Antriksh ki shaktiyan

पृथ्वी पर रहकर ,अंतरिक्ष को याद करते हैं। 

अभी हमने सम्पूर्ण पृथ्वी ही ,देखी कहाँ है ? 

फिर कैसे जानेंगे ? अंतरिक्ष की शक्तियाँ ?

कैसे करेंगे ?अंतरिक्ष की गूढ़ अभिव्यक्तियाँ।

 


कहते हैं !जहाँ न पहुंचे रवि ,वहाँ पहुंचे कवि। 

कवि की कल्पनाओं की बहुत हैं शक्तियाँ। 

कल्पनायें अनन्त हैं ,अनन्त हैं भावाभिव्यक्तियां। 

सूरज -चाँद, सितारे और आसमान देखा। 

किन्तु अनन्त में बसी हैं ,अनन्त  शक्तियाँ।

ये काम हमारा नहीं ,हमें तो बस जीने दो......  !

भावनाओं में ,करने दो काल्पनिक अभिव्यक्तियाँ।  

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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