Krodh ki jvala

क्रोधावेग में ,वो जलती रही ,

धधकती रही ,ज्वालामुखी सी। 

उसका क्रोध इस जीवन पर था। 

इस जीवन के राहगीरों पर था। 

जो  उसके 'प्रेम ,विश्वास ,माधुर्य 

को धोखा दे ,छलते रहे...... 


छीन लेना चाहते थे,

उसके बालमन की चंचलता को..... 

क्रोध आता था विश्वासघातियों पर ,

भड़क उठती थी ,वो मशाल सी। 

क्रोध उसका , दिखता सभी को ,

जाना नहीं ,किसी ने उसके मन को ,

क्यों चली अंगारों पर ?

ये तान उसने क्यों ली ?

माना कि ,क्रोध स्वयं को जलाता है। 

क्रोध न करे ,तो इंसान ही इंसान को खा जाता है। 

इंसानियत का जामा पहने ,बहुत ऐसे बैठे हैं ,

नाजुक़ कली को मसलने को रहते हैं। 

क्रोध उसका स्वभाव नहीं ,

उसका शस्त्र है ,बचाव है,उसके मन की पीड़ा है।    

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

Post a Comment (0)
Previous Post Next Post