही ,याकूब ने उनके अल्फाजों को पकड़ लिया और बोला -जब आप लोग जानते हैं कि वह आवारा है , तब आप उससे, हमारी बहन का रिश्ता क्यों करा रहे हैं ? दूसरी बात ये ,मैं ख़ालिद के पीछे नहीं हूँ ,मैं उस गुनहगार को ढूंढने की बात कर रहा हूँ ,जिसने इस सबकी शुरुआत की। जिसके कारण ये सब हो रहा है। वो गुनहगार ख़ालिद ही हो, ये ज़रूरी तो नहीं..... हो सकता है ,कोई और हो या फिर वही हो।
ख़ालिद से, ज़ीनत की शादी करना हमारी मजबूरी हो गई है, और यह मजबूरी उसके कारण भी हो सकती है, यही हम जानना चाहते थे, यदि वह उसका गुनहगार है ,तो उसकी सजा मिलनी चाहिए। हो सकता है ,इस निकाह के पीछे उसका कोई मकसद हो ,कहते -कहते सलमा की आवाज़ भी तेज हो गयी।
ठीक है, मैं पता लगवाता हूं , कहते हुए वो बाहर निकल गया। उसने, अपने कुछ लोगों को फोन किया और उन्हें एक जगह मिलने के लिए बुलाया।
जब वे लोग एक जगह इकट्ठा हो गए ,तब उसके दोस्त सैयद ने पूछा -हमें यहाँ किसलिए बुलाया है ?
एक आदमी के बारे में पता लगाना है।
अपने मुँह का गुटखा थूकते हुए उसने पूछा -कौन है ? वो आदमी ! उसका कैसे पता लगाना हैं ?
उसके बारे क्या जानना चाहता है ? उससे ,तुम्हारी क्या दुश्मनी है ?नाज़िम ने पूछा।
ये ,मेरा ही ,चचेरा भाई है ,उसने एक लड़की को अग़वा किया, उसके साथ रात बिताई ,किन्तु आजतक उसके ख़िलाफ़ कोई सबूत नहीं मिल पाया , उसने ये काम इतनी सफाई से किया।
तब तो लगता है ,वो बड़ा खिलाड़ी है ,सैयद मुस्कुराया। वो लड़की कौन है ? तुझे, उससे क्या हमदर्दी है ? नाज़िम ने पूछा -क्या तेरी कुछ लगती है ?
तुम्हें, उससे क्या ?गुस्से से याकूब बोला -जो काम दिया गया ,वो कर दो ! कैसे करोगे ?ये तुम जानो !
वे भी लड़के ही थे, ज्यादा उम्र के नहीं थे किन्तु पैसे के लिए कुछ भी काम करने को तैयार हो जाते थे। उनकी ज़रूरत थी ,पैसा !
ये बात याकूब पहले से ही जानता था,बोला -वो लड़की, हमारी अम्मी की कोई रिश्तेदार है और वो ख़ालिद का ही नाम ले रही है। यही पता लगाना है कि ये काम उसका है या नहीं। तुम्हें ,तुम्हारे काम का रोकड़ा मिल जायेगा ,मैं ये काम मुफ़्त में नहीं करवा रहा हूँ।
कुछ सोचते हुए ,सैयद बोला -मैंने तो सुना है ,उससे, तेरी बहन का रिश्ता होने जा रहा है ,क्या ये बात सही है ?
हाँ ,ये बात सही है किन्तु जबसे हमें यह बात पता चली है ,तब से घर में सभी परेशान हैं ,तभी तो उसकी छानबीन करवा रहे हैं ताकि हमारी बहन किसी गलत आदमी के साथ न चली जाये। लेकिन ये सब इस तरीक़े से होना चाहिए , किसी को इसकी भनक भी न लगे। एक साजिश के तहत उन्होंने आपस में सलाह- मशवरा किया और अपनी योजना बनाई ।
तुम हमारा पैसा तैयार रखना ,तुम्हारा काम हो जायेगा ,कहते हुए वे उनके घर के पिछले दरवाजे से बाहर निकले। सलमा ने जब उन्हें जाते हुए देखा तो सोचने लगी -ये कौन हैं ?यहाँ क्या कर रहे हैं ? कहीं चोर तो नहीं ,तभी उसने उनके पीछे आते हुए ,याकूब को देखा और वो वहीँ रुक गयी।
जब याकूब अंदर आया तो सलमा ने पूछा -यह लोग कौन थे ?
कोई नहीं, दोस्त थे।
तू ,ऐसे दोस्त कब से बनाने लगा,देखने से तो ये तेरे दोस्त नहीं लग रहे थे ।
जैसा काम, वैसे दोस्त !ये पैसे लेकर काम करते हैं ,ये पता लगाएंगे कि आख़िर क्या हुआ था ? ज़ीनत का शक़ सही है या ग़लत !
क्या तूने ,इन्हें कुछ बताया है ? घबराते हुए सलमा बोली।
कुछ नहीं ,बस ख़ालिद की जानकारी निकालकर लाने को कहा है।
किसी को पता न चल जाये।
आप बेफ़िक्र रहें ,अम्मी ! सारा काम गुपचुप होगा।
एक दिन ख़ालिद अपने ही अब्बू की दुकान के सामने चाय की दुकान पर बैठा हुआ था। याकूब का एक दोस्त उस दुकान पर आया। तभी वो किसी को फोन करने लगा, कुछ देर के बाद नाज़िम भी आ जाता है। कुछ देर बाद वो दोनों, ऐसे बात करने लगे जैसे वहां कोई और न हो और तब सैयद वैसे ही कुछ भी बातें करने लगा ,कुछ देर के बाद शायरी सुनाने लगा।
क्या बात है ?भाई ! आज बड़े मूड़ में लग रहे हो।
तब वह बोला - अरे यार ! वो बहुत ही खूबसूरत है , ऐसी लड़की हर किसी की किस्मत में नहीं होती।
क्या बात कर रहा है ? कौन है ? वो !
उसका नाम लेकर अपनी मुहब्बत को रुसवा नहीं कर सकता ,मैंने उससे मुहब्बत की है ,मैं उसे छोड़ना नहीं चाहता ,कोई तिकड़म लड़ाओ !''सांप भी मर जाये और लाठी भी न टूटे। ''वो हसीन नाजनीन को एक नजर देखा था ,मैं तभी से ,उसी को दिल दे बैठा ,किन्तु लगता है ,उसकी नज़र मुझ पर नहीं पड़ी।
पड़ गई ,होती, तो वहीं गश खाकर गिर गयी होती ,कहते हुए नाज़िम हंसा।
न... न... मुहब्बत में मज़ाक नहीं ,मैं उसे दिल से चाहता हूँ ,तुम्हें कोई हक़ नहीं बनता। मेरे इश्क़ का मखौल उड़ाओ !
