Barsat ki wo raat [part 19]

शैलेश और सुनेहा की सगाई की रस्म होती है ,शैलेश को ''रक्षा सूत्र ''बंध जाने पर कुछ भी स्मरण नहीं रहता क्योंकि रुहाना की माँ का जादू समाप्त हो जाता है। रुहाना शैलेश से मिलने के लिए तड़प  रही थी। उसे अभी भी लगता है ,जब शैलेश उसे देखेगा -तब उसे सब स्मरण हो जायेगा।रुहाना उसी कार्यक्रम में ,रूप बदलकर आती है , उधर रुहाना का प्रेमी मैक ,अपना बदला लेने के लिए ,उसी कार्यक्रम में ,रूप बदलकर आ जाता है।और नंदिनी को अपनी और आकर्षित करता है ,जब नंदिनी गोदाम में किसी कार्य से जाती है ,तब मैक भी उसके पीछे जाता है और अपनी प्यास बुझाता है। जिसे नंदिनी का प्रेमी ,तुषार देख लेता है और वो बताता है कि यहाँ पर अवश्य ही कोई पिशाच या पिशाचिनी है। इस बात पर पंडित जी भी अपनी मुहर लगा देते हैं क्योंकि पिशाचिनी जितनी देर के लिए भी आई थी ,तभी दिया भी बुझ गया था और वहाँ रखे फूल भी मुरझा गए थे। 


इस बात को सुनकर सभी परेशान हो जाते हैं ,घबरा जाते हैं। तभी दो अज़नबी इंसानों की खोज़ होती है क्योंकि अब वो ही लोग नहीं दिख रहे। छत पर रुहाना और मैक लड़ रहे थे। रुहाना शैलेश के परिवार को बचाने के लिए मैक के सामने दीवार बनकर खड़ी हो गयी थी किन्तु मैक भी हार मानने  वाला नहीं था।शैलेश एक डॉक्टर था वो अपनी बहन की गर्दन देखकर ,कुछ समझता तो है किन्तु उसे दवाई लगाता है और'' इंजेक्शन ''भी लगाता है। 

 पंडितजी सम्पूर्ण घर में गंगाजल से शुद्धि करते हैं ,जब उन्हें विश्वास हो जाता है कि अब कोई बुरी आत्मा नहीं है। तब आगे की रस्म पूर्ण की जाती है। मैक और रुहाना की माँ दोनों को ही शैलेश के इस व्यवहार पर क्रोध आता है क्योंकि वो उसकी बेटी को भुला बैठा किन्तु इस सबका दोष रुहाना अपनी माँ को ही दे रही थी। यदि वो उसके साथ ऐसा न करती तब शायद आज सुनेहा के स्थान पर आज रुहाना होती।

रुहाना  आज उसी राह पर ,अपने डॉक्टर की प्रतीक्षा कर रही थी। शैलेश उसी तरह आज भी उसी सड़क से जा रहा था तभी उसकी गाड़ी रुकी ,रुहाना उसके सामने थी ,रुहाना को देखकर ,उसे स्मरण हुआ ,जैसे वो अभी सपने से जगा हो। कहने लगा -तुम इतने दिनों से कहाँ थी ?

मैं तो हमेशा से ही तुम्हारे करीब थी, पता नहीं ,क्या हुआ ? तुमने मुझे भुला दिया। 

नहीं ,मुझे तो सब स्मरण है ,तुम आज ही मेरे संग मेरे घर चलो ,आज तुम्हें अपने घर में सबसे मिलवाता हूँ ,और उसने रुहाना का हाथ पकड़कर उसे गाड़ी में बैठा लिया। 

रुहाना गाड़ी में तो बैठ  गयी किन्तु शैलेश से बोली -क्या तुम मुझे जानते हो, कि मैं कौन हूँ ?और मेरा परिवार कहाँ है ?तुम्हारे परिवारवाले जब ये सवाल पूछेंगे ,तब क्या जबाब दोगे ? 

उसकी बातें सुनकर शैलेश सोच में पड़ गया और बोला -जानता तो नहीं ,आज बता दो !ताकि मैं शीघ्र अति शीघ्र तुम्हें अपने परिवार से मिलवा सकूँ।

 रुहाना को लगा ,माँ उससे मानसिक  रूप से जुडी हुई है उसने भी माँ को किसी भी तरह का ,कोई भी जादू करने से मना कर दिया। तब रुहाना बोली -मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ। 

मैं भी , शैलेश ने तुरंत ही जबाब दिया। 

तब रुहाना बोली -अब मैं तुम्हें अपने परिवार से मिलाना चाहती हूँ। कहकर उसने अपने पंख फैलाये ,कुछ देर पश्चात ही ,रुहाना के पिता -माँ और उसका भाई शैलेश के सामने थे। उन्हीं के पीछे मैक भी आ गया था।पहले तो शैलेश कुछ घबराया किन्तु उन लोगों के व्यवहार को देखकर ,वो भी शांत रहा। उन्होंने बताया -हमारा घर यहाँ  दूर है ,इसीलिए हम ही तुमसे मिलने आ गए। अब तो शैलेश को वे बातें भी स्मरण हो आईं जो कुछ दिन पहले ,भी इसी तरह की बातें रुहाना और उसके बीच हुई थी। वो मन ही मन ये सोचकर हैरत में था कि वो एक पिशाचिनी से दिल लगा बैठा और वो उसके घर भी उससे मिलने आती थी। 

तब उसे वो बात भी स्मरण हो आई ,कि नंदिनी की गर्दन के निशान भी ,सब कुछ उसकी आँखों के सामने किसी चलचित्र की तरह घूम गया। ये ही सब ,उसके परिवार वाले भी उसकी मनःस्थिति को महसूस कर रहे थे। तभी रुहाना बोली -वो मैं नहीं ,मेरा प्रेमी मैक था। अब वो ऐसा नहीं करेगा ,कहकर रुहाना शैलेश से माफी मांगने लगी। 

शैलेश बोला -तुम क्यों क्षमा याचना करती हो ?जब तुम्हारी गलती ही नहीं है। वैसे अब वो ठीक है ,तुम सोच रही होंगी ,कहीं मैं तुम्हारी सच्चाई जानकर ,तुमसे प्यार करना छोड़ दूंगा ,तब तुम इस मामले में गलत हो। शैलेश के मुख से ऐसे शब्द सुनकर ,रुहाना का परिवार संतुष्ट हो गया। रुहाना  भी प्रसन्न थी ,खुश नहीं था तो सिर्फ मैक और वो वहां से शीघ्र ही उड़ गया। शैलेश ने ,रुहाना से कहा -कल जब वो ,आएगा तब अपनी माँ से मिलवायेगा कहकर वो चला गया। 

मैक ने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर अपनी एक टीम बनाई ,कुछ उनमें ऐसे भी थे ,जो रुहाना के परिवार को पसंद नहीं करते थे। कुछ रुहाना के कारण भी रुष्ट थे। इसे क्या आवश्यकता पड़ गयी ?इंसानों से प्रेम करने की ,क्या हम मर गए थे ?इंसान धोखेबाज़ होते हैं ,ये भी एक दिन इसको धोखा  देगा। इससे पहले कि ये इसको अपने प्रेम के जाल में  फंसाकर ,मार डाले या धोखा दे ,इससे पहले ही हम इंसानों पर आक्रमण कर देंगे। 

शैलेश अपने घर पहुंचा और अपनी माँ कविता से बताया -माँ ! मैं आपसे किसी को मिलवाना चाहता हूँ। 

कविता ने पूछा -कौन है वो !क्या सुनेहा से भी हंसी है ?अब तो तुम्हारी ज़िंदगी में ,सुनेहा आ चुकी है ,उससे क्या कहोगे ?

क्या ,आप मेरी बात समझ गयीं ? 

हाँ ! माँ हूँ तुम्हारी ,अपने बच्चे की भावनाओं को नहीं समझूंगी तो फ़िर मेरे होने का मतलब ही क्या रहा ?माँ ने , इतने  प्यार से कहा ,कि वो भावुक हो गया और अपनी माँ को सारी बातें बताईं। उसकी बात सुनकर कविता गंभीर हो गयी। एक तरफ बेटे का अँधा प्यार ,दूसरी तरफ सुनेहा। इन सबको भी ध्यान न दिया जाये ,तब वो इंसान ही नहीं ,वो तो एक पिशाचिनी है ,वो हमारे तरह नहीं बन सकती ,वो ही हमें अपनी तरह बना सकती है। पिशाचों का कोई ईमान -धर्म तो होता नहीं। मान भी लो !वो एक अच्छी पिशाचिनी है किन्तु तब भी इंसानों के बीच नहीं रह पायेगी। इस कारण तो हमारा बेटा हमसे दूर हो जायेगा। 

क्या सोचने लगीं ,शैलेश की आवाज से ,कविता का ध्यान भंग हुआ। 

कुछ नहीं ,मैं सोच रही थी ,क्या वो यहाँ हम इंसानों में रह पायेगी ?

क्यों नहीं ?शैलेश ने पूरे विश्वास के साथ कहा। सुंदर होने के साथ -साथ , उसके पास एक खूबसूरत सा दिल भी है। 


किन्तु वो एक ''पिशाचिनी ''ही रहेगी ,माँ ने उसे टटोला। लोग उसे स्वीकार नहीं कर पायेंगे। न ही वो , किसी पूजा में शामिल हो सकती है।तब इस स्थान को छोड़कर ,हमें भी जंगलों में जाना होगा या फिर वे लोग हमारा खून पीकर ,हमें ही  अपनी बिरादरी में शामिल कर लें। या तुम उसके लिए अपने माता -पिता अपनी बहन को ,छोड़कर ,उन लोगों के संग चले जाओगे। हम तो उनके जैसे बन सकते हैं किन्तु वो चाहकर भी ,हम जैसी नहीं बन सकती। माँ ने शैलेश के सामने ,कई तर्क रखे। वो समझ नहीं पाया -इसमें माँ की हाँ है या ना ! उसके सामने कई चुनौती पूर्ण प्रश्न थे। वो सोच में पड़ गया ,माँ कह तो ठीक ही रही हैं। 

शैलेश ने अब सोचना ,आरंभ किया -यदि रुहाना ,हम इंसानों की तरह दिखती है और रहे भी इसी तरह ,तब किसी को क्या पता चलेगा कि ये कौन है ?उसने डॉक्टर होने के नाते ,अनेक पुस्तकें पढ़ डालीं ,कि क्या किसी ,पिशाचिनी को इंसान बनाया जा सकता है ? उसे अनेक उदाहरण मिले बल्कि उसने पढ़ा कुछ इंसान भी ,ऐसे हैं जो रक्त पीते हैं ,उससे उन्हें ताकत मिलती है। तब उसे स्मरण हुआ ,एक बार रुहाना ने भी उसे बताया था कि वो एक नर्स है ,क्या मालूम वो वहाँ रक्त की तलाश में ही जाती हो ?बहुत माथा -पच्ची करने पर शैलेश ने  एक निर्णय लिया और सो गया। 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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