Zeenat [part 69]

ज़ीनत की बातें सुनकर, इंस्पेक्टर कविता बोली - हम इस बात की जांच करेंगे। कहते हुए ,सहानुभूति से बोली -अभी तुम थोड़ा आराम करो ! हम बाद में आते हैं।

 मनोरमा बोली- मैडम ! आपने उससे पूछना बंद क्यों कर दिया ? अभी तक तो ठीक है , कहीं यह अपनी याददाश्त भूल गई तो, क्या होगा ?

 इसीलिए तो उसे आराम करने के लिए कहा है। इसका दिमाग थोड़ा शांत हो जाएगा। क्या तुम्हें लगता है ? वो याददाश्त भूल जाती है या याददाश्त भूलने का अभिनय कर रही है। 


अब मैं क्या कहूँ ? मैडम जी ! अभी तक तो उसने सारी बातें लगातार बताइ हैं । अभी तक तो लगता था ,यह हमारे सामने याददाश्त भूलने का अभिनय कर रही है। किन्तु डॉक्टर ने कहा है तो, मानना  ही पड़ेगा क्या बताएं ? वैसे आज तक ऐसे-ऐसे  शातिर लोगों से पाला पड़ा है ,यक़ीन करना मुश्क़िल है।

 वैसे ये भी ज्यादा देर तक यह भूल नहीं पाती है ,डॉक्टर ने भी कहा था - 'शार्ट टर्म मेमोरीज 'की स्थिति हो जाती है। इसे बातें याद आ जाती है और कई बार तो बहुत पुरानी बातें भी याद कर लेती है। इंस्पेक्टर कविता को, ज़ीनत से बात करके ऐसा ही लगा। 

तभी उनके लिए एक फोन आता है,यह फ़ोन इंस्पेक्टर कविता को डी.एस.पी. सुनील वर्मा ने किया था - हैलो ! सर 

 इंस्पेक्टर कविता ,यह क्या हो रहा है ? क्या अभी तक उस लड़की से  कोई विशेष जानकारी नहीं मिली है। 

सर ! वह लड़की बीमार है, अभी उसी से पूछताछ चल रही है। 

बीमार है, या बिमारी का नाटक कर रही है। उसे, ऐसी क्या बीमारी है ?

अपनी 'योेन इच्छा' की पूर्ति के लिए वो लोगों को ,अपनी ओर आकर्षित करती थी । ये सभी काम वो अपने  प्रेमी' आसिफ़' के कहने पर करती थी। देखने से ये भोली -मासूम नजर आती थी और ये स्वयं ही नहीं जानती थी ,इसका दुरूपयोग हो रहा है। वो ,ये सब करना तो नहीं चाहती थी किन्तु इसका प्रेमी ,वो सब ज़बरन और इसे बहकाकर ,इससे ये काम करवाता था।

ये पढ़ी -लिखी नहीं है ,इसके परिवार में इसके बहन और जीजा हैं। इसके कारण उनमें भी झगड़ा हुआ क्योंकि इसके जीजा की नज़र इस पर थी। बहन ने ही अपने घर से आसिफ़ के साथ इसे भगा दिया था।  ये लोग ऐसे ही काम करते ,जब पकड़े जाने का भय  होता, तो ये लोग, कुछ दिन शांत रहते या  दूसरी जगहों पर भाग जाते। 

ज़ीनत न जाने कैसे और किससे' एच, आई, वी ',से संक्रमित हो गयी और जब इस बीमारी का इसके प्रेमी को पता चला तो उसने एक ही झटके में इससे सारे संबंध तोड़ दिए और इसे अपने समूह से भगा दिया।

इसने अपने समूह के बारे में कुछ बताया। 

नहीं ,सर ! इसको,समूह की कोई भी जानकारी नहीं है। 

ऐसा कैसे हो सकता है ? इतनी शातिर लड़की को कुछ भी मालूम नहीं है। 

नहीं, सर ! वो मुझे किसी भी तरह से शातिर नहीं लग रही है उल्टे लोगों ने उसकी भलमनसाई  का लाभ उठाया है। 

ये काम और चोरी इन लोगों ने किन -किन शहरों में की ?

पूछताछ चल रही है ,इसी बीच ,इसकी तबियत खराब हो गयी थी ,इसीलिए दो घंटों के लिए हमें अपने कार्य को रोकना पड़ा। इससे आगे इसने बताया ,जब इसके प्रेमी ने इसे भगा दिया, तब ये जैसे -तैसे इस शहर में आ गयी।  किन्तु यहां भी आकर उसने धोखा ही खाया। उसे तो पता ही नहीं था, कि यहां आने से पहले वह कितनी बड़ी बीमारी अपने साथ लिए हुए हैं। हाँ ,इतना तो जानती है ,इसे ये जो भी  बिमारी है ,वो छूत की है। 

यहां आकर उसने देखा- कि इसके घर पर तो उसकी बहन ने कब्जा किया हुआ है यहां भी उसे धोखा ही मिला।  उसकी बहन के दोनों बच्चे, उसके घर में रहते हैं। जब वह अपने घर गई तो उसे बहुत मारा- पीटा गया। बड़ी मुश्किल से वह अपने घर में अंदर जा पाई।

मुझे तो उसकी बातों पर यक़ीन नहीं हो रहा है ,देखिये ! इंस्पेक्टर कविता !यहाँ इमोशनल होने से काम नहीं  चलता है।आप उसके ख़िलाफ सख़्त से सख़्त कार्यवाही कीजिये !और पता लगाइये ! उसके गैंग में कितने और लोग शामिल रहे हैं ? सुना है ,वो झूठी कहानियां गढ़ने में माहिर है।  

 अब आप ही बताइए ! इतना बड़ा धोखा खाकर आदमी की क्या हालत होगी ? ऐसी हालत में भी लोग उसकी परेशानी का लाभ उठाने से बाज़  नहीं आते। अब धोखा खाये, इसके मन में 'गुस्सा' और 'बदले की भावना' होना तो स्वाभाविक है। इसके प्रेमी के माध्यम से ,इसे वह बीमारी हो गई है , इसी बदले की भावना से , वह और लोगों में भी वह बीमारी फैलाने के लिए , इधर-उधर घूमती है और लोगों से संपर्क बनाती है किसी को भी मना नहीं करती। जो चरित्रवान हैं ,उन्हें ,इससे क्या परेशानी हो सकती है ? परेशानी तो उनको होगी जो अपने घर की मुर्गी को छोडकर इधर -उधर मुँह मारते रहते हैं। 

यह तुम क्या कह रही हो ? क्या वो गलत नहीं कर रही है ,ये भी तो अपराध है,  डीएसपी सुनील वर्मा नाराज़ होते हुए बोले - विश्वसनीय सूत्रों का मानना तो, यह भी है , कि यह दुश्मनों की कोई चाल है। अभी कोई विस्तृत जानकारी  नहीं मिली है , हो सकता है, वह कोई 'घुसपैठिया' हो।इसे भेजा गया हो। 

सर !अभी उससे बात करके इतनी ही जानकारी मिली है। 

 सुनने में तो आया है, जो लोग, उसके संपर्क में आए हैं, अपनी जांच करा रहे हैं। कोई सामने तो नहीं आएगा लेकिन गोपनीय तरीके से जांच  करा रहे हैं। तुम शीघ्र से शीघ्र इसकी तह तक जाओ !  

जब अख़बार में भूमि ने यह ख़बर पढ़ी , जिसे पढ़कर, भूमि का दिमाग हिल गया, क्या वह गरीब सी दिखने वाली, मरियल सी लड़की, कोई घुसपैठियों हो सकती है। क्या उसके मन में इतनी बड़ी दुर्भावना पनप रही थी कि वह लोगों को बीमारी दे सकती है।

सुदीप ने भी वो खबर पढ़ी ,भूमि से बोले -इस विषय में अब तुम क्या कहोगी ? किन्तु भूमि शांत रही ,तुम्हें तो वो सीधी और सच्ची लग रही थी ,उलाहना देते हुए बोले -मेरे मना करने के बावज़ूद भी तुमने उसे घर में घुसा लिया। कितनी भयंकर बिमारी लिए हुए थी। तुम्हें क्या कहानी सुनाई थी ? मेरा शौहर मुझे छोड़ गया और बच्चों को पाल रही है। 

भूमि क्या कर सकती थी ? जो जैसा कर्म करेगा ,वैसा भुगतेगा भी !' दूध का धुला' कोई नहीं होता। इसके अपनों ने ही इसे धोखा दिया ,तभी भूमि को स्मरण हुआ ,इसकी बहन का क्या हुआ ? उससे पूछा जाये ,उसने सगी बहन होते हुए ,उसके साथ इतना बड़ा धोखा कैसे किया ?

  

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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