इतने लोगों ने अपना बलिदान दिया।
इस धरती को लहूलुहान किया।
''पूर्ण आज़ादी ''अभी मिली नहीं।
आजादी नहीं मिलती , दुकानों में ,
ये तो मिलती है ,भाव - विचारों में।
पूर्ण आज़ादी तो, विचारों और सोच की है।
अमीर और अमीर बनना चाहता है।
दूसरे के कंधे पर रख बंदूक चलाना चाहता है।
धर्म -मज़हब के नाम पर भिड़वाना चाहता है।
बिन मेहनत के मुफ़्त की खाना चाहता है।
आरक्षण के बल पर दलित आगे बढ़ना चाहता है।
सत्ता जिसके हाथ है ,वो दुरूपयोग करना चाहता है।
लालच द्वारा ,गरीब आगे बढ़ना चाहता है।
सब चाहता है ,स्वार्थ की बेड़ियाँ तोडना नहीं चाहता है।
इतनी बंदिशों के बाद भी ''पूर्ण आज़ादी ''चाहता है।
