Barsat ki wo raat [part 16 ]

अभी तक अपने पढ़ा -शैलेश भी अब तो रुहाना के विषय में जानना चाहता है ,उधर जिस लड़की 'सुनेहा 'से उसका रिश्ता तय होता है। वो उसके करीब आना चाहती है ,उसके विषय में जानना चाहती है। उधर रुहाना का प्रेमी ,शैलेश का दुश्मन बन बैठता है। वो अब समझने लगा था कि ये अब किसी इंसान से प्रेम करने लगी है। उधर कविता भी ,अपने बेटे के जीवन के लिए ,परेशान रहती है और पंडितजी से मिलती है। नंदिनी भी अब तुषार की तरफ आकर्षित हो रही है। पहाड़ियों के पीछे के जितने भी ,नवयुवा पिशाच हैं ,अब वे जानवरों के रक्त से ऊब चुके हैं और अब वो इंसानी रक्त की तलाश में, अपने स्थानों से बाहर आ गए हैं ,अब आगे -


जैसे -जैसे समय बीत रहा है ,वैसे ही वैसे अब घटनाएं बढ़ने लगीं हैं ,पिशाचों का आतंक बढ़ता जा रहा है। इनकी शक्तियां भी बढ़ती जा रही हैं।

 एक दिन ,नंदिनी ने तुषार से पूछा -क्या मुझे अपना गाँव नहीं दिखाओगे ? वैसे तो तुषार अब नंदिनी से बचता था किन्तु नंदिनी अब उसके समीप आना चाहती थी। दिल ही दिल में ,अब भी प्यार करता था किन्तु अपनी उस बेइज़्जती को अभी भुला भी नहीं पाया था।  नंदिनी का आग्रह टाल नहीं सका। एक दिन नंदिनी को अपने गांव ले जाता है। गाँव का खुला वातावरण ,ताज़ी हवा और अब तो खेतों में सरसों के पीले फूल भी अपनी छटा बिखेर रहे थे। वातावरण में अजीब ही मस्ती थी ,उनकी गाड़ी नहर के किनारे होते हुए ,गांव में पहुंची। नंदिनी को देखकर ,गाँव के बच्चे उनकी गाड़ी के पीछे हो लिए ,इस तरह उस गाड़ी से रेस लगाते हुए उन्हें मज़ा आ रहा था। तुषार अपने घर पहुँचा ,उसकी माँ मक्ख़न निकाल रही थी। तब उन दोनों को नाश्ते में ,मक्ख़न ताजा छाछ  और आम के अचार के साथ ,गर्मागर्म रोटी दी। जो नंदिनी ने जीवन में पहली बार खाई ,उसे ये नाश्ता बड़ा ही स्वादिष्ट लगा।

 तभी उसने देखा ,तुषार के पिता खेतों से आये हैं ,रात्रि में वहीं थे उनके गले में लहसून की माला थी। उसे समझ नहीं आया यहाँ के लोग ,इसे खाने की बजाय ,गले का आभूषण बनाकर घूमते हैं।उसने उनसे इसका कारण पूछा -तब उन्होंने बताया ,आजकल पिशाच बहुत अधिक घूम रहे हैं ,वे लोग इसकी महक से ही दूर भागते हैं। आग और धूप से भी ये लोग भागते हैं। नंदिनी को उनकी सभी बातें कुछ ज्यादा प्रभावित नहीं कर पाईं किन्तु फिर भी उसने उन लोगों की बातें सुनी। ये लोग शाम को ,बाहर निकलते हैं और अपना शिकार करते हैं ,ये दीवार पर भी चल सकते हैं और हवा में भी उड़ते हैं। जब नंदिनी ने उनकी दीवार वाली बात सुनी तो चौंक गयी -इसका मतलब ,मैंने उस दिन सच में ही ,किसी पिशाचिनी को देखा था ,जो हमारी दीवार पर चल रही थी। 

वो वापस जब अपने घर आई ,तब उसने लहसुन की मालाएं बनाकर ,घर के दरवाजे ,भाई की खिड़की और उसकी गाड़ी में भी ,लगा आई। माँ ने इस विषय में पूछा -तब उसने सम्पूर्ण जानकारी माँ को भी दी। इधर शैलेश भी रिश्ते को इंकार तो कर नहीं पाया किन्तु अपने घरवालों को रुहाना के विषय में भी ,नहीं बतला पाया। घरवाले  और लड़की वाले विवाह की तैयारियों में जुट गए। आज जब रुहाना ,शैलेश की खिड़की में  आई , एकदम से पीछे हट गयी। उस खिड़की से ऐसी  ही कोई महक आ रही थी जो उसे वहाँ से भगाने लिए काफ़ी थी। उसके शरीर में अजीब सी जलन होने लगी। वो वहाँ  से हट गयी। 

तभी उसका प्रेमी उसका पीछा करते हुए आया और उसकी हालत देखकर ,बोला -अब भी तू नहीं समझी ,ये इंसान किसी से प्यार नहीं कर सकते और वो भी एक पिशाचिनी से , जो सिर्फ किसी इंसान के खून पर ही जीवित रह सकती है। 

नहीं.... वो ऐसा नहीं है ,मैंने उसके मन और मष्तिष्क को पढ़ा है ,उसके मन में मेरे प्रति प्रेम ही है। 

वो चिढ़ गया और बोला -तब आज उसने अपने घर की खिड़की पर ,तुम्हारे स्वागत में ये माला क्यों टांगी ?जब उसे तुम्हारी सच्चाई का पता चलेगा ,तब भी क्या वो इसी तरह तुमसे ,प्यार करेगा ?

उसके इस जबाब पर रुहाना निरुत्तर हो गयी। उसे नहीं पता ,जब शैलेश को उसकी सच्चाई के विषय में पता चलेगा। तब वो क्या करता है ?कल उससे उसी सड़क पर मिलना होगा ,जहाँ हम पहली बार मिले थे। 

दिन यूँ ही बीतते जा रहे थे ,शैलेश परेशान था कि कल रात्रि को ,रुहाना उससे मिलने क्यों नहीं आई ?मैं कब उसके परिवार से मिलूंगा ,कब विवाह की बात करूंगा ?पता नहीं क्या हुआ ?वो क्यों नहीं आई उसके मन में रह -रहकर ,सवाल उठ रहे थे। तभी उसने अपनी गाड़ी को ब्रेक लगाया ,सामने रुहाना खड़ी थी।

 उसे देखते ही ,वो अपनी गाड़ी से उत्तर पड़ा और उसके समीप आया और बोला -भगवान का धन्यवाद !आज तुम मुझे मिल गयीं। फिर नाराज़गी जताते हुए बोला -मैं तुमसे बहुत ही नाराज़ हूँ  ,कल मिलने क्यों नहीं आईं ?उसकी बात सुनते ही ,रुहाना के आँखों में आंसू आ गए। जो उसने सोचा था ,वो सब सही था। ये आज भी ,अब भी मुझसे प्रेम करता है। 

तब शैलेश बोला -आओ !गाड़ी में बैठकर बातें करते हैं ,जैसे उसने गाड़ी का दरवाज़ा खोला ,वो एक चीख़ के साथ पीछे हट गयी। 


शैलेश ने पूछा -क्या हुआ ?

रुहाना ने उस माला की तरफ इशारा किया। ओह !ये सब उस छुटकी नंदिनी का काम है ,कहकर उसने माला उतारी और बाहर फ़ेंक दी। 

ये सभी चीज़ें ,पेड़ पर लटका रुहाना का प्रेमी देख रहा था। उसका दिल तो किया कि अभी जाकर शैलेश की गर्दन दबोच ले किन्तु फिर भी शांत रहा। क्योंकि वो जानता था -रुहाना ऐसा कुछ भी करने नहीं देगी। किन्तु एक बात , मन में आते ही वो भी मुस्कुरा दिया। 

रुहाना अब शैलेश की गाड़ी में थी ,शैलेश ने बताया -तुम तो जानती ही हो ,मेरे विवाह की तैयारियाँ चल रही हैं और मैं तुझे प्रेम करता हूँ ,क्या तुम भी मुझसे प्रेम करती हो ?मैं तुम्हारा जबाब जानना चाहता हूँ। उनकी सभी बातें रुहाना का प्रेमी ,मैक सुन रहा था। वो मन ही मन ,चाह रहा था कि रुहाना उससे इंकार कर  दे और इसका ख़ून पीकर मार डाले। 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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