Gareeb kon ? [part 1]

रुपाली के फोन की घंटी बजी, वो अभी अपने घरेलू कार्यों में व्यस्त थी। न जाने किसका फोन आ गया ?सोचकर वह अपने फोन को देखती है। फोन उसकी मम्मी का था ,नंबर देखकर वो परेशान हो गयी ,अब न जाने क्या बात हो गयी ? मम्मी से कितनी बार कहा है ?अब आपकी उम्र हो गयी है ,घर की साफ -सफाई के लिए किसी को रख लो !किन्तु उन्हें तो जैसे किसी की बात सुननी ही नहीं है ,घर  में काम करती रहेंगी और फिर मुझे फोन करके अपनी बिमारियों का रोना रोती रहेंगी। 

हैलो ! क्या हुआ ,अब क्या नई मुसीबत आ गई है ,थोड़ी झुंझलाहट से रुपाली ने पूछा। 

तू इतनी परेशां क्यों है ?क्या कुछ हुआ है ? उन्होंने सहजता से पूछा। 


तब रुपाली को अपने व्यवहार पर ख़ेद हुआ ,उसे लगा, उसने अपनी मम्मी से इस तरह से बात करके गलती की है। तब वो बोली -मम्मी !वो मैं कहीं ओर व्यस्त थी ,ध्यान कहीं और था, आप बताइये !कैसे फोन किया ?

तुझे एक ख़ुशख़बरी सुनानी थी इसीलिए फोन किया ,वो मुस्कुराते हुए बोलीं। 

रुपाली सोचने लगी ,ऐसी क्या बात हो सकती है ? क्या प्रभात आ रहा है ?उसने पूछा। 

नहीं ,वो अभी कहाँ आ पायेगा ?उसे आने में अभी समय है,तू ,हर बार शोर मचाती रहती थी -कोई कामवाली रख लो ! अब तेरे कहे पर मैंने एक कामवाली रख ली है 

ओह !शुक्र है ,अब आपने कोई सही कदम तो उठाया। अब आप अपनी सेहत का ध्यान रखिये !जो समय आप घर के कामों में बिताती थीं ,वो समय अब अपने योग में और अपने खाने -पीने का ख़्याल रखिएगा कहते हुए, रुपाली ने एक गहरी स्वांस ली और बोली -मम्मी !अभी मेरा बहुत काम पड़ा हुआ है ,काम निपटाकर आपसे बात करती हूँ। मैं भी अब मम्मी की तरफ से निश्चिन्त हो जाना चाहती थी। बड़ा भाई अपने परिवार के साथ विदेश में जा बसा है ,छोटा अभी नौकरी तो करता है किन्तु अच्छी नौकरी की तलाश में भटक रहा है। मम्मी मुझसे ही ,फोन करके अपने दिल की बात कह लेतीं थीं ,उनकी बातों से मुझे लग रहा था ,अब वो समय के साथ थकने लगीं हैं। तब अक़्सर मैं, उन्हें समझाने का प्रयास करती और कहती सहारे के लिए कोई कामवाली लगा लो !अब तक उन्होंने अपने सभी कार्य स्वयं किये हैं ,उन्हें आदत भी नहीं किसी से कहने की किन्तु अब उनके घुटनों का दर्द बढ़ गया था इसीलिए अब मैं उनसे कहती रहती थी। चलो !अच्छा ही हुआ ,जो उन्होंने काम के लिए कोई रख ली। 

मम्मी और मेरे बीच अक़्सर बातें होती रहतीं ,योग ,दवाई ,भाई की नौकरी ,पापा के स्वास्थ्य को लेकर बातें होती रहतीं। मम्मी से कभी, उनकी कामवाली के विषय में बात नहीं की, उस तरफ से मैं, निश्चिंत थी कि  उनका कार्य हो रहा है किंतु यह ध्यान नहीं दिया, कि उनसे पूछूं-उन्हें यह काम वाली कैसे मिली , कैसा काम करती है ? अभी उनकी कामवाली को लगभग 3 महीने भी पूरे नहीं हुए थे, मम्मी का फोन आया - रूपाली बेटा ! आज 15 दिन हो गए काम वाली नहीं आई है। 

क्यों, क्या बात हुई ? क्या आपने उसे काम से निकाल दिया।

 नहीं, मैंने उसे  निकाला नहीं है। 

तब वह छुट्टी के लिए कह कर गई होगी।

 उसने छुट्टी भी नहीं ली। 

तब क्या हुआ ? अब क्यों नहीं आ रही है ? क्या कुछ बात हुई है, आप मुझे ठीक से सारी बात बताइए। क्योंकि उनकी बातों से मुझे लग रहा था, वो कुछ बात तो मुझसे छुपा रही हैं । 

तब वो बोलीं  -जब मैंने  उसे काम पर लगाया था तो मुझे सीधी लग रही थी, मुझे तो काम से मतलब था, काम अच्छा कर रही थी। जरूरत के लिए कभी-कभी बीच में पैसे भी मांग लेती थी, मुझे तो पैसे देने ही थे  यही सोचकर - शायद, बेचारी गरीब है इसीलिए इसकी सहायता भी हो जाएगी धीरे-धीरे काम करती रहेगी।

 अब क्या हुआ? रूपाली ने परेशान होते हुए पूछा। 

अब बात यह है, वह मुझे यह कहती थी -कि मेरी बहू के बच्चा होने वाला है। मुझे थोड़े पैसों की जरूरत पड़ेगी, आप मेरी मदद कर देना। मुझे लगा,' अच्छी है, यह क्या बेईमानी करेगी ? ऐसे समय में तो, सहायता करने में क्या बुराई है ?'' मेरे कान खड़े हो गए'', अवश्य ही मम्मी ने ऐसा कुछ किया है, तभी वो परेशान हैं। 

 तब मैंने पूछा -आपने किस तरह की सहायता की, वह मुझसे  ₹5000 मांग रही थी और कह रही थी -'धीरे-धीरे पैसे कटते जाएंगे या फिर मैं आपको लौटा दूंगी, मैंने गरीब समझकर उसकी सहायता कर दी, किंतु आज 15 दिन हो गए अभी तक आई ही नहीं है। मैंने तेरे पापा को भी नहीं बताया। सोचा, इसमें बताना क्या है ? बाद में दे ही देगी किंतु जब 15 दिन हो गए ,तब मुझे लगा शायद, वह पैसे लेकर भाग गई। 

आपको उसके घर का पता मालूम है ? घर का पता तो मालूम नहीं है किंतु वह बता रही थी - वह किसी इलाके से आई थी। 

बहुत अच्छे ! इतने दिनों पश्चात आपने एक कामवाली लगाई  और उस पर इतना विश्वास कर बैठीं  कि उसे ₹5000 थमा दिए।

 कह रही थी, गरीब हूं, बहु को बच्चा होने वाला है, इसीलिए थोड़ी परेशानी है, दे जाऊंगी। मम्मी की बातों ने मुझे परेशान कर दिया और मैं तैयार होकर घर के लिए रवाना हो गई। बच्चों के स्कूल से आने मैं अभी समय था प्रदीप भी शाम को ही आएंगे मैंने सोचा -काम निपटाकर ,मम्मी से मिलकर जल्दी ही आ जाऊंगी। जब मम्मी के पास गई, तो वह रो रही थीं क्योंकि पापा ने उनकी बातें सुन ली थीं और वो उन पर नाराज थे। मम्मी को डांट रहे थे -' यह किसी पर भी ऐसे ही विश्वास कर लेती है और अब बैठी है।' 

मम्मी रोते हुए कह रहीं थीं -उसने कहा था -गरीब हूं ,थोड़ी सहायता हो जाएगी, मैंने भी सोचा, काम तो कर ही रही है , उसमें पैसे कटते जाएंगे। मुझे क्या मालूम था? कि वह आएगी ही नहीं।

 आप आसपास किसी ऐसे इंसान को जानती हैं या ऐसे परिवार को, जिसके यहां वह काम करती थी।

 चार घर छोड़कर, उसमें काम करती है,दो -तीन घर और हैं। 

आपने उसका नंबर तो लिया होगा। 

 हां उसका नंबर मेरे पास है, लेकिन अभी वह फोन नहीं उठा रही है। 

मम्मी ने, उसके विषय में बताया -उसका नाम शारदा है , उसके तीन बेटे हैं, तीनों किसी न किसी जगह कार्य करते हैं, पोते-पोती हैं। 

 तीन-तीन बेटे कमा रहे हैं, और फिर भी आपको वह गरीब लग रही थी, वह स्वयं भी काम पर आ रही थी।

 इससे पूछो ! इसने उसका दिमाग खराब कर दिया था, उसे खाने में कभी कुछ, कभी कुछ देती रहती थी , कभी-कभी तो उसे बांधकर दे देती है, कि उसके बच्चे खा लेंगे। 

मैंने उसका नंबर लेकर अपने फोन से उसे फोन किया, उसने तुरंत ही फोन उठा लिया, तब मैंने उससे कहा -मुझे अपने घर काम करवाना है, किसी ने तुम्हारा नंबर दिया है। 

तब वो बोली -आप कहाँ रहती हैं ? मैं आ जाऊंगी।

नहीं ,मैं तुम्हारे घर आ जाती हूँ ,तब बात करते हैं ,कहकर उससे उसके घर का पता माँगा। 

क्या उसने अपने घर का पता दिया ,क्या रुपाली अपनी मम्मी के पैसे वापस ला सकी,जानने के लिए  आगे पढ़िए -[ ग़रीब कौन ?भाग २ ] 


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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