Bevafa sanam [part 12]

मनु का भेष बदलकर ,श्याम !उसे अपने दादा जी से मिलाने ले जाता है और मनु उनसे उस जंगल के विषय में कोई कहानी जानना चाहती है ,जो आज तक दादाजी ने श्याम को भी नहीं बताई ,आज बिल्लू बनी मनु को सुनाते हैं - कहानी में राजा  तांत्रिक से अपनी बेटी का विवाह करने से इंकार करता है। तांत्रिक जिद पर अड़ जाता है। राजा ये भी जानता था, कि तांत्रिक अनेक शक्तियों का मालिक है ,यदि इसने अपनी शक्तियों का प्रयोग किया तो ये उसके और उसके गांववासियों के लिए अच्छा नहीं होगा। तब राजा उस तांत्रिक से पूछता है ,मेरी बेटी ने इतना  आरामदायक जीवन जीया है ,क्या तुम उसे ऐसा जीवन दे सकते हो  ? तब भी तांत्रिक अपनी ज़िद पर कायम रहता है। तब राजा उसके सामने शर्त रखता है -


तांत्रिक  के न मानने  पर , राजा अपने सलाहकारों से विचार -विमर्श करता है ,तब सभी का ये फैसला होता है कि कुछ दिनों या माह के लिए तांत्रिक को टरका देते हैं ,उसके पश्चात कोई उपाय खोज निकालेंगे। तब राजा तांत्रिक से कहता है - मैं जानता हूँ ,कि आप असीम शक्तियों के मालिक हैं ,आप कुछ भी कर सकते हैं किन्तु मैं ये भी मानता  हूँ कि आपको गृहस्थजीवन की कोई जानकारी नहीं , यदि आप विवाह करना ही चाहते हैं ,तो मैं इसके लिए सहर्ष तैयार हूँ ,किन्तु उससे पहले आपको अपने लिए एक घर ,और गृहस्थी से जुडी आवश्यक सामग्री जुटानी होगी। मैं आपकी इच्छानुसार अपनी बेटी का हाथ आपके हाथ में देने को तैयार हूँ किन्तु आपको अब उसके लायक बनना होगा। 

तांत्रिक क्रोधित हुआ और बोला -तुम मेरी शक्तियों से परिचित नहीं हो ,मैं चाहुँ तो ,तेरी इस  नगरी को यूँ चुटकियों में ,भस्म कर सकता हूँ। दिन को रात्रि में बदल सकता हूँ। 

ये सब मैं मानता हूँ ,आप सभी चीजें नष्ट कर सकते हैं ,सृजन नहीं कर सकते। शक्ति से नहीं ,अपनी मेहनत से एक घर का निर्माण करना है ,और आवश्यक साधन जुटाने हैं।राजा ये बात समझता था - यदि राजा तांत्रिक से अपनी बेटी का  विवाह करने से  इनकार कर देता ,तब भी वो अपनी शक्तियों के बल पर जबरदस्ती विवाह करता ,और भी कुछ अहित कर सकता था किन्तु राजा ने इंकार नहीं किया। राजा ने पुनः विनम्रता से कहा -एक माह तक आप बिना किसी शक्ति के ,बिना किसी का भी अहित किये ,आप सभी साधन जुटा लें तो आ जाना ,मैं ख़ुशी -ख़ुशी अपनी बेटी का विवाह आपसे कर दूंगा। तांत्रिक को राजा की विनम्रता ही ले डूबी ,वो अपनी  जबान देकर चला तो गया ,किन्तु अब उसके सामने प्रश्न था- कि घर कैसे बनेगा ? बिना धन  के तो घर बन ही नहीं  सकता। धन कमाने के लिए तो मेहनत करनी होगी कोई भी कार्य तो करना ही होगा। 

वो तो जंगलों ,गुफाओं में रहने वाला प्राणी ,अचानक ही उसे न जाने क्या सूझा ?जो उस राजकुमारी से विवाह करने चला। क्या उसकी बुद्धि मलिन हो गयी थी ?न जी न ,उसे सीधा मत समझिये ,इसके पीछे से  उसका यह उद्देश्य था। 

क्या उद्देश्य था ?दादाजी !मनु ने उत्सुकतावश पूछा। 

वो राजकुमारी एक विशेष नक्षत्र में पैदा हुई थी ,उसे वैसे तो उठाकर ले जा नहीं सकता था ,तब उसने उससे विवाह करने की ठानी। उस नक्षत्र में पैदा हुई लड़की की संतान बहुत बलशाली और बुद्धिमान होगी और उसके कौमार्य को भंग करके, उस रक्त से एक विशेष पूजा होगी जिससे उसकी शक्तियां भी बढ़तीं। ये सब आसानी से मिल सकता था। बस एक माह की तो बात थी। वो कार्य तो कुछ भी करना नहीं जानता था कार्य करने से एक माह में ,इतना अधिक धन भी अर्जित नहीं कर सकता था इसीलिए  वो तांत्रिक अब गांव -गांव जाकर ,अपने जादू से लोगों का दिल बहलाता। कोई -कोई तो ,खुश होकर अत्यधिक धन दे देता। 

तांत्रिक ईमानदारी से अपनी शर्त को पूर्ण करने का प्रयास कर रहा था किन्तु राजा अपने सलाहकारों से विचार -विमर्श करता है और ज्योतिषियों से भी पूछता है ,तब उन्हें पता चलता है कि ''विशिष्ट नक्षत्र ''में पैदा होने के कारण ही वो राजकुमारी से विवाह के लिए उद्यत हुआ है। इस नक्षत्र के कारण ,उसकी शक्तियां और बढ़ेंगी जिनका वो दुरूपयोग ही करेगा। इससे पहले की वो यहाँ आकर पुनः राजकुमारी से विवाह करने की सोचे उससे पहले ही ,उसका किसी अच्छे लड़के को देखकर ,विवाह कर देना ही उचित है। सम्पूर्ण तैयारियाँ गुप्त रूप से होती हैं। किन्तु जब राजकुमारी का विवाह हो रहा था ,तब उस तांत्रिक को इस बात का आभास हो गया और वो समय से पहले ही आ पहुंचा। उसे समझाया गया कि किसी अन्य लड़की का विवाह है किन्तु वो नहीं माना। उसे राजकुमारी से पूर्णिमा की रात्रि को ही विवाह करना था किन्तु जब उसे पता चला कि राजा उसको धोखा दे रहा है। तब वो अत्यधिक कुपित हुआ। और बलपूर्वक राजकुमारी को अपने साथ ले जाने लगा किन्तु राजकुमारी ने उसके साथ जाने से इंकार कर दिया।



 

अपने प्रयास को विफल होते देख ,उसने अपनी शक्तियों का प्रयोग कर सबको जड़ कर दिया और राजकुमारी को बलात ले गया। राजकुमारी अपने परिवार की हालत देख ,उसका विरोध न कर सकी ,उसके साथ चली गयी वो भी इस शर्त पर ,कि उसकी नगरी का अहित न हो। जब वो विवाह की वेदी पर बैठी थी ,तभी एकाएक अग्नि भड़क उठी और राजकुमारी उसी अग्नि में स्वाहा हो गयी। इस बात का तांत्रिक को बहुत दुःख हुआ वो अपना आपा खो बैठा और राजकुमारी की जली लाश लेकर उसके पिता की नगरी में वापस आया। 

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laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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