न जाने ,कौन सी राह ?न जाने ,
किस सफर पर निकली है वो !
अनजान ड़गर ,अनजान लोग ,
अनजाना ! है ये सफर....... !
इस सफ़र में कब ,क्या हो जाये ?
इसकी नही है ,उसको ख़बर !
ऐसा है ,ये रहस्यमयी सफ़र !
न जाने ,ये कहाँ से आई ? वो !
इसकी भी नहीं है ,उसे ख़बर !
कब क्या हो जाये ?नहीं जानती !
यही है ,उसका रहस्यमयी सफ़र।
एक आत्मा ,जो इस दुनिया के ,
सफर पर निकली......
मानव तन का आवरण ओढ़े ,
जिंदगी जीने की ,चाह में चली।
न जाने ,कितने पड़ाव पार कर ?
ज़िंदगी के रहस्यों में उलझी ,
मंज़िल की तलाश में भटकती रही।
पार करती रही ,जीवन के चक्रव्यूह !
लेती रही मज़ा ,जीवन के रोमांचक रहस्यों का !
