Purn azadi

इतने लोगों ने अपना बलिदान दिया। 

इस धरती को लहूलुहान किया। 

''पूर्ण आज़ादी ''अभी  मिली नहीं। 

आजादी नहीं मिलती , दुकानों में ,

ये तो मिलती है ,भाव - विचारों में। 



पूर्ण आज़ादी तो, विचारों और सोच की है। 

अमीर और अमीर बनना चाहता है।

दूसरे के कंधे पर रख बंदूक चलाना चाहता है। 

धर्म -मज़हब के नाम पर भिड़वाना चाहता है। 

बिन मेहनत के मुफ़्त की खाना चाहता है।

आरक्षण के बल पर दलित आगे बढ़ना चाहता है। 

सत्ता जिसके हाथ है ,वो दुरूपयोग करना चाहता है।   

लालच  द्वारा ,गरीब आगे बढ़ना चाहता है।

सब चाहता है ,स्वार्थ की बेड़ियाँ तोडना नहीं चाहता है। 

इतनी बंदिशों के बाद भी ''पूर्ण आज़ादी ''चाहता है।  

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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