Kiski dulhan [part 79]

 मोहिनी ,को किसी ने एक रिकॉडिंग भेजी ,जब मोहिनी ने उसे सुना -''अगर तुम यह सुन रही हो, तो शायद तुम उस कमरे तक पहुँच चुकी हो, जहाँ तुम्हारा बचपन बीता था।”अपनी माँ की आवाज सुनकर मोहिनी  की आँखें भर आईं। बोली - यह मृणाल की आवाज़ थी।

“मैं नहीं जानती, कि तुम, मुझे माँ कह पाओगी या नहीं। मैं यह भी नहीं जानती कि तुम्हारे मन में मेरे लिए कितना गुस्सा है ?लेकिन एक बात तुम जान लो—! मैंने, तुम्हें कभी अपनी इच्छा से नहीं छोड़ा।”


रिकॉर्डिंग में कुछ देर खामोशी रही, फिर मृणाल ने आगे कहा—“तुम्हारे जन्म के समय तीन बच्चों की पहचान को लेकर एक बड़ा झूठ रचा गया था। मुझे बताया गया ,'कि तुम्हारी सुरक्षा के लिए तुम्हें कुछ समय के लिए दूर रखना होगा।' मैंने उस समय विश्वास कर लिया। मुझे नहीं पता था ,कि तुम्हारे साथ-साथ एक दूसरे बच्चे की पहचान भी बदल दी जाएगी।”

यह सब सुनकर मोहिनी भावुक हो रही थी ,तब उसने भानु का हाथ पकड़ लिया।रिकॉर्डिंग जारी रही।

“जिस व्यक्ति ने यह सब किया, वह हमारे ही परिवार का सदस्य था लेकिन मैं उसका नाम नहीं ले सकती थी, क्योंकि मेरे पास उसके विरुद्ध कोई प्रमाण नहीं था। मैंने एक गलती की—मैंने सोचा था ,कि चुप रहकर मैं तुम्हें बचा लूँगी लेकिन मेरी चुप्पी ने तुम्हें, मुझसे दूर कर दिया।”

मोहिनी ने काँपती आवाज़ में कहा, “माँ…”मृणाल की आवाज़ फिर सुनाई दी।

“अगर तुम तीसरे बच्चे को खोज रही हो, तो एक बात याद रखना। जिस नाम से उसे, दुनिया जानती है, वह उसका असली नाम नहीं है लेकिन उसका असली नाम जानना ही काफी नहीं होगा। तुम्हें यह भी जानना होगा कि उसे नया नाम किसने दिया, और किसके आदेश पर दिया गया ?”

रिकॉर्डिंग में अचानक आवाज़ टूटने लगी “और आर्या… अगर कोई तुम्हें बताए कि राजवीर ने तुम्हें धोखा दिया था, तो तुरंत विश्वास मत करना। राजवीर ने जो किया, वह शायद तुम्हें बचाने के लिए था लेकिन उसने तुम्हें किससे बचाया—यह बात, मैं भी पूरी तरह नहीं जानती।”इसके बाद रिकॉर्डिंग बंद हो गई। कमरे में कुछ क्षणों के लिए सन्नाटा छा गया।

मोहिनी की आँखों से आँसू बह रहे थे। इतने वर्षों बाद उसे अपनी माँ की आवाज़ सुनाई दी थी। उसमें पछतावा था, डर था और एक ऐसी बेबसी थी, जिसे मोहिनी अब पहले से बेहतर समझ सकती थी।

भानु ने ,उससे धीरे से पूछा, “क्या तुम ठीक हो?”

मोहिनी ने अपने आँसू पोंछे और बोली -“मैं ठीक हो जाऊँगी लेकिन अब एक बात स्पष्ट है—राजवीर को केवल इसलिए दोषी नहीं माना जा सकता कि उसका नाम बार-बार सामने आ रहा है।”

विक्रम ने गंभीरता से कहा, “और मृणाल के संदेश से यह भी पता चलता है, कि तीसरे बच्चे की पहचान बदलने का फैसला परिवार के भीतर से आया था।”

भानु ने कहा, “तो अब हमें उस व्यक्ति को ढूँढ़ना होगा, जिसने उस बच्चे को नया नाम दिया।”

मोहिनी ने रिकॉर्डिंग की डिवाइस उठाई बोली -“नहीं, पहले हमें यह पता लगाना होगा कि तीसरा बच्चा अब कहाँ है ? अगर वह जीवित है, तो वह इस कहानी का सबसे महत्वपूर्ण गवाह है।”

शाम ढलने लगी थी। हवेली के पुराने कमरे में मोहिनी , भानु, रूद्र और विक्रम फिर से एकत्र हुए।मेज़ पर सभी दस्तावेज़ फैले थे—अस्पताल का रिकॉर्ड, रेलवे स्टेशन का रजिस्टर, तीन बच्चों की तस्वीर, M.V. के अक्षरों वाली डायरी और मृणाल की रिकॉर्डिंग।

भानु ने कागज़ों को तारीखों  के अनुसार सजाया ,और बोला -“हमारे पास अब चार महत्वपूर्ण बातें हैं,”  “पहली—18 अगस्त 2001 को तीन बच्चों के रिकॉर्ड बदले गए। दूसरी—उसी दिन सुबह सात बजकर चालीस मिनट पर किसी को स्टेशन से बाहर ले जाया गया। तीसरी—तीसरे बच्चे को निर्धारित व्यक्ति के हवाले नहीं किया गया और चौथी—मृणाल के अनुसार, परिवार के भीतर किसी ने बच्चे का नाम बदलने का आदेश दिया था।”

रूद्र ने जोड़ा, और रत्न प्रताप उस घटना के बारे में जानते हैं। शायद उससे अधिक, जितना उन्होंने बताया है।”

मोहिनी ने तस्वीर उठाई “लेकिन हमें अभी तक यह नहीं पता कि तीनों बच्चे कौन थे ? हम केवल इतना जानते हैं कि उनमें से एक मैं थी, दूसरे का संबंध भानु या हमारे परिवार से हो सकता है, और तीसरे बच्चे की पहचान बदल दी गई।”

विक्रम ने कहा - “हमें उन पुराने रिकॉर्डों की मूल प्रतियाँ चाहिए। अगर नामों पर स्याही फेरने से पहले की कोई प्रति मिल जाए, तो शायद तीसरे बच्चे की पहचान सामने आ जाए।”

तभी मोहिनी को तस्वीर के किनारे पर एक छोटी-सी लिखावट दिखाई दी। उसने आवर्धक शीशा उठाकर उसे ध्यान से देखा।तस्वीर के नीचे बहुत हल्के अक्षरों में लिखा था—“तीसरा नाम परिवार के रजिस्टर में नहीं मिलेगा।”मोहिनी ने,वो वाक्य सभी को दिखाया।

भानु ने भौंहें सिकोड़ लीं।“इसका मतलब है ,कि उसका नाम किसी दूसरे रिकॉर्ड में दर्ज किया गया था।”

“या उसका नाम कभी आधिकारिक रूप से दर्ज ही नहीं किया गया,” रूद्र  ने कहा।

मोहिनी ने,उस तस्वीर से नजरें हटाकर  सिर उठाया “अगर किसी बच्चे का नाम आधिकारिक रिकॉर्ड में था ही नहीं, तो उसे बाद में किस नाम से पहचाना गया? किस स्कूल में दाखिला मिला? किस परिवार ने उसे अपनाया? कोई न कोई दस्तावेज़ तो होगा।”

विक्रम ने धीरे से कहा, “जब तक वह बच्चा किसी दूसरे नाम से जीवित रहा, तब तक किसी ने उसके लिए नया जीवन तैयार किया होगा।”

मोहिनी ने मेज़ पर रखे लाल फीते को देखा।“तो फिर हमें उन परिवारों को खोजना होगा, जिन्होंने 2001 के बाद किसी ऐसे बच्चे को अपनाया था, जिसकी जन्म-तिथि या पहचान के रिकॉर्ड बाद में बदले गए हों ।”

भानु ने ,उसकी ओर देखकर कहा -“यह इतना आसान नहीं होगा।”

“मुझे आसान रास्ता नहीं चाहिए,”मोहिनी ने कहा - “मुझे सच चाहिए।”उसी समय मुख्य दरवाज़े पर दस्तक हुई।

एक नौकर ने आकर उन्हें बताया ,कि बाहर एक महिला खड़ी है। वह किसी से मिलना नहीं चाहती, केवल मोहिनी को एक वस्तु देकर जाना चाहती है।

मोहिनी बाहर पहुँची ,दरवाज़े पर लगभग तीस वर्ष की एक महिला खड़ी थी। उसने साधारण से कपड़े पहन रखे थे और चेहरे का आधा हिस्सा दुपट्टे से ढका था। उसके हाथ में एक छोटा डिब्बा था।“आप ही मोहिनी हैं?” महिला ने पूछा।

“हाँ, आप कौन हैं?”

महिला ने,अपने हाथ का डिब्बा आगे बढ़ाया।“यह आपके लिए है, इसे खोलने से पहले उस तस्वीर को देखिए, जो आपको हवेली के कमरे में मिली थी।”मोहिनी  ने उसे गौर से देखा और अचानक पूछ बैठी -“क्या ,आप तीसरे बच्चे को जानती हैं?”

महिला की आँखों में एक पल के लिए घबराहट उभरी ,अपने को संभालते हुए बोली -“मैं इतना जानती हूँ कि वह बच्चा जीवित रहा, लेकिन जिस नाम से आप उसे खोज रही हैं, उसका यह  नाम अब इस दुनिया में नहीं है।”

मोहिनी का दिल तेज़ी से धड़कने लगा ,अपनी धड़कनों पर नियंत्रण करते हुए पूछा “तो उसका असली नाम क्या है?”

महिला ने पीछे हटते हुए कहा, “यह नाम आपको उस व्यक्ति से सुनना होगा, जिसने उसे आखिरी बार उसके असली नाम से पुकारा था।”

“वह व्यक्ति कौन है? मोहिनी ने प्रश्न पूछने में तेजी दिखाई। 

महिला ने उत्तर देने के बजाय, डिब्बा मोहिनी  के हाथ में रख दिया।

“जब आप इसे खोलेंगी, तो आपको समझ आ जाएगा, कि अगला कदम कहाँ उठाना है ?”वह पलटकर तेजी से चली गई।


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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