मनु और श्याम ने ,कीर्ति को न जाने कहाँ -कहाँ नहीं ढूंढा ?किन्तु कीर्ति नहीं मिली , अब मनु को अपने अन्य दोस्तों की चिंता भी सताने लगी ,वो श्याम से बोली -कहीं हम तन्मय और रोहित को भी न खो दें ,इसीलिए चलो ! उसी स्थान पर चलते हैं ,जहाँ उनसे मिलने के लिए बोला था। वो दोनों वापस उसी मंदिर की दीवार के पीछे गए ,उन दोनों की प्रतीक्षा करने लगे। कुछ समय की प्रतीक्षा के बाद ,वो दोनों दूर से आते दिखे ,किन्तु वहीं छिप गए ,क्योंकि उन्हें वे दो आदमी भी आते दिखे,जिनके पीछे तन्मय और रोहित गए थे । वो लोग तो ,किसी अन्य रास्ते चले गए, किन्तु तन्मय और रोहित को मनु और श्याम ने अपने पास बुला लिया।
तुम्हारे लिए ,एक धांसू खबर लाये हैं तन्मय उत्साहित होते हुए बोला।
वो क्या ?
यहाँ अवश्य ही कुछ न कुछ गलत तो हो रहा है। यहाँ न ही कोई भूत है न ही कोई जादू ,ये तो सब इंसानों का रचाया खेल ही है ,जो कि अपराधी प्रवृति के हैं।
उसकी बात सुनकर श्याम मुस्कुराया और बोला ,इतना तो हम भी जानते हैं , कोई नई बात हो तो, बतलाओ !
मुझे लगता है ,यहाँ शरीर के अंगों को बेचा जाता है उनकी तस्करी होती है ,और ये वो कैसे करते हैं ,ये जानकारी और जुटानी है ,उन लोगों ने वो बॉक्स 'मोटरबोट 'में आये ,एक आदमी को लेजाकर दिया ,उस आदमी ने उन्हें एक बैग दिया। मुझे लगता है ,उस बैग में पैसे होंगे। तन्मय बोला -मैं तो कैमरा भी लाया हूँ ,और उनके कुछ फोटो भी लिए हैं ,वहाँ जो आदमी आया था ,वो मुझे कुछ देखा हुआ सा,उसका चेहरा जाना -पहचाना सा लग रहा था ,किन्तु स्मरण नहीं हो रहा ,कहाँ देखा ?
वो तो चलो ,हम बाद में देख लेंगे ,कि वो कौन था ?पहले कीर्ति को ढूंढते हैं मनु अंदर की ओर तेजी से कदम बढ़ाते हुए ,बोली।
क्यों ? कीर्ति कहाँ चली गयी ? वो तो तुम लोगों के संग थी न !रोहित चिंतित होते हुए बोला।
हाँ , हमारे ही संग थी किन्तु हम लोग उस दीवार के पीछे चले गए ,वहां एक गुप्त दरवाजा है किन्तु वहां पूरी तरह नर्क है ,मौत तांडव करती है।
तब क्या हुआ ?शीघ्र बताओ ! पहेलियाँ क्यों बुझा रहे हो ?रोहित थोड़ा उत्तेजित होते हुए बोला।
हम लोग उस स्थान से बचकर भाग रहे थे ,तभी कीर्ति एक टीले पर चढ़ी और उसी रास्ते से जमीन में नीचे समा गयी। मैं उसके पीछे भागा भी किन्तु तब तक वहां कोई नहीं था ,श्याम ने सफाई पेश की।
तुमने उसे वहां छोड़ दिया ?और वापस आ गए तन्मय ने श्याम से पूछा।
और क्या करता ?उसका तो वहां नामोनिशान ही मिट चुका था।
कूद जाता ,उसी स्थान में ,रोहित तैश में आकर बोला।
ऐसे कैसे कूद जाता ?जिस जगह के विषय में कोई जानकारी नहीं ,मैं कैसे ,किसी अंधे कुएँ में गिर जाता उसे तो फिर भी नहीं बचा पाता। मैं ,अपनी जान खतरे में कैसे डालता ?जहाँ बचने की कोई उम्मीद ही न हो।
तुम आपस में लड़ो मत !कीर्ति जिन्दा है, सही सलामत है किन्तु हमें मिल नहीं रही है ,मिल भी जाएगी थोड़ा समय लगेगा। ये भी तो पता नहीं, कब ,कौन हम पर घात लगाए बैठा हो ?इसीलिए लड़ने की बजाए थोड़ा धैर्य से और थोड़ा सावधानी से काम लो।
ये तुम इतने विश्वास के साथ ,कैसे कह सकती हो ?कि वो सही -सलामत है। तुमसे और भी कई बातें पूछनी हैं।
सब बताउंगी ,पहले हम यहाँ से सही -सलामत निकल तो जाएँ।
कीर्ति को ले जाकर वो आदमी ,एक कमरे की तरफ मुड़ता है ,तभी कीर्ति उससे पूछती है -मुझे किधर ले जा रहे हो ?
तुम अभी इस कमरे में रहोगी ,शाम को देखना है ,क्या करना है ?
क्या करना है ? से मतलब ! मैं कोई सब्ज़ी भाजी हूँ कि शाम को देखना है कि सूखी सब्ज़ी बनानी है या तरी की ,इसमें देखना ही क्या है ? मुझे जाने दो ! मैं अपने दोस्तों को स्वयं ही ढूंढ़ लूँगी ,कहकर वो आगे बढ़ी ,उस व्यक्ति ने उसे आगे बढ़ने से रोक दिया।
नहीं ,बहुत दिनों पश्चात ,यहाँ कोई लड़की आई है। ऐसे कैसे जाने देंगे ? उसकी बात सुनकर एकबारग़ी तो कीर्ति हिल गयी। जो वो सोच रही है ,क्या??? ऐसा ही कुछ सोच रहे हैं तो मैं भी दिखा दूँगी किससे पाला पड़ा है ?मन ही मन कुछ सोचकर वो अंदर चली गयी किन्तु मन ही मन वो घबरा रही थी यदि दो -एक लोग आ भी गए ,तब मैं क्या कर लूँगी ?पता नहीं ,मेरे सभी दोस्त कहाँ चले गए ? मुझे ढूंढ़ भी पायेंगे या नहीं।

