Dhokha [part 50]

आज दीपक ,प्रतीक को सम्पूर्ण सच्चाई से अवगत करा देता है ,कि वो पहले से ही नंदिनी से प्यार करता था। परिस्थिति वश अब नंदिनी के क़रीब  आ गया ,तो अब उसको नहीं छोड़ेगा। यदि तुमने, अब हमारे  बीच आने का प्रयास किया तो मैं दोस्ती को भूल जाऊंगा। 

प्रतीक समझ गया था ,अब ये मेरी स्थिति का लाभ उठा रहा है। इसकी सच्चाई नंदिनी को भी मालूम नहीं है अभी मेरे साथ न ही मेरा परिवार है ,न ही नंदिनी है। सच ही तो कह रहा है ,यदि इसने मुझे मार भी दिया तो सच्चाई किसी को भी पता नहीं चल पायेगी। शायद अब नंदिनी मेरी किस्मत में है ,ही नहीं। होती तो, हमारे साथ ये दुर्घटना ही नहीं होती। तब उसने दीपक से कहा -लगता है ,नंदिनी ने ,शायद मुझे देख लिया है। 


तभी तो वो परेशान है ,तभी उसने मुझे फोन किया और मैं यहाँ चला आया। 

किंतु उसे इस बात का विश्वास तो दिलाना ही होगा, कि मैं मर चुका हूं। 

उसे विश्वास हो गया था, सिर्फ तुमने, अब उसे भ्रमित किया है। तुम कब से उसका पीछा कर रहे हो ? 

मैंने उसका कोई पीछा नहीं किया ,किंतु एक बार उसे देखने की चाहत को मैं रोक न सका इसीलिए उन गलियों में टहलते हुए निकल पड़ा ,जहाँ पहले कभी हम मिला करते थे। 

 क्या तुम्हें वहां किसी ने नहीं पहचाना ?

नहीं, मेरे चेहरे पर मास्क था।

अब मास्क [मुखौटा ] ही लगाए रखना , वरना मैं तेरे बेटे को भी, तुझसे दूर कर दूंगा। अभी तो मैंने उसे समझा बुझाकर शांत किया हुआ है।  किंतु वह चाहती है ,कि उसका बेटा भी उसे मिले वह तुम्हारी आखिरी निशानी के तौर पर उसे ,अपने पास रखना चाहती है। इसमें मुझे कोई दिलचस्पी नहीं है। 

एक बात बताऊं ,तुम उससे' धोखे 'से विवाह कर रहे हो जबकि तुम जानते हो ,मैं अभी जिन्दा हूँ।  यदि कभी भी उसे लगा कि तुमने उसे 'धोखा 'दिया है ,तो वह तुम्हें कभी भी माफ नहीं करेगी। 

जबकि जब देखी जाएगी, अब तो वह मुझसे प्यार करने लगी है। तुम उसकी नजरों में ही नहीं दुनिया की नजरों में भी मर चुके हो। तुम अभी भी मेरे यार हो ,मेरे दोस्त ! मेरा कहा मानो ! तुम यहाँ से कहीं दूर चले जाओ !तुम्हारे लिए यही बेहतर होगा। अब तक सब सम्भला हुआ है ,यदि तुम सामने आ गए तो ये बात भी कोई सहन नहीं कर पायेगा, विशेष रूप से तुम्हारा अपना परिवार....

यह प्यार नहीं, उसकी मजबूरी है, उसके माता-पिता उसका विवाह करना चाहते हैं , अपने बच्चे के जीवन यापन के लिए , उसने तुम्हें अपनाना उचित समझा होगा।  

जैसा भी है, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता, वह मेरी पत्नी बनकर तो रहेगी। धीरे -धीरे पूरी तरह मेरी बनकर  रहेगी  उसके लिए मैंने अपनी पत्नी को भी तलाक दे दिया।

लानत है तुम पर.... तुमने मुझे ही नहीं ,उसके लिए अपनी पत्नी की भी ज़िंदगी बर्बाद कर दी। यदि तुम्हें उससे इतना ही प्रेम था तो तुमने उससे विवाह क्यों किया ? उसकी प्रतीक्षा करते। 

उस समय मैंने, उसे ,तुम्हारे लिए छोड़ दिया था किन्तु अब तो तुम इस दुनिया में हो ही नहीं ,अब अपने इस दोस्त के लिए तुम्हारे त्याग का समय आ गया है। कहते हुए जोर -जोर से हंसने लगा।  तुम भी ,अब उसे मेरे लिए उसको छोड़ दो ! अब जबकि उसे लगता है ,कि तुम हो। उसे ,तुम्हारी छाया का एहसास है, उसकी उस गलतफहमी को अब तुम ही दूर कर दो !

क्या मतलब ? मैं कुछ समझा नहीं। 

उसने, तुम्हें देख लिया है, और अब उसे ऐसा लगता है कि तुम हो, शायद तुम्हारी आत्मा भटक रही है। जबकि उसे मालूम है कि तुम अब इस संसार में नहीं रहे।  उसे अब तुम्हारे अस्तित्व का एहसास हो रहा है। तुम एक दिन उसके सामने जाना होगा। 

उसकी बात सुनकर प्रतीक मुस्कुराया और बोला -यदि उसके सामने गया तो तुम,उससे  अपना विवाह भूल जाओ !

ज्यादा खुश होने की जरूरत नहीं है, तुम्हें उसके सामने जाना है और ऐसा दिखलाना है कि जैसे तुम उसे जानते ही नहीं, तुम उसके 'हमशक्ल' हो। यहीं पर बात खत्म हो जाएगी वरना उसका भ्रम कभी टूटेगा नहीं। 

  तुम्हें क्या लगता है ? क्या मैं ,तुम्हारी बात मानूंगा ?

 माननी तो पड़ेगी, नहीं मानोगे तो मैं तुम्हारा बेटा ! तुम्हारे घर से उठा लूंगा। तमाम उम्र  उसकी एक झलक को तरस जाओगे, हँसते हुए ,दीपक उसके समीप आकर बैठ गया और बोला -तभी तो कह रहा हूँ ,मेरे भाई !हम अभी भी अच्छे दोस्त हैं। मुझे कुछ भी ऐसा करने के लिए मज़बूर मत करना, जिसके लिए तुम्हें बाद में पछताना पड़े। 

पछता तो अभी भी रहा हूँ ,कोठी में बिना आज्ञा के कोई अंदर जा ही नहीं सकता, अब तो और कठोर नियम होंगे ,फिर मैं ही क्यों ना चला जाऊं ?

नंदिनी तो जा सकती है, उसे भड़का दूँगा , उसे लगेगा, मेरा पति मेरे साथ खड़ा है और तुम्हारे घर वालों पर केस करने से कोई नहीं रोक सकेगा। वो उस समय मेरे साथ खड़ी नजर आएगी  इसलिए जो कहता हूँ ,चुपचाप मेरा कहना मानो ! नंदिनी के सामने जाना, किसी अनजान इंसान की तरह बनकर.... नहीं, तुम रहने दो !उसे क्या मालूम है ?तुम कभी मेरे दोस्त थे ,किन्तु अब मेरे दोस्त बनकर मेरे साथ ही चलना। मैं ही उसे तुमसे मिलवाऊंगा, वह फिर तुम्हारी परछाई के पीछे नहीं दौड़ेगी।

 मैं, उसे अच्छे से जानता हूं , उस समय तो शायद समझ भी जाए किंतु बाद में वह फिर मुझसे मिलने का प्रयास करेगी।

 ऐसा दिन कभी भी नहीं आएगा, मैं उसे इतना प्यार दूंगा ,वह तुम्हें भूल  जाएगी।

ऐसा कभी नहीं होगा। मुझे विश्वास है , मरने के बाद भी मैं ,उसकी यादों में रहूंगा। 

साथ में तो वो , मेरे ही रहेगी। ख़ैर !अब बहुत बातें हो गई है ,अब तुम आराम से सो जाओ ! तुम्हें  ,उससे मिलवाने का कोई प्रबंध करता हूं, कह कर दीपक बाहर आ गया। 

उसने प्रतीक से कह तो दिया था, ''वह नंदिनी को उससे मिलवाएगा किंतु अंदर ही अंदर उसे भय भी सता रहा था. क्या प्रतीक को उसका 'हमशक्ल 'समझकर  विश्वास कर लेगी या नहीं। 

मन ही मन प्रतीक मुस्कुरा रहा था,' यहीं तो हमारे प्यार की परीक्षा होगी देखते हैं , मेरा प्यार जीतेगा या फिर दीपक का ''धोखा ''



laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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