पता नहीं ,वो लोग !उस जंगल की खोज करते, न जाने किधर निकल गए ?उन्हें चारु भी मिल गयी। उस स्थान के हालात देखते हुए तो लग रहा था। जैसे वहां किसी इमारत का निर्माण कार्य चल रहा हो। कुछ लोगों ने उन्हें पकड़ा भी, किन्तु उन्हें इस तरह कैसे छोड़ दिया ? शायद कोई उन पर छुपकर दृष्टि रखे हुए था या फिर लापरवाही। मंदिर की खुदाई भी चल रही थी ,कुछ मजदूर कार्य कर रहे थे ,वे पांचों उसी स्थान पर तो खड़े नहीं रह सकते वरना किसी की दृष्टि में आने का ड़र था। तब मनु बोली - तुम सभी छुपते -छुपाते उस तरफ की सीढ़ियों तक पहुंच जाओ ! उसके नीचे गलियारा है ,वहीं पहुंचकर सोचते हैं ,आगे क्या करना है ? वे पांचों धीरे -धीरे छुपते -छुपाते आगे बढ़ रहे थे। तभी श्याम चौंक गया और आगे बढ़ते -बढ़ते रुक गया। मनु ने उसे इस तरह देखा तो बोली -तुम आगे क्यों नहीं बढ़ रहे ,क्या हुआ ?
श्याम बोला -उधर सामने देखो !
क्यों क्या हुआ ?
''उधर देखो '' रामफल का बेटा ! ये तो यहाँ कार्य कर रहा है ,अपने गांव से इतने नज़दीक और एक बार भी घर नहीं आया। मैं इसे बुलाता हूँ।
नहीं , मैं तो इसे नहीं जानती ,न ही मैंने इसे देखा है किन्तु इसे इस तरह बुलाना किसी ख़तरे से कम नहीं ,पहले सभी को उन सीढ़ियों से तहखाने में जाने दो। तब हम उससे मिलने का सोचेंगे ,यदि वो यहां पर फंसा हुआ है तो उसको निकालने का प्रयत्न करते हैं ,कहकर वो श्याम का हाथ पकड़कर लगभग खींचते हुए आगे बढ़ गयी। सभी बारी -बारी से उन सीढ़ियों पर आ गए और नीचे उतरने लगे। तब मनु बोली -तुम लोग वहाँ भी सतर्क ही रहना ,हम अभी आते हैं कहकर वो फिर से सीढ़ियों से ऊपर आई। उसने आस -पास देखा। तभी उसने श्याम से एक तरफ देखने के लिए इशारा किया।
देखो !वो उधर उस पेड़ पर एक कैमरा लगा हुआ है ,शायद इन लोगों पर नजर रखने के लिए ,हम भी शायद किसी कैमरे की नजर में आ गए हों ,कह नहीं सकते। अब हमें ये तो पता चल ही गया कि रामफ़ल का बेटा यहाँ है। पहले हम वापस चलकर ,अपने दोस्तों को सुरक्षित करते हैं।
तुम भी न...... कुछ भी करती और कहती हो ,अभी वो हमारे सामने है ,हम उससे मिलते हैं शायद उसी से कुछ पता चल जाये कि यहाँ हो क्या रहा है ?कुछ तो जानकारी मिले।
तुम देख नहीं रहे , हम उससे कैसे मिल सकते हैं ?बात करना तो दूर की बात है।
कोशिश तो कर ही सकते हैं ,उसे छुड़ाकर अपने साथ ही ले चलेंगे।
तुम क्यों उसके साथ -साथ अपनी जान भी गंवाना चाहते हो ? उसके नजर से हटते ही वो लोग सतर्क हो सकते हैं।
तुम क्या समझती हो ? उन्हें हमारे होने का नहीं पता है ,उन्हें हमारे होने का पता है क्योंकि हमारे आने पर ही ,उन्होंने हम पर गोलियाँ चलवाईं और हमें बंदी बनाकर भी छोड़ दिया। अब ये ही उनकी कोई चाल भी हो सकती है ,या फिर वो यहाँ हमारे आने का उद्देश्य जानना चाहते हों। जब तक उन्हें हमसे कुछ खतरा नहीं लगता है ,तब तक वो हम पर नज़र रखे रहेंगे। ये कैमरा तो हमें दिख गया ,दूसरा या तीसरा कैमरा भी हो सकता है।
उसकी बातों को समझते हुए मनु बोली - अब क्या करना है ?
तुम यहीं रुको !मैं दूसरी तरफ से जाकर ,उस लड़के को बुलाता हूँ किन्तु तुम यहीं रहना ,इस स्थान से बाहर मत आना।
श्याम मनु को उसी स्थान पर छोड़कर ,मिटटी की ढेरियों में छुपता -छुपाता ,जो कैमरा दिख रहा था ,उससे अलग एक अन्य स्थान पर छुप जाता है ताकि उन लड़कों की नजर उस पर पड़े। कुछ देर तक इसी तरह खड़े रहने पर भी उन लोगों ने नजर उठाकर नहीं देखा ,उनके चेहरों से दहशत साफ नजर आ रही थी। कुछ देर तक इसी तरह खड़े रहने पर भी, किसी ने उस पर दृष्टि नहीं डाली। तब पहले तो वो वापस चलने को हुआ तभी उसने सोचा -यहाँ तक आया हूँ तो ,दुबारा प्रयत्न करके देख लेता हूँ। अबकी बार उसने वहीं से एक मिटटी ढेला उठाया और उनकी तरफ फेंका। उस लड़के ने तो नहीं देखा किन्तु किसी दूसरे लड़के की दृष्टि उस पर पड़ गयी और उसने नजर उठाकर देखा। उसकी दृष्टि भी श्याम पर पड़ी इससे पहले की वो कुछ कहता या कोई भी प्रतिक्रिया दिखलाता। श्याम ने अपने मुँह पर अँगुली रख उसे शांत रहने का इशारा किया और दूसरे हाथ से उसे अपने पास बुलाया। कुछ देर के लिए ,वहीं ढ़ेरी के पीछे उसकी प्रतीक्षा करता रहा किन्तु वो नहीं आया।
श्याम ने फिर से बाहर की तरफ झाँका , श्याम को देखने के पश्चात ,उस लड़के के चेहरे के भाव बदल चुके थे। उसे ड़र भी था और उससे मिलना भी चाहता था जैसे मिश्रित भाव थे। श्याम जान गया था ,वो अवश्य ही आएगा ,थोड़ी प्रतीक्षा करनी होगी। उसने ऊपर देखा ,वो किसी खुले आसमान के नीचे नहीं था ,उसे एहसास हुआ ,वो जमीन के अंदर ही किसी स्थान पर है ,इस वक़्त तो ये अंदाजा लगाना भी मुश्किल है कि वो लोग इस समय कहाँ पर हैं ? कुछ देर पश्चात ,उसके सामने वो लड़का था।
श्याम ने उसे देखा और पूछा तुम कौन हो ?
मैं मोहन !आप चले जाइये ,नहीं तो मारे जाओगे।
तुम लोग यहाँ कैसे ?और ये खुदाई क्यों कर रहे हो ?
मैं कुछ नहीं जानता ,आपके साथ -साथ मेरी जान भी चली जाएगी। किसी से बात करने की भी इजाजत नहीं है ,मैं अपने घर जाना चाहता हूँ। मुझे बचा लीजिये कहकर वो वापस जाने लगा तब श्याम ने उसका हाथ पकड़ लिया और बोला -ये तो बताओ ! ये खुदाई क्यों ????
ख़जाने की तलाश........ में ,तभी एक गोली सीधे उसके माथे में छेद कर गयी। वो लड़का वहीं गिर गया ,अगली गोली पर श्याम तेरा नाम हो सकता है ,सोचकर श्याम अपने स्थान से कूदकर भागा और वो इतनी तेज भागा जैसे कोई भूत उसके पीछे लगा हो। उसने मनु का हाथ पकड़ा और सीढ़ियों की तरफ दौड़ लगा दी और मनु हाथ पकड़कर तब तक भागता रहा ,जब तक कि उसे लगा कि वो सुरक्षित है। इतनी तेज दौड़ने से ,उसकी सांसे उखड़ रही थीं। गला भी सूख गया था। वो कुछ देर इसी तरह बैठा रहा ,अपनी स्वासों को संयत करने में लगा रहा।
मनु ने उसे पानी दिया ,वो एक घूंट में ही सब गटक गया। तब उसे एहसास हुआ ,मनु उससे पूछ रही थी कि क्या हुआ ,वो इस तरह क्यों भाग रहा था ?
वो लड़का !!!!! उस लड़के को उन लोगों ने मार दिया।
क्या??????
आखिर तुम्हारे कारण ,बेचारे रामफल का बेटा मारा गया ,मैंने पहले ही मना किया था किन्तु तुम्हें तो उसे छुड़ाने की पड़ी थी। अब वो बेचारा दुनिया छोड़कर ही चला गया। इससे वो लोग भी जान गए होंगे कि हम लोग भी यहाँ हैं।
वो रामफल का बेटा नहीं था।
तो फिर.....
वो तो कोई मोहन था ,वो तो मुझसे कह रहा था -मुझे बचा लो !
मनु ने माथा पकड़ लिया ,तुमने अपनी जिद के चलते एक ग़रीब बच्चे की जान खतरे में डाल दी। श्याम के चेहरे पर पछतावे के भाव थे। वो मन ही मन उस बच्चे के लिए अत्यन्त दुखी था ,मेरे कारण किसी की जान चली गयी।
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