Homepoem Raaz bylaxmi -October 09, 2022 0 लबों तक तो आती है ,कह नहीं पाती है ,जुबाँ रुक जाती है। कहते -कहते...... ,ये राज़ दिल के !दिल के राज़..... जो दिल से जुड़े हैं। दिल में ही रहने दो !ख़ुद पर ज़ब्र कर.... फ़ना हो जायेगा ये दिल मुहब्बत को ,रुसवा नहीं होने देगा। उसका दर्द नहीं चाहता। Tags: poem Facebook Twitter