Ek khas ehsas

''एक खास एहसास '' मुझे आज भी स्मरण हो आता है- जब तुम ,मेरे अंदर बीज़ रूप में पल्ल्वित होते रहे। मैं तुम्हें ,अपने अंदर सींचती रही ,तुम्हें अनदेखे ही ,अपना प्रेम लुटाती रही। तुमसे बातें करती ,तुम्हारे आने की चाह में ,मेरा दर्द ,मेरी परेशानी बाधक न थी क्योंकि तुम मेरे लिए ख़ास जो थे। तुमने मुझे भी ,मेरे ख़ास होने का एहसास कराया। 

मेरे अंदर तुम पल्ल्वित होते ,अपना रूप और आकार ले रहे थे ,तुम्हारे आने की प्रसन्नता, मेरी हर परेशानी को छोटा महसूस कराती। तुम प्रतिदिन मेरे बढ़ते शरीर के संग बढ़ रहे थे। मैं सपनों में ,तुम्हारे उस स्पर्श का सोच रोमांचित हो जाती। अब मैं पूर्णता को जो प्राप्त करने वाली थी ,मेरा अल्हड़पन ,तुम्हारे संग ही कहीं छिपा तुम्हारी प्रतीक्षा में जो था। 
तुम्हारा आगमन ही मुझे ज़िम्मेदार बना रहा था ,तुम्हारी नाजुक़ ,कोमल ,नन्हीं अँगुलियों का स्पर्श !तुम्हारा बंद नेत्रों से ही ,मुझे महसूस करना। मेरे ह्रदय से उबल आये ,मेरे ममत्व का तुम पान करते ,वो सब मेरे लिए ,''एक खास एहसास'' ही तो था।  
laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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