Ijhar e ishq

इश्क़ हो तो, जाता है ,इक बार ,

 हज़ार ग़म ले आता है ,हर बार ,

 क्या ये ही  ,इज़हार ए इश्क़ है ? 

इश्क़ के हिस्से में ,आती है जुदाई !

इश्क़ में न जाने ,कितनों ने ?

अपनी जान गवाईं। 


ये दिल !!!!!!

किसी और का होकर रह जाता है ,

अपना होकर भी........ 

कर जाता है ,अपने से ही' बेवफ़ाई '

अँखियाँ रोती हैं ,हर बार ,

 जब दिल टूटता है,रोता  है ,ज़ार -ज़ार।  

 ये ही साथ निभाती हैं , हर  बार ? 

कमबख़्त !ये इश्क़ ,हंसना तो दूर ,

रोने भी नहीं देता मेरे यार !!!!!!

'इज़हार ए मुहब्बत' किया जब से ,

अपने आप से ,मिलने भी नहीं देता। 

जानता है ,ये भी ,

कुछ लोगों की फ़ितरत..... 

 मुहब्बत का नशा ही ,कुछ ऐसा है ,

 'इज़हार ए इश्क़ 'ये कर ही देता है।  

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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