ये धरती ,ये अंबर सूना ,
ये घर ,ये आँगन सूना।
तेरे बिन ,हर पल है सूना।
तेरे बिन ये ,ड्यौढ़ी सूनी।
सूना हो गया, संसार मेरा।
हर पल तुझे ढूंढती निगाहें।
ढूँढती हैं ,वो नन्हें पग.......
तलाशती हैं ,वो कदम ,
चूमती है ,वो निशाँ ,
जिनकी छाप ,जो तूने....
कभी ,छोड़ी हमारे दिलों पर।
ढूंढती हैं आँखें ,तेरी मुस्कुराहट !
तू गया ,तो ऐसा गया ,
फिर न लौटा , घर ही नहीं ,
देश की ख़ातिर !जग तूने ,
कर दिया सूना ,आजा अब तो ,
लाल मेरे !'तेरे बिन 'मन मेरा सूना।