मेरे अंदर का कलाकार .....
कहता है - कुछ ऐसा !
हर तरफ़ मेरा ही चर्चा हो जैसा।
मेरे अंदर का कलाकार.....
जोड़ता है ,दो दिलों को......
मिलाना चाहता है ,बिछुड़ों को !
इक नई ऊर्जा से ओतप्रोत हो ,
जीवन में ,भर देना चाहता है ,
उदास मन में खुशियों को !
उड़ान भरना चाहता है ,
विस्तृत आकाश में........ ,
छू लेना चाहता है ,ऊंचाईयों को !
निराश चेहरों पर ,मुस्कान बिखेरना चाहता है।
बाँधना चाहता है ,रिश्तों की नई डोर को !
मेरे अंदर का कलाकार.....
समेटना चाहता है , अनन्त को !
