Khoobsurat [part 51]

 लगभग 15 दिनों के पश्चात, शिल्पा को ,मधुलिका दिखलाई दी , मधुलिका के दिखने के पर ,शिल्पा को एक उम्मीद जगी ,शायद यह कुमार के विषय में कुछ जानती हो। तब वह मधुलिका से पूछती है -क्या तुम कुमार से मिली हो ?

नहीं, बिल्कुल नहीं, क्यों क्या कोई बात है ? क्या तुम्हें उससे कोई काम है ?

नहीं, ऐसा कोई विशेष कार्य तो नहीं है, बहुत दिनों से दिख नहीं रहा था, इसीलिए पूछना चाहती थी,कॉलिज में किसी को जानते हो और वो दिखलाई न दे ,तो चिंता होने लगती है ,न जाने वो , क्यों नहीं आया तबियत तो ठीक है। 


मधुलिका उसके झूठ पर मुस्कुराई और बोली - मैंने तो सुना है, उसने, अपने पापा का व्यापार संभाल लिया है, कॉलेज में कम ही आया करेगा, मधुलिका के मुंह से यह बात सुनकर ,शिल्पा को बहुत दुख हुआ, उसने न जाने, कुमार को लेकर कितने सपने सजा लिए थे ?तभी मधुलिका से पूछा -तुम आजकल कहाँ रहती हो ,तुम भी कहीं नजर नहीं आतीं। 

मैं तो प्रतिदिन कॉलिज आती हूँ किन्तु लगता है ,तुमने भी, कॉलिज आना कम कर दिया है। 

शिल्पा ने, उसकी बात का कोई जबाब नहीं दिया और आगे बढ़ गयी ,अपना फोन निकाला ,कुमार को फिर से फोन करती है किन्तु पहले की तरह ही, उसने फोन नहीं उठाया। अचानक ही, वह उससे इतना दूर कैसे हो गया ? उसे ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे-' दूध में से मक्खी को निकाल कर फेंक देते हैं।''शिल्पा बेचैन हो उठी, तब शिल्पा वापस मधुलिका के पास आई और उसने मधुलिका से पूछा -क्या तुम, उसके घर का पता जानती हो ?

नहीं, मैं उसके घर कभी नहीं गई यह कहकर वह आगे बढ़ गई क्योंकि वह जानती थी यदि उसने कुछ भी ऐसा कह दिया तो शिल्पा को सीधा शक़ उसी पर जाएगा। जरूरत शिल्पा की थी ,वह मधुलिका के पीछे आई ,क्या तुम किसी ऐसे को जानती हो ? जो उसका घर जानता हो !आज उसे लग रहा था ,चाहे कुछ भी हो जाये, आज उससे मिलकर बात करके रहेगी,उसकी आवाज में कंम्पन था।  

मुझे नहीं मालूम इतने बड़े कॉलिज में इतने लड़के -लड़कियों में, मैं किससे पूछूं ? कि कुमार कहाँ रहता है ?

तुमसे पूछने के लिए नहीं कह रही हूँ ,किसी ऐसे छात्र को पूछ रही हूँ, जो उसका घर जानता हो,दोनों ही एक दूसरे से अपने आपको, छुपाने का प्रयास कर रहीं थीं।  

क्यों ?तुम उससे मिलने के लिए इतनी उतावली क्यों हो रही हो ?जब भी उसे समय मिलेगा आ जायेगा ,मधुलिका ने जबाब में कड़वाहट थी।

 उसकी बातें सुनकर शिल्पा उदास हो गयी और मधुलिका के सामने से हट गयी। उसके मन में अनेक प्रश्न गूंज रहे थे ,क्या कुमार ने मुझे धोखा दिया ?उस दिन होटल में क्या हुआ था ?मैं घर कैसे वापस आई मुझे कुछ भी स्मरण क्यों नहीं है ?कॉलिज में अब उसका मन नहीं लग रहा था वो घर वापस आ गयी। 

क्या हुआ ?बेटा !आज इतनी जल्दी घर कैसे ?कल्याणी जी ने पूछा -तुम्हारी तबियत तो ठीक है। 

हाँ ,किन्तु अजीब सा लग रहा है ,कॉलिज में मन नहीं लग रहा था कहकर अपने कमरे की तरफ बढ़ी ,सोचा,कहीं मम्मी मेरे पास न आ जाएँ वो कुछ देर अकेली रहना चाहती थी ,तब वो बोली -मम्मी !मैं देर सोऊंगी, शायद आराम मिले। 

 आज अपने कमरे में बंद हो ,शिल्पा ने अपनी चित्रकला की कॉपी को निकाला ,क्या चित्र बनाऊं ?जीवन में इतनी हलचल जो मची है ,किससे जाकर पूछूं ?चित्र बन रहा था किन्तु उसका स्वरूप स्पष्ट नहीं हो पा रहा था। उसके विचारों की तरह उलझा हुआ ,ह्रदय की तरह बेचैन !कुछ आकृतियां स्पष्ट होकर भी उलझी नजर आ रहीं थीं। बड़ी देर तक पेंसिल से खेलती रही किन्तु उनमें रंग नहीं भर पाई,उसके जीवन के रंग न जाने कहाँ जा  रहे थे ,वो उन्हें पकड़ना चाहती है किन्तु लाल रंग जो प्यार और विश्वास का रंग है ,वो बिखरता जा रहा है ,उसके आसपास अन्य रंग भी थे किन्तु वो उसी रंग को समेटने में लगी है। तभी एकदम से जैसे दरवाजा खुलता है और वो उन रंगों के जाल से बाहर आती है ,वो एकदम से चौंक गयी जैसे कोई सपना टूटा हो।

कमरे में नित्या ने प्रवेश किया था ,उसे देखकर बोली -तुम तो जगी हुई हो। 

क्यों ?तुमने क्या समझा था ?

मैंने कुछ नहीं समझा बल्कि बुआ जी ने समझाया था कि कमरे में आराम से जाना शिल्पा सोइ हुई है इसीलिए पूछ रही थी। 

लगभग एक महीने के पश्चात,अचानक कुमार कॉलिज में आता है ,शिल्पा ने तो जैसे उम्मीद ही छोड़ दी थी किन्तु आज भी उसने शिल्पा से मिलने का प्रयास नहीं किया ,उसके दोस्त उसे घेरे हुए खड़े थे। कॉलिज में काफी हो हल्ला हो रहा था। शिल्पा ने अपनी क्लास की लड़की से पूछा -आज कॉलिज में क्या हो रहा है ?मैंने लड़कों के जगह -जगह ग्रुप देखे ,लग रहा है ,जैसे आज कोई पढ़ने नहीं बल्कि मस्ती करने आये हैं। 

आज तो सभी मस्ती ही कर रहे हैं ,सभी को  आश्चर्य हो रहा है ,इसीलिए मस्ती कर रहे हैं।

 तुझे कैसे मालूम ?वहां क्या हो रहा है ?

मैं नीचे गयी थी ,तब पता चला। 

क्या पता चला ?

यही कि हमारे कॉलिज का लड़का कुमार है न.... 

हाँ ,क्या हुआ, उसे ?

उसे कुछ नहीं हुआ , हँसते हुए बोली -वो विवाह कर रहा है ?

क्या ?आश्चर्य से शिल्पा की आँखें फैल गयीं। 

हाँ ,इसी तरह की प्रतिक्रिया है ,सभी की ,उसके दोस्त तो उसे एक पल के लिए भी, नहीं छोड़ रहे हैं इसीलिए सभी मस्ती कर रहे हैं ,कुमार सभी को मिठाई खिलाता घूम  रहा है। 

शिल्पा को लगा ,जैसे वह चक्कर खाकर गिर जाएगी ,अपने सर पर हाथ रखते हुए पूछती है ,वो किसके साथ शादी कर रहा है ?

वो लड़की भी अपने कॉलिज की ही है ,उम्मीद की एक किरण ने उसकी बंद होती आँखों को  खोलने में सहायता की। तुम्हें तो पता होना चाहिए ,तुम्हारी सहेली है ,उसने तुम्हें कुछ नहीं बताया। 

क्या नहीं बताया ?तुम किस सहेली की बातें कर रही हो ?

मधुलिका !

क्या ?शिल्पा जैसे सोते से जागी। 

हाँ ,उसी के साथ तो विवाह करने जा रहा है ,हमारे कॉलिज का सबसे हैंडसम मुंडा !तुम्हारी दोस्त उड़ाकर ले गयी ,उसे और तुम्हें कुछ भी पता नहीं ,मुस्कुराते हुए वो बोली -सुना है ,महीनों से दोनों का चक्कर चल रहा था। कमाल है ,ये कैसी दोस्त है ?जिसने अपनी ही दोस्त को नहीं बताया। 

तभी अचानक शिल्पा अपनी कुर्सी  से उठ खड़ी होती है और कहती है -मैं अभी आई। 

क्यों ?क्या उससे लड़ने जा  रही है ,वो नहीं आई है ,कहते हुए वो हंसने लगी।   

 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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