Rahsyamyi safar

 न जाने ,कौन सी राह ?न जाने ,

 किस सफर पर निकली है वो !

अनजान ड़गर ,अनजान लोग ,

अनजाना ! है ये सफर....... !

इस सफ़र में कब ,क्या हो जाये ?

इसकी नही है ,उसको ख़बर !


ऐसा है ,ये रहस्यमयी सफ़र !

न जाने ,ये कहाँ से आई ? वो !

इसकी भी नहीं है ,उसे ख़बर !

कब क्या हो जाये ?नहीं जानती !

यही है ,उसका रहस्यमयी सफ़र। 

एक आत्मा ,जो इस दुनिया के ,

सफर पर निकली...... 

मानव तन का आवरण ओढ़े ,

जिंदगी जीने की ,चाह में चली। 

न जाने ,कितने पड़ाव पार कर ?

ज़िंदगी के रहस्यों में उलझी ,

मंज़िल की तलाश में भटकती रही। 

पार करती रही ,जीवन के चक्रव्यूह !

लेती रही मज़ा ,जीवन के रोमांचक रहस्यों का !

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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