जीवन में कोई तो हो ,
जो हर पल रहे साथ।
हर लम्हें का रखे हिसाब।
करता हो ,परवाह बेहिसाब।
कोई तो हो ,जो कहे ,बार -बार।
करता हूँ तुमसे ,बहुत प्यार।
संग रहें दोनों ,बनायें सुखी परिवार।
प्रेम से करते ,एक दूजे का दीदार।
इतना सब अच्छा होता नहीं ,
दुश्मन न हों , जीवन में !
ऐसा तो जीवन नहीं।
तब ये बात समझ में आई।
कठिनाई भी बहुत आईं।
दोनों ने ही ,परेशानी उठाई।
सच्चे रहे ,लड़ते रहे ,पर साथ रहे।
अपनी उलझने खुद ही सुलझाई।
सिल्वर जुबली पर ,बधाई आई ,
तब ये ज़िंदगी समझ आई।
ये सुख -दुःख ,प्रेम का रिश्ता है।
साथ रहकर ही इसे निबाहना है।
सुख -दुःख में साथ निभाना है ,
यही सोचकर, आगे बढ़ते जाना है ,
माँ ने यही ,बात थी समझाई।
तभी लोग कहेंगे -''शादी मुबारक हो भाई। ''
