पृथ्वी पर रहकर ,अंतरिक्ष को याद करते हैं।
अभी हमने सम्पूर्ण पृथ्वी ही ,देखी कहाँ है ?
फिर कैसे जानेंगे ? अंतरिक्ष की शक्तियाँ ?
कैसे करेंगे ?अंतरिक्ष की गूढ़ अभिव्यक्तियाँ।
कहते हैं !जहाँ न पहुंचे रवि ,वहाँ पहुंचे कवि।
कवि की कल्पनाओं की बहुत हैं शक्तियाँ।
कल्पनायें अनन्त हैं ,अनन्त हैं भावाभिव्यक्तियां।
सूरज -चाँद, सितारे और आसमान देखा।
किन्तु अनन्त में बसी हैं ,अनन्त शक्तियाँ।
ये काम हमारा नहीं ,हमें तो बस जीने दो...... !
भावनाओं में ,करने दो काल्पनिक अभिव्यक्तियाँ।
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