Haar ,jeet ,seekh

 नहीं मानूँगी हार...... 

ठानी हैं मैंने ,

क़िस्मत से रार। 


जीत ही ,मेरा लक्ष्य !

पानी है ,सफलता !

हार हुई ,सीख मिली ,

दूने उत्साह संग ,

चलते जाना है। 

आगे बढ़ते जाना है। 

हार ने ,बहुत कुछ ,

सिखा दिया...... 

जीने के लिए ,एक 

नया लक्ष्य दिया।


आख़िरी मोहब्बत -

 मोहब्बत तो आख़िरी न होगी ,

जिस दिन तू..... मुझसे खफ़ा होगा ,

जिस दिन भुला दूँगी ,मैं नाम तेरा ,

उस दिन ज़िंदगी आख़िरी होगी।

जिस दिन........ 

ज़िंदगी का आख़िरी दिन होगा।

उस दिन मोहब्बत भी आखिरी होगी।   

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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