Chunauti

नमस्कार बहनों और दोस्तों  ! आज हमें चुनौती पर लिखने की चुनोेती  मिली है , चुनौती यानि ललकार !जीवन में मनुष्य को अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। चुनौती कहा  जाये तो एक तरह से ''टकराव'' भी कह सकते हैं। जो परस्पर दो प्रतिद्व्न्दियों के बीच होता है। जो एक व्यक्ति दूसरे को अपनी कला ,अपनी ताकत का प्रदर्शन करने के लिए चुनौती देता है। चुनौती किस के भी मध्य हो सकती है ,एक कलाकार के मध्य अथवा एक योद्धा भी चुनौती ले और दे भी सकता है। -



जीवन का हर पल है ,चुनौती !

जीवन जीना भी है ,इक चुनौती !

अब न मानूंगी कभी हार.......  

  मैंने  ली है ,ये  चुनौती !

 आगे बढ़ने की ललक ,

 जगाती है........ चुनौती !

 मज़बूत बनाती है चुनौती !

  स्वयं को ललकारती ,

 नजर आती है ,चुनौती !

स्वीकारती हूँ ,मैं चुनौती !

ये बात तो दीदी आपने सही कही ,चुनौती मिलती है ,तभी आदमी में उत्साह पैदा होता है ,दूसरे को टक्कर देने का ,उसे हराने का। अब ये जो प्रतियोगिताएँ होती हैं ,तब उसमें आदमी को पता चल जाता है कि उसका ज्ञान  कितना है ? या वो अपनी कला में कितना पारंगत है ?या फिर उसकी शक्ति की परख़ हो जाती है। वरना सभी अपने आपको समझदार समझकर  बैठे रहें। न ही किसी में लड़ने का ,जीतने का उत्साह होगा पाखी बोली।

हाँ ये बात भी सही है ,अब मेरे बेटे की कक्षा में चित्रकला की प्रतियोगिता हुई ,तब उसने अपना आंकलन  स्वयं ही कर लिया कि वो कितना अच्छा या बुरा कलाकार है ?तभी मेरे पास आकर बोला -मम्मी अभी मुझे और मेहनत की आवश्यकता है ,मुझे कुछ कहना ही नहीं पड़ा ,तृप्ति ने बताया। 

चुनौती न हो तो ,आदमी आलसी हो जाये ,मेहनत ही न करे ,चुनौतियाँ आदमी को उसकी कमी बताने के साथ -साथ उसे मजबूत भी बनाती हैं ,उसे लड़ने के लिए तैयार करती हैं ,उसमें जीतने की ललक जगाती हैं। इससे आदमी का मूल्यांकन हो जाता है कि विपरीत परिस्थितियों में व्यक्ति कैसे आगे  बढ़ता है ?रेनू बोली -अब कोरोना को ही ले लो ,कैसे लोग कोरोना से लड़े और अपने को मजबूत बनाया ,आज का यही सबसे बड़ा उदाहरण है।

सही कह रहीं हैं ,आप !  इसी से मिलती -जुलती कहानी मुझे भी स्मरण हो आई।

 एक किसान बड़ा ही परेशान था और वो  हमेशा भगवान से शिकायत करता रहता ,कभी आप बहुत बारिश कर देते हो ,कभी सूखा पड़ जाता है। कभी आंधी -तूफान ले आते हो। जिस चीज की आवश्यकता होती है उसी के विपरीत कार्य  करते हो। मेरे हाथ में यदि शक्ति आ जाये तो मैं सब ठीक कर दूंगा। सब चीज सही समय पर सुचारु रूप से होगी और सब खुश होंगे। 

एक दिन उसकी  शिकायतों को सुनकर भगवान प्रकट हुए और बोले -एक वर्ष के लिए अपनी शक्ति मैं तुम्हें देता हूँ। अब तो किसान अपनी इच्छानुसार बरसात करता ,जैसे मौसम की आवश्यकता होती वैसा  मौसम आ जाता। जब फसल कटने का समय आया तो किसान अत्यंत प्रसन्न हुआ क्योंकि अबकी बार उसकी फसल देखने में बहुत अच्छी हुई। किन्तु जब फ़सल काटी गयी तब उसमें एक भी दाना नहीं निकला। तब किसान ने भगवान से शिकायत की ,मैंने धूप ,बरसात ,हर चीज समय पर की ,तब इसमें एक भी दाना क्यों नहीं निकला ?तब भगवान ने उसे समझाया ,तेरी फसल को जूझना नहीं पड़ा ,  उसे कुछ भी करने की आवश्यकता ही नहीं पड़ी। तब उसमें दाने कैसे आते ? इसी प्रकार इंसान को भी सबकुछ बैठे बिठाये मिल जाये तो वो मेहनत नहीं करेगा। उसे अपनी शक्ति और कमजोरी की जानकारी भी नहीं होगी। जब जीवन में वो चुनौतियों का सामना करता है तो और भी मजबूत बनता है। इसी तरह तेरी फ़सल को भी विपरीत परिस्थितियों से जूझना नहीं पड़ा। तब उसमें दाने भी नहीं आये। 

चलिए !अब अपनी चर्चा यहीं समाप्त करते हैं ,फिर से एक नई चुनौती लेकर आएंगे ,धन्यवाद ! 

 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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