Pahli nazar ka pyaar

पहली नजर का, प्यार हुआ। 
जब नजरों ने मेरी......  
उसके तन को छुआ। 
एक बार नहीं ,हर बार हुआ। 
जब भी उसे देखा ,प्यार बढ़ता ही गया। 
मेरी उमंगें भी जवाँ होने लगीं। 
साँसे भी उसे देख, मदहोश होने लगीं। 
दिल चाहता !उसे सीने में छुपा लूँ। 
कुछ उसकी ,कुछ मेरी भी मज़बूरी थी। 
चाहने लगा उसे मैं ,ये कैसी दूरी थी ?
हाथ जो थामा ,इक बार ,

उसने भी नहीं छोड़ा, मेरा साथ। 
इसका कोई पार न पाया ,
तन्हाइयों का ''हमसफ़र 'इसे बनाया। 
पहली नजर  का प्यार था। 
इसने भी खूब साथ निभाया। 
कुछ लोगों को इसने मुँह चिढ़ाया। 
जो भी इसका राज़ समझ न पाया। 
दिल पर ही नहीं ,जीवन ,खातों ,पर 
 इसने अपना अधिकार जतलाया। 
जीवन के हर पल  को ,
कभी हंसकर ,कभी रोकर दिखलाया। 
पत्नी से ज्यादा ,तो इसने साथ निभाया। 
इसके चक्रव्यूह से........ 
आजतक कोई बच नहीं पाया।
यही बन गया......... 
अब मेरा हमदर्द ,'हमसाया।'
ऐसा फ़ोन है ,मैंने पाया। 
laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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