इश्क़ हो तो, जाता है ,इक बार ,
हज़ार ग़म ले आता है ,हर बार ,
क्या ये ही ,इज़हार ए इश्क़ है ?
इश्क़ के हिस्से में ,आती है जुदाई !
इश्क़ में न जाने ,कितनों ने ?
अपनी जान गवाईं।
ये दिल !!!!!!
किसी और का होकर रह जाता है ,
अपना होकर भी........
कर जाता है ,अपने से ही' बेवफ़ाई '
अँखियाँ रोती हैं ,हर बार ,
जब दिल टूटता है,रोता है ,ज़ार -ज़ार।
ये ही साथ निभाती हैं , हर बार ?
कमबख़्त !ये इश्क़ ,हंसना तो दूर ,
रोने भी नहीं देता मेरे यार !!!!!!
'इज़हार ए मुहब्बत' किया जब से ,
अपने आप से ,मिलने भी नहीं देता।
जानता है ,ये भी ,
कुछ लोगों की फ़ितरत.....
मुहब्बत का नशा ही ,कुछ ऐसा है ,
'इज़हार ए इश्क़ 'ये कर ही देता है।
