नहीं मानूँगी हार......
ठानी हैं मैंने ,
क़िस्मत से रार।
जीत ही ,मेरा लक्ष्य !
पानी है ,सफलता !
हार हुई ,सीख मिली ,
दूने उत्साह संग ,
चलते जाना है।
आगे बढ़ते जाना है।
हार ने ,बहुत कुछ ,
सिखा दिया......
जीने के लिए ,एक
नया लक्ष्य दिया।
आख़िरी मोहब्बत -
मोहब्बत तो आख़िरी न होगी ,
जिस दिन तू..... मुझसे खफ़ा होगा ,
जिस दिन भुला दूँगी ,मैं नाम तेरा ,
उस दिन ज़िंदगी आख़िरी होगी।
जिस दिन........
ज़िंदगी का आख़िरी दिन होगा।
उस दिन मोहब्बत भी आखिरी होगी।
