Bevafa sanam [part 9 ]

मनु अपने घर आ गयी किन्तु उसका मन रामपुर के उसी जंगल में भटक  रहा था ,वो जब भी पढ़ने बैठती ,तभी उसका ध्यान उस जंगल में घुसते उस आदमी की तरफ चला जाता ,श्याम तो कह रहा था कि  उस जंगल में कोई नहीं जाता फिर वो इतनी रात्रि में कैसे गया ?अगले दिन उसने प्रातःकाल उठते ही ,समाचार -पत्र उठाकर देखा किन्तु उसमें ऐसी कोई भी सूचना नहीं थी। ये बात  जब उसने श्याम को बताई तो उसने भी विश्वास नहीं किया। ये उसकी आँखों का धोखा तो नहीं हो सकता।



 उसने मोहित से ,फिर से उस बात का ज़िक्र किया किन्तु वो तो जैसे चिढ गया और उसे डपटते हुए बोला -मैं कई दिनों से देख रहा हूँ ,तुम अक्सर उन्हीं विचारों में खोई रहती हो। तुम्हें डॉक्टर बनना है या जासूस। अपनी पढ़ाई पूरी करो ,इससे पहले कोई भी बात ,इस विषय में नहीं होनी चाहिए।

 गांव से बाहर निकलते ही  दोनों तरफ घने जंगल हो जाते हैं किन्तु कांटेदार तार तो सीधे हाथ की तरफ ही लगे थे। एक तरफ तो लोग खेती -बाड़ी करते थे। यदि कोई जंगली जानवर होता तो सड़क पार करने से  उन्हें  कौन रोक सकता था ?फिर तो चाहे ,कांटेदार तार ही क्यों न लगे हों ?इसका अर्थ है ,उस जंगल में ,कोई जानवर तो होगा नहीं ,जिससे इंसानों  को खतरा हो ,फिर ऐसा क्या हो सकता है ? जिससे इंसान उस जमीन पर जाते ही ग़ायब हो जाते हैं। उनकी लाश भी नहीं मिलती ,मनु ने जैसे -तैसे अपने इम्तिहान पूर्ण किये और अब फिर से उस जंगल के विषय  में सोचने के लिए स्वतन्त्र थी।उसने श्याम को ,फोन किया और श्याम से वही प्रश्न किया -उस जंगल में ,क्या कोई दुर्घटना हुई  ?

श्याम का भी वही जबाब -नहीं ,जब वहां कोई जायेगा ही नहीं तो ,दुर्घटना कैसे हो सकती है ?समझ नहीं आ रहा कि तुमने ऐसा क्या देखा ?जो इस तरह जानने के लिए उत्सुक हो। 

श्याम मैंने ये तो अंदाजा लगा लिया ,उस जंगल में जंगली जानवर तो हैं नहीं ,यदि होते ,तो वो पुलिस क्या , गांववाले क्या ?या फिर कांटेदार तार ही क्यों न हों ?वो किसी को भी नहीं छोड़ते और वो जो तार लगे हैं ,वे भी उन्हें नहीं रोक पाते। 

ये तो तुमने सही कहा ,मैने भी ये बात नहीं सोची ,तुम्हें तो जासूस होना  चाहिए श्याम ने उसकी प्रशंसा करते हुए कहा। 

ज्यादा प्रशंसा की आवश्यकता नहीं ,पहले पूरी बात तो सुन लो ,मैंने इस गांव के जंगलों के विषय में जानकारी लेने का प्रयत्न किया तुम्हारे गांव का नाम तो नहीं किन्तु आसपास के जंगलों के विषय में पता चला है कि उस स्थान पर पहले ,बहुत समय पहले वहां भी ,एक गांव हुआ करता था। किसी प्राकृतिक आपदा के कारण वो गाँव के गांव जमीन में धंस गए या यूँ कहो ! जमीन के अंदर समा गए। 

तुमने तो बड़ी जानकारी निकाली ,हमने तो कभी इस चीज की आवश्यकता ही महसूस नहीं की। तुम्हारी दिलचस्पी देखकर ,मुझे भी इसमें रूचि पैदा होने लगी है। 

यहाँ रुचि की बात नहीं ,तुम ही सोचो ! जब यहाँ कोई जंगली जानवर नहीं ,हुआ भी तो इतना ख़तरनाक नहीं होगा, कि वो एक आदमी को खा जाये और उसका अंश भी न मिले। अगर  किसी ने भी उस जानवर को देखा होगा तो शोर भी मचाया होगा और उसे देखकर भागा भी होगा किसी ने तो उसकी चीख़ -पुकार कुछ तो सुनी होगी। 

मैं तो बचपन से ही यहीं पर पला -बढ़ा हूँ ,न ही मैंने किसी को उधर जाते देखा है ,न ही किसी को उधर से आते देखा है ,न ही इस तरह का कोई  शोर सुना है। 

अच्छा एक बात बताओ !तुम्हारे घर में ,जो सबसे बड़ा बुजुर्ग है ,उससे इस तरह की जानकारी लेने का प्रयत्न करना। 

अरे यार !छोडो भी ,इसमें हमें क्या करना है ?तुम अपनी डॉक्टरी पूरी करके विवाह करके ,इधर आ जाओ !और जितनी भी जासूसी करनी है ,कर लेना ,श्याम थोड़ी लापरवाही से बोला। 

तुम्हें मेरी सहायता करनी है या नहीं ,नहीं करनी है तो मना कर दो ,मैं किसी  और तरीक़े  से अपनी जानकारी निकाल लूँगी मनु खीझकर बोली। 

अरे यार !तुम तो बुरा मान गयीं ,किन्तु मैं ये जानना चाहता हूँ ,तुम्हें इस जंगल में अचानक से कैसे इतनी दिलचस्पी जाग्रत हो गयी ?तुम तो डॉक्टरी की पढ़ाई कर रही थीं न। 

श्याम के नम्र लहज़े को सुनकर मनु भी नम्रता से बोली -मुझे उसमें कोई दिलचस्पी नहीं थी किन्तु जब तुमने बताया -कि इसमें जाकर लोग गुम हो जाते हैं ,वापस नहीं आते। तब मेरे मन में जिज्ञासा जागी कि ये लोग ऐसे किस स्थान पर चले जाते हैं ? जो पुलिस को भी कोई सबूत नहीं मिला। या तो किसी भूत -प्रेत का कोई कांड हो सकता है। या  फिर ऐसा कोई जानवर ,जो समझ से बाहर है। कुछ जानकारी तो मिले आखिर उस जंगल का रहस्य क्या है ?जबकि मैंने इतनी रात्रि में एक आदमी को उधर जाते देखा है। तुम विश्वास नहीं करोगे ,मैंने अगले दिन उठते ही, समाचार पत्र देखा कि ऐसी कोई सूचना या जानकारी मिले।

वैसे हमने इस विषय में कोई जानकारी इकट्ठा कर भी ली तो उससे क्या होगा ?श्याम ने पूछा। 

वो तो मैं नहीं जानती ,किन्तु मैं उसके विषय में जानकारी पाने के लिए अत्यंत उत्सुक ही नहीं हूँ  वरन उसके रहस्य को भी  ख़ोज निकालना चाहती हूँ। 


चलो ,मुझसे जो भी बन पड़ता है ,मैं जानकारी निकालने  में तुम्हारी सहायता करने का प्रयत्न करूंगा ,अब तो ख़ुश...... 

हाँ........ कहकर मनु ने फोन रख दिया।

श्याम तो सोच रहा था -वो मुझसे प्रसन्न होकर मेरी प्रशंसा में क़सीदे पढ़ेगी ,दो चार चुंबन मेरी तरफ उछालेगी किन्तु ऐसा कुछ नहीं हुआ।    



 


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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