परिश्रम हो या मेहनत का फ़ल....... हमारे बड़े कहकर गए हैं ,''मीठा ही होता है।'' आगे बढ़ने के लिए हर व्यक्ति मेहनत करता ही है। शिक्षा ग्रहण करने में परिश्रम ,आगे बढ़ने के लिए परिश्रम ,जीवन में सफल होने के लिए ,परिश्रम करता ही रहता है किन्तु उसका ये परिश्रम ,कितना उसे योग्य बनाता है ? कितना आगे बढ़ाता है ? उसके परिश्रम पर ही निर्भर नहीं करता। उसके परिश्रम के साथ -साथ ,उसकी उस कार्य में दिलचस्पी ,उसकी रूचि और समझ भी ,उसके परिश्रम को सफलता प्रदान करती है।
परिश्रम का फ़ल हर किसी को मीठा फल भी नहीं देता , परिश्रम तो एक किसान भी करता है ,एक मजदूर भी करता है। दफ्तर में ,एक चपरासी से लेकर बॉस तक ,सभी परिश्रम करते हैं किन्तु सभी को समान वेतन नहीं मिलता। सभी एक जैसे पढ़े -लिखे नही होते। किन्तु अपनी योग्यता को साबित करने के लिए सभी परिश्रम करते हैं। किसान तो धूप और बरसात में अपनी मिटटी में मिल परिश्रम करता है किन्तु यदि बरसात समय पर न हो अथवा आवश्यकता से अधिक हो ,तब उसकी सम्पूर्ण मेहनत पर पानी फिरता नज़र आता है। अब इस ड़र से किसान परिश्रम करना तो नहीं छोड़ देता इसीलिए परिश्रम करते रहिये ,फ़ल भी मिलेगा ही।
इसी विषय पर एक कहानी मुझे स्मरण हो आई ,मैंने कहीं पढ़ी थी। एक बार इंद्र देवता से नाराज होकर बादलों ने प्रण लिया -कि अब हम नहीं बरसेंगे ,गाँव में सूखा पड़ गया। हा हा हाकार मच गया ,उस गांव के लोग ,अपने -अपने घरों को छोड़कर जाने लगे। अब यहाँ बारिश नहीं होगी , तब खेती भी नहीं हो सकती और पानी की कमी के कारण, प्यासे मरने की नौबत आ जाएगी। तब एक किसान था ,जो अपना गांव छोड़कर नहीं गया और प्रतिदिन हल चलाता।
एक दिन ,बादलों ने उस किसान से पूछा -गांव के सभी लोग ,इस गांव को छोड़कर चले गए ,तब तुम क्यों नही चले जाते ?
किसान ने जबाब दिया -अभी ये लोग चले गए हैं ,किन्तु मैं यहीं रहकर परिश्रम करता रहूंगा ताकि जब बरसात हो तो मैं अपना कार्य [हल चलाना ]करना न भूल जाऊँ।
तब बादलों को भी चिंता हुई यदि हम अपनी ज़िद पर अड़े रहे ,कहीं हम भी बरसना न भूल जाएँ ,यही सोचकर ,बादल खूब बरसे ,खेत तो पहले से ही जुते हुए थे बरसात होने पर उनमें बीज भी बो दिए इसीलिए परिश्रम तो करते रहना ही चाहिए ,देर से ही सही ,फ़ल तो अवश्य ही मिलता है।
कुछ लोग ,परिश्रम में भी ''स्मार्ट वर्क ''करने पर बढ़ावा देते हैं। उनके अनुसार -परिश्रम करो ,किन्तु अपनी मेहनत कहाँ जाया करनी है ?किससे अधिक लाभ होगा ?ये सभी अच्छे से सोच -समझकर करना चाहिए।अपनी जगह वो भी सही हैं ,किन्तु कई बार ऐसा भी परिश्रम करना पड़ जाता है ,जिसमें न कोई स्वार्थ ,न कोई लालच ,दूसरों की भलाई के लिए भी ,परिश्रम करना पड़ जाता है। इस परिश्रम का परिणाम तभी नहीं मिलता बल्कि लोगों की दुआओं के रूप में ,अप्रत्यक्ष रूप से ,हमारे साथ होता है ,जो दिखाई नहीं देता।
