Kiski dulhan [part 59]

रात के दस बज चुके थे, हवेली के अधिकांश कमरों की बत्तियाँ बुझ चुकी थीं, लेकिन मोहिनी  के कमरे में अब भी रोशनी थी। मेज पर रखा फोन बार-बार उसकी नजरों के सामने आ रहा था।“आज रात दो बजे अपने पति से दूर रहना वरना वह भी वही याद कर लेगा, जिसे तुम दोनों भूल चुके हो।”

मोहिनी  ने वो संदेश फिर से पढ़ा ,बार -बार पढ़ा ,उसके भीतर एक अजीब-सी बेचैनी थी। वह जानना चाहती थी कि इस संदेश के पीछे कौन हो सकता है ?लेकिन उससे भी बड़ा सवाल ये था—आखिर ऐसी कौन-सी याद थी, जिसे वह और भानु दोनों भूल चुके हैं ?


भानु खिड़की के पास खड़ा बाहर की तरफ देख रहा था ,उस अँधेरे में भी न जाने क्या ढूँढ रहा था ?मोहिनी ने पूछा—“तुम्हें क्या लगता है, ये संदेश किसने भेजा होगा ?”

भानु  ने पलटकर उसकी तरफ देखा ,और बोला -“जिसे हमारी योजना का पता है।”

लेकिन हमारी योजना तो हमने आज ही बनाई है।

”हमने आज रात की योजना बनाई है,किन्तु तुम्हारे गायब होने की बात तो पहले से ही किसी को पता है।”

मोहिनी  ने फोन उठाया और ध्यान से उस नंबर को देखा और तभी उसके दिमाग में विचार कौंधा ,उसने भानु से पूछा -“क्या हम इस नंबर का पता नहीं लगा सकते? पता तो चले ये संदेश किसने भेजा होगा ?

“कोशिश करके देख लेते हैं ,भानु ने फोन अपने हाथ में लिया और संदेश का स्क्रीनशॉट बना लिया ,फिर उसने फोन वापस रख दिया, तब बोला  -लेकिन एक बात तो साफ है।”

“क्या?”

“कोई तो है ,जो नहीं चाहता कि हम आज रात साथ रहें।”

मोहिनी  ने उसकी तरफ देखा और बोली - उसकी ये तमन्ना पूरी नहीं होने देंगे ,अब तो हम साथ ही रहेंगे।”भानु के चेहरे पर हल्की मुस्कान आई ,वो भी यही सोच रहा था।”

रात्रि के 11:30 बजे — हवेली का पुराना गलियारा - रूद्र अपने कमरे में बैठा, पुराने कागजों की जाँच कर रहा था। उसके सामने राजवीर का पुराना बैग खुला पड़ा था। बैग में मिली घड़ी, फोटो और कागज उसने अलग-अलग रखे हुए थे। उसकी नजर बार-बार घड़ी पर जा रही थी ,घड़ी 7:40 AM.पर ही अटकी हुई थी ,ये वो ही समय है, जब तीसरे बच्चे को अलग करने का आदेश दिए जाने की बात सामने आई थी। तब रूद्र ने घड़ी को उलटकर देखा ,पीछे एक छोटा-सा ढक्कन था।उसने सोचा ,हो सकता है ,इसमें कोई सुराग़ मिल जाये ,उसने नाखून से उसे खोलने की कोशिश की, किन्तु ढक्कन नहीं खुला।

तब उसने मेज से एक पतली धातु की पिन उठाई और उसे सावधानी से किनारे में डाला तो ढक्कन खुल गया। अंदर एक छोटी-सी मुड़ी हुई पर्ची थी ,रूद्र ने उसे बाहर निकाला।कागज बहुत पुराना था।उस पर मुश्किल से पढ़े जाने वाले शब्द लिखे थे— तीसरा बच्चा अलग नहीं किया गया था। उसे किसी और नाम से वापस लाया गया। रूद्र के लिए यह चौंका देने वाली ख़बर थी ,अचानक उसके चेहरे के भाव बदल गये उसने पर्ची को दोबारा पढ़ा ,फिर घड़ी को मेज पर रख दिया। उसने खुद से ही सवाल किया -आख़िर उस बच्चे को किस नाम से वापस लाया गया होगा ?

तभी दरवाजे पर दस्तक हुई। भानु ने पर्ची तुरंत फाइल के भीतर रख दी ,और अपने को संयत करते हुए पूछा -“कौन?”

“मैं हूँ ,रणवीर की आवाज थी।रूद्र ने दरवाजा खोल दिया।

अंदर आते हुए रणवीर ने पूछा -“आप अभी तक जाग रहे हैं?”

“तुम भी तो जाग रहे हो ,कहकर रूद्र मुस्कुरा दिया। 

रणवीर ने मेज पर फैले कागजों को देखा -“कुछ मिला?”

रूद्र ने एक पल सोचा ,फिर कहा—“शायद ”

“क्या?”

रूद्र  ने मेज पर रखी घड़ी उसकी तरफ बढ़ाई और बोला -“इसके अंदर एक पर्ची थी ,कहते हुए फ़ाइल से वो पर्ची निकालकर उसके सामने रख दी। 

रणवीर  ने पर्ची पढ़ी ,उसकी आँखें सिकुड़ गईं ,सोचने लगा 'तीसरा बच्चा वापस लाया गया?”किसी और नाम से। रणवीर ने कुछ देर सोचा ,फिर अचानक बोला—“तो क्या वह बच्चा किसी दूसरे परिवार में बड़ा हुआ होगा ?”

रूद्र ने सिर हिलाया -“संभव है।”

“और अगर ऐसा ही है, तो…रूद्र की आवाज धीमी हो गई ,क्या वह आज इसी हवेली में हो सकता है ?”

रूद्र  ने उसकी तरफ देखा ,और बोला -यही तो पता करना है।”

रणवीर ने एक पल रुककर पूछा—आपको किसी पर शक है?”

रूद्र ने तुरंत जवाब नहीं दिया किन्तु वह सोच रहा था ,उसने खिड़की से बाहर देखा और फिर धीरे से कहा—“शक है।”

“किस पर ?”

रूद्र ने उसकी तरफ देखा ,अभी जल्दबाजी में नाम लेना उचित नहीं होगा।”

रणवीर ने सिर हिलाया -“ठीक है, लेकिन एक बात याद रखिएगा ।”

“क्या?”

“अगर तीसरा बच्चा सच में इसी हवेली में है, तो वह भी किसी न किसी डर के साथ जी रहा होगा।”

रूद्र  ने पहली बार रणवीर को ध्यान से देखा ,“तुम्हें ऐसा क्यों लगता है?”

रणवीर ने कहा— क्योंकि कोई इंसान अपनी पहचान छिपाकर तभी जीता है, जब उसे लगता है कि सच सामने आने पर उसकी जिंदगी बदल जाएगी।”

रूद्र चुप हो गया ,रणवीर दरवाजे की तरफ बढ़ा ,फिर रुककर बोला—और हाँ, अगर आपको कोई ऐसा नाम मिले जो इस परिवार में नया हो, तो मुझे जरूर बताइएगा।”

रूद्र ने पूछा—“क्यों?”

रणवीर ने हल्की मुस्कान के साथ कहा— क्योंकि मैं इस हवेली के लोगों को आपसे ज्यादा जानता हूँ। ''कहकर वो चला गया।

रूद्र ने दरवाजा बंद किया ,फिर पर्ची को दोबारा निकाला ,उसकी नजर आखिरी शब्द पर टिक गई—“वापस लाया गया।”

रात 12:15 बजे — मोहिनी अपने कमरे में बिस्तर पर बैठी थी ,भानु ने कमरे की खिड़कियाँ बंद कर दी थीं।दरवाजे की कुंडी जाँच कर ली थी और कमरे में रखी हर चीज को ध्यान से देखा था।

मोहिनी ने उसे हर चीज की इस तरह जाँच करते हुए देखकर पूछा—“तुम क्या ढूँढ़ रहे हो? कोई ऐसा रास्ता जिससे कोई अंदर आ सके।”

“तुम्हें क्या लगता है ?कोई मुझे कमरे से बाहर ले जाता है?”

भानु ने कहा—मुझे लगता है ,कि हमें हर संभावना की जाँच करनी चाहिए।”

मोहिनी ने धीमे से कहा— और अगर मैं खुद बाहर जाती हूँ,तो....?”

भानु ने उसकी तरफ देखा ,तो हम पता करेंगे कि ऐसा क्यों और कैसे हो रहा है ?”

लेकिन मुझे तो कुछ याद नहीं रहता।”

इस बार शायद कुछ याद रह जाए।”

मोहिनी ने सिर झुका लिया ,कुछ पल बाद उसने पूछा—भानु ! क्या तुम्हें कभी ऐसा लगा है ?कि हम पहले भी पति-पत्नी की तरह साथ रहे हैं ?”

उसके प्रश्न पर भानु चौंका,“क्या मतलब?”

“मुझे नहीं पता,मोहिनी ने अपने हाथों को देखा और बोली -''कभी-कभी तुम्हारे पास बैठकर ऐसा लगता है कि मैं तुम्हें बहुत पहले से जानती हूँ।”

भानु ने धीरे से कहा—“मुझे भी।”

मोहिनी ने उसकी तरफ देखा ,तो फिर हमारी शादी के समय तुम मुझसे इतने नाराज क्यों थे?”

भानु का चेहरा गंभीर हो गया ,क्योंकि मुझे लगता था कि तुमने, मुझे धोखा दिया है।”

“और अब?”

अब मुझे लगता है ,कि शायद हम दोनों को किसी ने गलत बातें बताई थीं।”

मोहिनी की आँखें नम हो गईं ,क्या तुम्हें लगता है ,कि हमारी शादी भी किसी योजना का हिस्सा थी?”

भानु ने कुछ देर सोचा ,मुझे नहीं पता ,पूरे विश्वास के साथ कह नहीं सकता। फिर उसने कहा—लेकिन मैं ये जरूर जानना चाहता हूँ, कि तुम्हें ,मुझसे अलग करने की कोशिश किसने की थी ?”

आखिर किस बच्चे को वापस लाया गया होगा ? उसका नाम बदलकर क्या रखा गया होगा ? अब वो कहाँ हैं ?क्या आज की रात भानु मोहिनी के गायब होने का रहस्य जान पायेगा ,सभी प्रश्नों के जबाब पाने के लिए चलिए आगे बढ़ते हैं। 


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

Post a Comment (0)
Previous Post Next Post