भानुशिला हवेली का दूसरा वारिस यानि कि भानू प्रताप सिंह भी अपने बड़े भाई के विवाह में शामिल था। वो उस समय वहीँ पर उपस्थित था। जब एक अजनबी बुजुर्ग़ आकर रूद्र और मोहिनी के विवाह को रोकता है और बताता है -रूद्र प्रताप सिंह ,इस घर का असली वारिस नहीं है।
यह सुनकर भानू को क्रोध आता है किन्तु वह स्वयं ही नहीं समझ पा रहा था ,उसका क्रोध किस पर है ?
उस बुज़ुर्ग पर...या फिर उस लड़की पर जो उसके भाई का हाथ थामे खड़ी थी।
तब घर के मुखिया विक्रमसिंह ने उनसे कहा -आप आइये !हम अंदर बैठकर आराम से बातें करते हैं ,कुछ ही देर बाद परिवार के सभी बड़े लोग, हवेली के पुराने बैठकखाने में एकत्र हुए।
मेहमानों से कहा गया -कि कुछ कानूनी प्रक्रिया चल रही है ,थोड़ी प्रतीक्षा कीजिये या जो जाना चाहते हैं ,जा सकते हैं किन्तु वहाँ उपस्थित लोगों में से कोई नहीं गया।हर कोई जानना चाहता था कि आखिर ये सब क्या हो रहा है ? ऐसा कौन सा रहस्य है ,जो हवेली वाले हमसे छुपाना चाहते हैं।
मोहिनी बाहर ही खड़ी थी। उसे अंदर जाने की अनुमति नहीं थी। रूद्र को भी अंदर बुलाया गया और वो भी अंदर चला गया। भानू सबसे आखिर में कमरे में दाखिल हुआ और तब दरवाज़ा बंद कर दिया गया।
बैठक के अंदर...'विक्रम सिंह जी 'कुर्सी पर बैठे हुए थे ,उनकी पत्नी' सावित्री देवी' रो रही थीं।
बुज़ुर्ग ने अपना परिचय दिया।"मेरा नाम हरिनारायण है,"मैं उस अस्पताल का रिकॉर्ड अधिकारी था, जहाँ आज से पच्चीस साल पहले आपके दोनों बेटों का जन्म दर्ज हुआ था।"
भानु ने तीखे स्वर में कहा- इस तरह पहेलियाँ मत बुझाइये !"सीधे मुद्दे पर आइए।"
हरिनारायण ने अपने हाथ की फ़ाइल मेज़ पर रखी और बोला -"जिस रात आपका जन्म हुआ था ..उसी रात अस्पताल में आग लग गयी थी।"उसकी बात सुनकर सभी अचम्भित रह गए ,कमरे में फिर से सन्नाटा छा गया।
तभी हरिनारायण बोला - ऐसे हालातों में अस्पताल में अफरा-तफरी मच गयी। लोग इधर -उधर भागदौड़ कर रहे थे ,अपने नवजात बच्चों की जान बचाने के लिए ,वो उन्हें लेने आये थे। इस बीच जल्दबाज़ी के चलते दो नवजात बच्चों की पहचान बदल गई।"
रूद्र ने अविश्वास से कहा -"मतलब...?"आप कहना क्या चाहते हैं ?
"मतलब जिस बच्चे को 'हवेली के परिवार वाले, अपना बड़ा बेटा समझकर घर ले आया..."दरअसल वो इस परिवार का जैविक पुत्र है ,ही नहीं ....."
"झूठ!"ये सब झूठ है ,भानु मेज़ पर हाथ मारकर खड़ा हो गया।"अगर ऐसा था तो आप पच्चीस साल तक चुप क्यों रहे?"और आज अचानक ये बात क्यों उठ रही है ?
हरिनारायण ने उसकी ओर देखा ,तब बोला -"क्योंकि मुझे भी लगता था कि सभी रिकॉर्डस नष्ट हो चुके हैं। लेकिन कुछ महीने पहले जब अस्पताल की पुरानी इमारत तोड़ी गई ,तब उसके मलबे से एक लोहे की तिजोरी मिली "उसमें सभी दस्तावेज़ सुरक्षित थे ,कहते हुए उन्होंने वह फ़ाइल आगे बढ़ा दी।
विक्रम सिंह ने काँपते हाथों से कागज़ उठाए ,उनकी आँखों से आँसू बह निकले।
सावित्री देवी,उनसे धीरे से बोलीं -"मैंने... आपसे पहले ही कहा था' कि सच इन्हें बता दो !"
रूद्र ने हैरानी से उनकी ओर देखा और अविश्वास से पूछा -माँ... क्या आपको पहले से ही ,ये सब पता था?"
उन्होंने हाँ में सिर हिला दिया ,जब तुम पाँच साल के थे......हमें तभी सच्चाई का पता चल गया था।"
रूद्र की साँसें जैसे रुक गईं ,बेचैनी और परेशानी से बोला -तब आपने,मुझे पहले क्यों नहीं बताया ?"
विक्रम सिंह की आवाज़ भर्रा गई और भीगे शब्दों से बोले - क्योंकि जिस दिन मैंने तुम्हें पहली बार अपनी गोद में लिया था..."...उस दिन से ही तुम, मेरे बेटे बन गए थे।"भले ही हमारा रक़्त संबंध न हो ,किन्तु हमने तुम्हें दिल से, अपना बेटा माना है ,कहते हुए वे रो दिए।
कमरे में बैठे ,सभी लोगों की आँखें उनके प्रेम को देखकर नम हो गयीं।
सिर्फ़ भानू चुप था ,वह आज जैसे पहली बार अपने भाई को देख रहा था,उस भाई को...जिसे उसने हमेशा अपना प्रतिद्वंद्वी समझा और आज पता चल रहा था कि वह शायद इस परिवार का असली बेटा ही नहीं है।लेकिन अजीब बात यह थी...आज उसे जीत जैसा कुछ महसूस नहीं हो रहा था ,बल्कि... एक अजीब खालीपन था।
बाहर खड़ी मोहिनी बेचैनी से दरवाज़े की ओर देख रही थी। तभी हवेली की सबसे बुज़ुर्ग सदस्या —दादीसा—धीरे-धीरे चलते हुए उसके समीप आईं। मोहिनी को लगा ,शायद वो उससे कुछ कहना चाहती हैं ,उन्होंने बिना कुछ कहे, मोहिनी के हाथ में एक छोटी-सी चाँदी की चाबी रख दी।
मोहिनी चौंक गई और उसने पूछा -"ये ...?"
दादीसा ने उसकी आँखों में देखते हुए फुसफुसाकर कहा -"अगर इस घर में रहना..है ...तो इस चाबी को कभी मत खोना।"एक दिन यही, तुम्हें उस सच तक ले जाएगी...".जिसे यह पूरा परिवार छिपा रहा है।"
मोहिनी इससे पहले कि कुछ पूछ पाती, उससे पहले दादी सा भीड़ में न जाने कहाँ खो गईं ? उसने एक नजर चाबी की तरफ देखा और चाबी को मुट्ठी में कस लिया। देखने में वह चाबी वह बहुत पुरानी लग रही थी।उस पर सिर्फ़ एक निशान बना था—'२'
मोहिनी ने अनजाने ही पीछे मुड़कर हवेली की ओर देखा। ऊपर तीसरी मंज़िल की एक खिड़की में...उसे एक साया दिखलाई दिया ,जैसे कोई व्यक्ति पर्दे के पीछे खड़ा होकर उसे देख रहा हो।
उसने पलक झपकी ही थी कि साया गायब हो चुका था लेकिन उसे पहली बार महसूस हुआ...यह हवेली सिर्फ़ ईंट और पत्थरों से नहीं बनी ,यह रहस्यों से बनी है। मोहिनी कुछ क्षणों तक वहीं खड़ी रही। उसकी मुट्ठी में दादीसा द्वारा दी गई चाँदी की छोटी-सी चाबी थी ,उसने कसकर अपनी मुट्ठी बंद की।
उसका मन बार-बार उसी खिड़की की ओर जा रहा था, जहाँ कुछ समय पहले उसे किसी का साया दिखाई दिया था।"क्या सचमुच वहां कोई साया था... या मेरा भ्रम था?" उसने मन ही मन सोचा लेकिन आज जो कुछ हो चुका था, उसके बाद उसे अपने भ्रम पर भी भरोसा नहीं रहा।
उधर बैठक के भीतर माहौल और भी भारी हो चुका था। विक्रम सिंह ने काँपती आवाज़ में कहा,"आज तक हमने यह बात इसलिए छिपाई क्योंकि हमें डर था- कि अगर सच बाहर आ गया, तो हमारा परिवार टूट जाएगा।"
रूद्र ने उनकी ओर देखा और पूछा - अब ?
विक्रम सिंह ने अपनी आँखें बंद कर लीं।"अब सच खुद चलकर हमारे दरवाज़े तक आ गया है।" कुछ क्षण तक कोई कुछ नहीं बोला।
तब परिवार के सबसे बड़े चाचा, रणवीर सिंह, धीरे-धीरे उठे,उनकी आवाज़ में गंभीरता थी, लेकिन हर शब्द में कठोरता थी।"अब यह मामला सिर्फ़ भावनाओं का नहीं है।"यह हमारे परिवार की विरासत का मामला भी है।"कमरे का माहौल तुरंत बदल गया।
रणवीर सिंह ने मेज़ पर हाथ रखा।"अब अगर ' रूद्र 'इस परिवार का जैविक बेटा नहीं है...तो कानून के अनुसार मुख्य उत्तराधिकारी कौन होगा ?"सबकी निगाहें एक साथ भानू की ओर मुड़ीं।
भानू ने बिना किसी भाव के कहा -"मुझे किसी विरासत की ज़रूरत नहीं।
"रणवीर सिंह मुस्कुराए और बोले - तुम्हें ज़रूरत हो या न हो..."...लेकिन दुनिया को है ,कल सुबह तक यह खबर पूरे शहर में फैल जाएगी,अख़बार में ख़बर छपेगी कि हमारे परिवार ने पच्चीस साल तक सच्चाई छिपाये रक्खी ।"शेयर गिरेंगे।"दुश्मन हमला करेंगे और सबसे बड़ी बात..."उन्होंने एक-एक शब्द पर ज़ोर देते हुए कहा -"आज की शादी अधर में लटक जाएगी।"
यह सुनते ही रूद्र ने पहली बार दृढ़ स्वर में कहा -शादी होगी। "सबने उसकी ओर देखा।
मोहिनी ने मुझसे प्रेम किया है, मेरे नाम और रुतबे से नहीं।वह दृढ़ विश्वास से बोला -अगर उसे ,मुझसे शादी करनी है..."...तो मैं आज भी तैयार हूँ।"
दरवाज़े के बाहर खड़ी मोहिनी ने यह बात सुन ली। उसकी आँखें भर आईं।उसे लगा, जैसे सारी दुनिया उसके खिलाफ हो सकती है...लेकिन 'रूद्र' अभी भी उसके साथ खड़ा है।
क्या मोहिनी भी उसके साथ खड़ी हो पायेगी ?जानने के लिए चलिए आगे बढ़ते हैं -
