Shadi mubark

जीवन में कोई तो हो , 
जो हर पल रहे साथ। 
हर लम्हें का रखे हिसाब। 
करता हो ,परवाह बेहिसाब। 


कोई तो हो ,जो कहे ,बार -बार। 
करता हूँ तुमसे ,बहुत प्यार। 
संग रहें दोनों ,बनायें सुखी परिवार। 
प्रेम से करते ,एक दूजे का दीदार। 

इतना सब अच्छा होता नहीं ,
दुश्मन न हों , जीवन में !
ऐसा तो जीवन नहीं।
तब ये बात समझ में आई। 

कठिनाई भी बहुत आईं। 
दोनों ने ही ,परेशानी उठाई। 
सच्चे रहे ,लड़ते रहे ,पर साथ रहे।
अपनी उलझने खुद ही सुलझाई। 

सिल्वर जुबली पर ,बधाई आई ,
तब ये ज़िंदगी समझ आई। 
ये सुख -दुःख ,प्रेम का रिश्ता है। 
 साथ रहकर ही इसे निबाहना है। 

सुख -दुःख में साथ निभाना है ,
यही सोचकर, आगे बढ़ते जाना है ,
माँ ने यही ,बात थी समझाई। 
तभी लोग कहेंगे -''शादी मुबारक हो भाई। ''  


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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