Vegyanik prayog

मानव प्रवृति है , कुछ न कुछ करते रहने की ,उसकी ये जिज्ञासा की प्रवृति ही उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती रहती है। जब व्यक्ति कुछ नया सृजन करता है ,तब उससे कुछ न कुछ नवनिर्माण होता है। नवनिर्माण की कब आवश्यकता पड़ती है ? नवनिर्माण की तभी आवश्यकता पड़ती है ,जब किसी भी कारणवश हमारी परेशानियां बढ़ती हैं ,उनके सुधार के लिए ,वो उपाय खोजता है। अपनी आवश्यकताओं के आधार पर वो नई -नई खोज में लग जाता है। तब किसी अनजान और अद्भुत वस्तु का निर्माण होता है। जो  उपयोगी हो सकती है ,यही विज्ञान है। 



किसी ने क्या खूब कहा ?''आवश्यकता आविष्कार की जननी है। '' जैसे -जैसे आवश्यकता और सोच बढ़ती है ,मानव कुछ न कुछ नया  करने में जुट जाता है। कई बार कुछ खोज तो वो अनजाने  में ही कर बैठता है। जिनका हमारे दैनिक जीवन पर असर पड़ता है। हमारे घरों में जो रौशनी हो रही है , इसे  अविष्कार और विज्ञान का चमत्कार ही कहेंगे। पहले लोग प्रकाश के लिए, मोमबत्ती , सरसों के तेल के दिए या फिर मिटटी के तेल का उपयोग करते थे। किन्तु ''एडिसन ''ने अनेक  प्रयोग किये ,फेल भी हुए ,तब आज उनके द्वारा निर्मित बल्ब की रौशनी का आज हम प्रयोग करते हैं।उस बल्ब ने आज घर -घर में रौशनी कर दी ,आज के समय में किसी ग़रीब के घर भी एक बल्ब रौशनी करता मिल ही जायेगा। 

हमारे घर में ,''रेफ़्रिजियेटर ''यानि जिसे हम संक्षिप्त में 'फ्रिज 'कहते हैं ,स्त्री ,कपड़े धुलने की मशीन इत्यादि वैज्ञानिक आविष्कारों ने ही ,हमारी घरेलू ज़िंदगी को सरल बनाया है।आज के समय में फोन ,लैपटॉप इत्यादि आविष्कार के कारण ही ,आज कुछ लोग घर में बैठकर ही अपना रोजगार कर रहे हैं। हमारे  देश में जैसी महामारी आई थी ,उस समय पर ये बहुत क़ारगर साबित हुए। जैसे -जैसे इंसान की आवश्यकता बढ़ती जाती है ,नित नए आविष्कार भी होते रहते हैं। कई बार तो ,अविष्कार विज्ञान से ही नहीं जुगाड़ से भी हो जाते हैं। जुगाड़ करके भी वो कुछ नया कर देता है  इसीलिए तो कहा गया है ,आवश्यकताओं से ही अविष्कार का जन्म होता है। जैसे -आगे -आगे ईंधन की परेशानी होगी ,तब लोगों ने उसकी बचत के लिए सौर ऊर्जा के उपयोग के लिए ,''सौर पैनल ''बनाये। पानी की बचत के लिए ,बरसात के जल को संचय करने के लिए कार्य करने लगा। 

विज्ञान ने घरेलू सामानों में ही नहीं ,कृषि के क्षेत्र में भी नए -नए आविष्कार किये हैं ,नई -नई खेती से संबंधित यंत्रों का अविष्कार किया है।  साईकिल ,फिर रिक्शा ,उसके पश्चात स्कूटर ,मोटरसाईकल उसके पश्चात गाड़ी ,हवाई जहाज ये सभी आविष्कार के ही रूप तो हैं ,ताकि मानव कम से कम समय में अधिक से अधिक दूरी तय कर सके। अब तो घर बैठे ही अपने प्रियजनों से वार्तालाप हो जाता है। विज्ञान प्रति दिन '',दिन दोगुनी रात चौगुनी ''उन्नति कर रहा है। विज्ञान ने ही हमारी ज़िंदगी को अधिक सरल बना दिया है।
 


अंत में यही कहूंगी ,विज्ञान के बहुत लाभ हैं तो हानि भी है ,''ये हमारे लिए हैं ,हम उनके लिए नहीं '',साइंस की वस्तुओं का प्रयोग करते  हुए ,हमें अपने कार्यों को नहीं भूलना है ,ये तो मात्र मशीने हैं जो हमारी सुविधाओं के लिए हैं किन्तु इनके जाल में फंसकर हम अपने कर्म भूल जाते हैं ,जैसे -विद्यार्थी पढ़ते -पढ़ते ,कोई नया एप खोलकर देखने लग जाता है ,इसके अधिक प्रयोग से ,आँखें कमजोर हो रही हैं ,किन्तु हमारा शरीर मशीन नहीं ,एक बार आँखें कमजोर हुई तो ठीक नहीं होतीं ,वैसे आँखों के लिए भी नए -नए आविष्कार हो रहे हैं। हर चीज की अति  बुरी होती है ,इनका सदुपयोग कीजिये ,दुरूपयोग नहीं , चलिए !जो भी है ,हमारी ज़िंदगी में आज के समय में विज्ञान बहुत महत्व रखता है।इससे उत्प्नन चीजों का प्रयोग अपनी सुविधाओं के लिए ,अपनी उन्नति के लिए कीजिये।    

  
laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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