Barsaat ki wo raat [part 18]

अभी तक आपने पढ़ा -शैलेश को पता चल जाता है कि रुहाना एक पिशाचिनी है ,किन्तु वो उसके प्रेम इस कदर पड़ चुका है ,वो तब भी उससे विवाह करने के लिए तैयार हो जाता है। रुहाना बहुत प्रसन्न है और वो अपनी माँ को ये खुशखबरी देती है किन्तु तब उसकी माँ उसे बताती है -मैंने उसे सम्मोहित किया था ,क्योंकि  उसे डर था कहीं रुहाना की सच्चाई जानकर ,वो मेरी बेटी का दिल न तोड़ दे। जब रुहाना को पता चलता है ,तब वो माँ से नाराज होती है -कि आपने मेरे साथ ही नहीं उसके साथ भी धोखा किया है। शैलेश के घर जब उसकी बहन उसके हाथ में पंडितजी का दिया'' रक्षा सूत्र ''बांधती है ,तब शैलेश का सम्मोहन टूट जाता है ,उसे लगता है ,कि उसे कुछ कार्य करना है किन्तु स्मरण नहीं रहता।


 शाम को शैलेश रुहाना से मिलता भी नहीं है। तब रुहाना को बेचैनी होती है ,मैक भी उसे आकर बताता है कि आज शैलेश के घर में कुछ तो हो रहा है। तब रूहाना अपनी बेचैनी के कारण ,आज उसके घर में जाने का निर्णय लेती है। वो अपना रूप बदलती है ,और भीड़ के साथ अंदर जाने का प्रयत्न करती है किन्तु दरवाजे पर बने स्वास्तिक के कारण ,वो अंदर नहीं जा पाती। घर में ,मेहमान आते हैं ,तब मैक भी आ जाता है वो भी एक सुंदर नौजवान बनकर ,आता है किन्तु घर के अंदर प्रवेश वो भी नहीं कर पाता। तब दोनों छत पर चले जाते हैं। छत से नीचे सीढ़ियों से आते हैं। रुहाना शैलेश को तलाश कर रही थी और मैक अपने शिकार यानि नंदिनी को। उस  पर नंदिनी की नजर पड़ते ही ,नंदिनी ने उसे पहचाना नहीं ,उसके करीब आकर बोली -तुम कौन हो ?नंदिनी से नजर मिलते ही ,नंदिनी तो जैसे उसके ख्यालों में खो गयी। वो उसकी तरफ आकर्षित हो रही थी। इतना आकर्षक व्यक्ति तो उसने आज से पहले देखा ही नहीं। 

आज के कार्यक्रम में ,नंदिनी ने तुषार को भी बुलाया था किन्तु तुषार समझ नहीं पाया। नंदिनी एक अनजान व्यक्ति के पीछे -पीछे कैसे घूम रही है ?तुषार ने उससे  एक बार पूछा भी -कि ये कौन है ?नंदिनी मुस्कुराकर चली गयी ,उसने कुछ भी जबाब नहीं दिया। उसकी नंदिनी, आज से पहले तो ऐसी कभी नहीं थी किन्तु इसे आज क्या हो गया ?एकांत मिलते ही ,मैक ने नंदिनी का थोड़ा सा रक्त चखा और उसने भी ठान लिया जब इसका भाई ,मेरी प्रेमिका से इश्क़ कर सकता है। तब मैं भी नंदिनी को अपनी प्रियसी बनाकर रहूंगा। नंदिनी का खून पी लेने के कारण ,उसे गर्दन में थोड़ी जलन और दर्द हो रहा था। 

इधर पंडित जी भी आ गए ,शैलेश तैयार होकर बाहर निकला और रुहाना के समीप से निकल गया। रुहाना को बहुत दुःख हुआ ,अभी जो भी रस्में हो रही थीं ,रुहाना को इनसे कोई सरोकार नहीं था। उसे  मतलब था ,तो अपने शैलेश से ,वो वहीं भीड़ में खड़ी हो गयी ,उसके वहाँ आते ही ,वहां रखा दिया बुझ गया। और फूल भी मुरझाने लगे ,तब पंडितजी को कुछ आशंका हुई और बोले -तुम्हारे बेटे पर जिसका भी साया है ,वो यहीं कहीं है। रुहाना कोई नकारात्मक शक्तियों वाली बुरी पिशाचिनी नहीं थी किन्तु उसका जन्म ही ,उसके लिए अभिशाप बना हुआ था। उसने पिशाचों के परिवार में जो जन्म लिया था। तभी उसकी दृष्टि नंदिनी के गले में बंधे दुपट्टे पर गयी और वो समझ गयी कि मैक ने अपना जहरीला तीर छोड़ दिया है। उसे मैक पर बहुत ही क्रोध आया और वो उसे ढूढ़ने लगी। 

ये तुमने क्या किया ?वो मैक के पीछे जाकर बोली ,जो नंदिनी का रक्त पीकर ,छत पर चांदनी रात में ,गहरी साँसे ले रहा था। 

अनजान बनते हुए ,मैक बोला -मैंने क्या किया ?मैंने तो बस अपनी प्यास बुझाई और अपने प्रेम को चखा। 

तुम्हारा प्रेम ,ये कब से हो  गया ?तुम जानते हो ,वो लड़की किसी और से प्यार करती है। 

तुम भी तो ,शैलेश से प्यार करती हो ,किन्तु वो तो किसी और से विवाह कर रहा है।

 नहीं ,वो मुझसे ही विवाह करेगा ,अभी वो थोड़ा भृमित है ,जब मुझे देखेगा ,उसे सब स्मरण हो जायेगा। रुहाना ने विश्वास  के साथ कहा। 

नंदिनी भी  तो मेरी और आकर्षित हो रही है ,वो भी मुझसे विवाह करेगी। 

नहीं ,वो  तुम्हें नहीं चाहती ,तुम अपने  इरादे बदल दो ,तुमने उसे सम्मोहित किया है। उसका सम्मोहन टूटते ही ,उसे स्मरण भी नहीं होगा कि तुम कौन हो या उससे  कब मिले ?

तुषार नंदिनी के लिए परेशान था ,किन्तु नदिनी का व्यवहार उसे समझ नहीं आ रहा था। वो नंदिनी के पास गया बोला -तुम ठीक तो हो !

हाँ ,कहकर नंदिनी बोली -पता नहीं ,थोड़ी कमज़ोरी लग रही है। कहकर वो वहीं कुर्सी पर बैठ गयी। उसकी गर्दन से उसका दुपट्टा थोड़ा  ख़िसक गया। उसकी गर्दन के वे निशान ,तुषार ने देख लिए ,देखते ही चौंका और पूछा -ये तुम्हें क्या हुआ ?

क्या हुआ ?नंदिनी ने पूछा। 

ये निशान...... उसने उसका दुपट्टा हटाया। 


पता नहीं ,जब मैं कुछ कार्य के लिए गोदाम में नीचे गयी , तभी जैसे कुछ चुभा। 

चुभा नहीं ,तुम्हें किसी ने काटा है ,किसी पिशाच ने ,ये उसके काटने के निशान हैं ,उसके इतना कहते ही ,सबका ध्यान तुषार की ओर गया। 

ये तुम क्या कह रहे हो ?कविता ने परेशान होकर पूछा। 

हाँ आंटी  ! मैं सही कह रहा हूँ ,इसे किसी शैतान ने काटा है ,हमारे गांव में भी ,पिशाच इसी तरह के निशान बना जाते हैं और खून पी जाते हैं। उसने बस इसका खून चखा है ,वो फिर से आएगा। उसके इतना कहते ही ,सभी मेहमान घबरा गए। 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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