मनु के जाने के ,लगभग दो माह पश्चात कुछ लोग उस जंगल में प्रवेश करते हैं। रात्रि का समय है , वे लोग चेहरे को ढके हुए ,आगे बढ़ रहे हैं। उस सुनसान जंगल में ,रात्रि के समय झींगुरों की आवाज आ रही है।वो आवाज़ ही , उस समय बड़ी डरावनी महसुस हो रही है। छह साये धीरे -धीरे जंगल में आगे बढ़ते जा रहे हैं। उन्हें जंगल में आगे बढ़ते हुए ,लगभग आधा घंटा हो गया। तब किसी ने कहा - तन्मय इस अँधेरे जंगल में घूमते हुए हमें आधा घंटा हो गया रात्रि भी गहराने लगी है। अभी तो कुछ भी ,नया नहीं दिख रहा ,बल्कि मुझे तो ड़र है कोई जानवर आ गया तो.......
नहीं ,कीर्ति !मुझे तो किसी जानवर के होने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे वरना कुछ आवाज तो आ रही होती। चलो जो भी है ,इस जंगल की सम्पूर्ण जानकारी हमें नहीं है और जंगल भी घना होता जा तरह है कोई समतल सी खाली जमीन देखकर ,अपने टेंट लगाते हैं। कुछ हो या न हो किन्तु मुझे मच्छर तो यहां बहुत काट रहे हैं।
ऐसा कैसे हो सकता है ? जिस आदमी का हमने पीछा किया वो अचानक से कहाँ गायब हो गया ? इतना घना जंगल और जानवर भी कोई नहीं ,हो सकता है ,इधर न हो ,आगे हों ,चारु ने एक जगह देखकर अपना टेंट वहीं लगाया।
नहीं थोड़ा और आगे चलते हैं ,श्याम ने सुझाव दिया।
नहीं यार....... अब अँधेरा भी बढ़ गया और आगे पता नहीं ,क्या -क्या समस्याएँ मुँह बाये खड़ी हों ?और जंगल भी गहन हो रहा है। अब जो कुछ भी होगा ,सुबह ही होगा। थोड़ा तो उजाला हो।
क्या यार.... ये रात्रि में ही आने का सुझाव किसने दिया रोहित बोला।
आ तो हम, दिन में ही सकते थे किन्तु कोई देख लेता तो शायद आने भी नहीं देता। हो सकता है ,दुश्मन भी सतर्क हो जाता ,तन्मय ने समझाया।
सभी ने ,दो टेंट लगाए और उसमें ,एक टेंट में लड़कियां दूसरे में लड़के और आराम करने लगे। मनु ने चारु से पूछा -तुम्हारी विद्या क्या कह रही है ?क्या तुम्हें कुछ नकारात्मकता महसूस हो रही है।
नहीं ,मुझे तो कुछ भी नकारात्मक नहीं लग रहा ,जैसे तुमने तांत्रिक की कोई कहानी सुनाई थी कि उसका श्राप होगा। ऐसा कुछ भी नहीं लग रहा। वैसे इतना बड़ा जंगल है ,कुछ भी हो सकता है। वैसे यहाँ फलों के भी पेड़ हैं या नहीं क्योंकि हम जो भी खाना लाये हैं ,ज्यादा दिन नहीं चलने वाला है चारु ने चिंता व्यक्त की।
वैसे तो हम पूरी तैयारी से आये हैं किन्तु ज्यादा कुछ परेशानी होगी तो हम वापस लौट जायेंगे मनु ने उसे आश्वस्त किया।
इस जंगल के दूसरी तरफ तो बड़ी सी नहर है जिसका बहाव बहुत तेज है। मनु सोच रही थी -कहीं मैंने इन लोगों को साथ लाकर कोई गलती तो नहीं कर दी। जब से यहाँ से गयी थी ,तभी से अपने कार्य में जुट गयी थी। उसने मोहित को अपने कार्य में शामिल करना चाहा किन्तु वो तो उसकी कोई बात सुनने के लिए तैयार ही नहीं था। उसके अनुसार तो मैं ,अपना समय व्यर्थ कर रही हूँ। मुझे भी नहीं पता ,जो भी मैं ,कर रही हूँ ,उसका क्या परिणाम हो सकता है ?किन्तु ये जंगल मुझे अपनी ओर खींच रहा है।
अपने इन दोस्तों को भी ,अपनी इस यात्रा में शामिल करना चाहा वो भी तैयार हो गए। चारु ने जब तांत्रिक की कहानी सुनी, तब उसने अपने कार्डस इस्तेमाल किये और बोली -ये कार्ड्स हमे अच्छा संकेत दे रहे हैं। हम किसी अच्छे कार्य को अंजाम देने वाले हैं। कीर्ति को भी रहस्य्मयी चीजों की जानकारी लेने और देखने का शौक है। तन्मय इतिहास का विद्यार्थी है। ये सभी हमारी टीम के लिए आवश्यक हैं। इस तरह से हमारी एक टीम बन गयी। श्याम को भी इस इलाके की जानकारी तो है ही ,इसका साथ चलना भी आवश्यक है। वो तो अपने दादाजी और परिवार से एक सप्ताह के लिए ,बाहर छुट्टी मनाने जाने के लिए कहकर आया है। वो ही क्या ,हम सभी इसी तरह ही तो ,घर में झूठ बोलकर आये हैं।अभी वो ये सब सोच ही रही थी ,उसे लगा जैसे जमीन हिल रही है ,उसे लगा -जैसे भूकंप आया है। वो थोड़ा घबराई भी कहीं उस तांत्रिक के श्राप के कारण ,जमीन धसने तो नहीं लगेगी किन्तु कुछ समय पश्चात ही ,उसका हिलना बंद हो गया। किन्तु फिर भी उसने महसूस किया ,जैसे जमीन के अंदर से कोई आवाज आ रही है।
उसने कीर्ति को हिलाया किन्तु वो तो गहरी नींद में सो चुकी थी किन्तु मनु को नींद नहीं आ रही थी। उसे लगा एक आदमी का जगना भी जरूरी है कोई परेशानी होने पर ,वो शोर तो मचा सकती है। उस अँधेरे में वो आँखें फाड़ -फाड़कर देखने का प्रयत्न कर रही थी। पता नहीं ,उसे कब नींद आई ? जब उठी तो उसके दोस्त ,अपने दैनिक कार्यों से निवृत्त हो चुके थे। तब उसने उनसे पूछा -क्या किसी ने रात्रि में ,जमीन में कोई हलचल महसूस की थी ?
तन्मय बोला -हाँ ,लग रहा था ,जैसे जमीन हिल रही है ,अब सभी आस -पास रहना किन्तु इधर -उधर देखना आरम्भ करो। क्या कुछ विशेष मिलता है ?अभी दिन भी ठीक से नहीं निकला था ,तभी दूर किसी झाड़ी में हलचल सी महसूस हुई। सभी इधर -उधर छिप गए ,तभी एक नील गाय दौड़ते हुए निकल गयी ,कुछ देर प्रतीक्षा करने के पश्चात ,वे बोले -तुम तो कह रहे थे ,कि यहाँ कोई जानवर नहीं।
मैंने भी पहली बार देखा ,इस जंगल में ,मैं भी तो ,आप लोगों की तरह पहली बार ही आया हूँ।
दोस्तों ! अब हमें सतर्क रहना होगा ,हम नहीं जानते इस जंगल में जानवर हैं और वो भी कितने ख़तरनाक ?कोई भी ,कहीं भी कुछ अजीब दिखे या फिर ऐसी जगह मिले तो एक दूसरे को इशारा करना। कहकर वो आगे बढ़े। तभी एक पेड़ के ऊपर से चारु के ऊपर कुछ गिरा और वो बेहोश हो गयी।उसकी चीख़ तक न निकली। किसी को भी इस बात की भनक न लगी। पेड़ से कोई उतरा और बड़ी सफाई से बिना आहट के कोई उसे वहाँ से ले गया। किसी को उसकी आहट भी न मिली। वे सभी सतर्क थे लेकिन कोई उन पर नजरें रखे हुए था , इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं थी। अब न जाने ,कौन सी मुसीबत उनकी राह तक रही थी ? वे सभी ख़ामोशी से आगे बढ़ रहे थे। तभी तन्मय को एक गड्ढा दिखा ,तन्मय उसके समीप गया और देखा वो कोई छोटा -मोटा गड्ढा नहीं है।

