पहली नजर का, प्यार हुआ।
जब नजरों ने मेरी......
उसके तन को छुआ।
एक बार नहीं ,हर बार हुआ।
जब भी उसे देखा ,प्यार बढ़ता ही गया।
मेरी उमंगें भी जवाँ होने लगीं।
साँसे भी उसे देख, मदहोश होने लगीं।
दिल चाहता !उसे सीने में छुपा लूँ।
कुछ उसकी ,कुछ मेरी भी मज़बूरी थी।
चाहने लगा उसे मैं ,ये कैसी दूरी थी ?
उसने भी नहीं छोड़ा, मेरा साथ।
इसका कोई पार न पाया ,
तन्हाइयों का ''हमसफ़र 'इसे बनाया।
पहली नजर का प्यार था।
इसने भी खूब साथ निभाया।
कुछ लोगों को इसने मुँह चिढ़ाया।
जो भी इसका राज़ समझ न पाया।
दिल पर ही नहीं ,जीवन ,खातों ,पर
इसने अपना अधिकार जतलाया।
जीवन के हर पल को ,
कभी हंसकर ,कभी रोकर दिखलाया।
पत्नी से ज्यादा ,तो इसने साथ निभाया।
इसके चक्रव्यूह से........
आजतक कोई बच नहीं पाया।
यही बन गया.........
अब मेरा हमदर्द ,'हमसाया।'
ऐसा फ़ोन है ,मैंने पाया।
