Ekadashi

नमस्कार  बहनों और दोस्तों !आज एकादशी है। जी हाँ ,कार्तिक मास के ' शुक्ल पक्ष 'में आती है इसे ''देवउठान एकादशी ''भी कहते हैं।वैसे तो एकादशी हर माह में दो बार आती है।

 ये दो एकादशी की क्या बात है ?माह में दो बार कैसे आती हैं ?नंदिनी ने पूछा।

 एक कृष्ण पक्ष की एकादशी ,जो पूर्णिमा के पश्चात आती है ,दूसरी शुक्ल पक्ष की एकादशी जो अमावस्या के पश्चात आती है। अब ये मत पूछना कि ये शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष क्या हैं ?

सही कहा आपने ,ये प्रश्न मैं पूछने वाली थी ,प्रभा बोली। 


कृष्ण पक्ष जिसे आम भाषा में अंधेरी कहते हैं ,जब ''कृष्ण पक्ष ''होता है ,तब चन्द्रमा घटता रहता है और ''अमावस्या ''पर पूर्णतः अँधेरा छा  जाता है। ''शुक्ल पक्ष ''में चंदा बढ़ता रहता है और ''पूर्णिमा ''पर पूरा गोल हो जाता है। 

जब एकादशी हर माह आती है ,तब इस एकादशी का क्या विशेष महत्व है ,इसे ''देव उठान ''एकादशी क्यों कहते हैं ?

आजकल की पीढ़ी भी न ,कोइ  जानकारी नहीं रखती ,जो देव चार माह पहले आषाढ़ में '' देवशयनी एकादशी ''पर सो गए थे ,वो आज के दिन उठाये जाते हैं।ये दिन ''चातुर्मास  ''के दिन भी माने जाते है। आज ही के दिन तुलसी का विवाह भी ''शालिग्राम से किया जाता है।आज के दिन भगवान ''विष्णु ''की पूजा की जाती है।  इसके विषय में एक कहानी भी है -  शंखचूड़ नामक राक्षस ''का विवाह वृंदा से हो जाता है। शंखचूड़ वृंदा  के' सत 'के कारण तीनों लोकों पर अपना आधिपत्य स्थापित कर लेता है। तब विष्णु तुलसी के ''सतीत्व''को उसके पति का रूप धारण कर  नष्ट  करते हैं ,जिस कारण भगवान शिव ''शंखचूड़ ''को मार देते हैं  ,जब  वृंदा  को इस बात पता  का पता चलता है ,तब  वृंदा  इस धोखे के लिए ,उन्हें श्राप दे देती है कि  वो काला पत्थर बन जाएँ और स्वयं अपने पति के साथ भस्म हो  जाती है। उस राख़ से तब तुलसी नामक पौधे का जन्म होता है। 

आज ही के दिन ,जब विष्णु जी से तुलसी शालिग्राम के रूप में विवाह करती है इसीलिए इस दिन का विशेष महत्व है। आज के दिन व्रत उपवास करने से कई जन्मों का पुण्य प्राप्त होता है। आज के दिन कुछ सावधानियाँ भी अपनानी पड़ती हैं। 

जैसे -चावल नहीं खाने चाहिए ,मांसाहार व् तामसिक भोजन न करें ,ये तो मैं जानती हूँ ,तुलसी दल भी नहीं तोड़ते , कहते हुए रेनू बोली। 

ठीक ,आज से सभी मांगलिक कार्य आरम्भ होते हैं ,इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। 

दीदी ,हमारे गांव में तो दीवार पर गेरू के रंग से देव बनाये जाते हैं ,अपने सभी ,बड़े बुजुर्गों से लेकर बच्चों का नाम भी उस दीवार पर लिखा जाता है।यहाँ तक कि जानवरों तक के पैर बनाये जाते हैं। छोटा बच्चा ,छोटे पैर बड़ा बच्चा बड़े पैर।  आज ही के दिन ,सिंघाड़े और शकरगन्दि भी प्रसाद के रूप में बांटते हैं। तब उस स्थान पर जहाँ देव बनते हैं ,उस स्थान पर थोड़ा धान अथवा गेहूं रखकर ,घर की सभी महिलायें मिलकर देव उठाती हैं और गाती हैं -उठो देव ,जागो देव !

                                                       देव उठेंगे कार्तिक मास।

                                                       कोरा कलश देव ,पियो पानी। 

                                                      कुंवारों के ब्याह करवाओ  देव ,

                                                      ब्याहों के गौने कराओ देव 

                                                        आओ देव ,पधारो देव,

                                                       चूल्हा नीचे ,पांच पछिटा 

                                                       सासु जी ,ये तुम्हारे बेटा 

                                                       ओने कोने रखे अनार ,

                                               ये [अपने पति  का नाम लेते हुए ] हैं तुम्हारे यार। 

इस तरह इस गीत को गाते  हुए ,पूरे परिवार के बच्चों ,बहनों के भाइयों ,भाभियों के पतियों के नाम लिए जाते हैं।इस तरह हमारे गाँव में देव उठाये जाते हैं और ख़ुशियाँ मनाई जाती हैं। दीपिका ने बताया। 

चलो आज की चर्चा से  ये तो पता चल ही जाता है कि आज के दिन का विशेष महत्व है ,आज के दिन भगवान विष्णु की पूजा होती है और तुलसी  पत्र  का पूजा में विशेष महत्व है।सभी मांगलिक कार्य आरम्भ होते हैं गांव हो या शहर ,सभी अपने -अपने तरीक़े से इस दिन को मनाते  हैं । आज की चर्चा ,शुभकामनाओं सहित ,यहीं समाप्त करते हैं ,अगली चर्चा में फिर से मुलाकात होगी ,धन्यवाद !  


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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