Teri hone lagi hun

तेरे शब्द ,तेरे भाव ,मेरे मन को छूने लगे हैं ,

न चाहते हुए भी ,मैं उन्हें अब,पढ़ने लगी हूँ  ,

 दर्द तेरा ,महसूस करने लगी हूँ ,मैं,तेरी होने लगी हूँ। 



तूझे सोच ,आँखें मेरी स्वतः ही मूँद जाती हैं। 

तेरी बातों को सोच ,मैं ! मुस्कुराने लगी हूँ। 

 ख्यालों में ,तुझमें समाने लगी हूँ ,मैं ,तेरी होने लगी हूँ।

 

रहते हो ,हरदम तुम ख्यालों में ,ख़्वाबों में ,

तेरे आने से ,धड़कने महसूस करने लगी हूँ।

लगता है तुम पर मरने लगी हूँ ,मैं ,तेरी होने लगी हूँ।

 

तुम्हें देखते ही, मैं कुम्हलाई सी,अब खिलने लगी हूँ ,

तेरे मौन को ,तेरी मुस्कुराहटों को, समझने लगी हूँ।

कैसा? ये दर्द है ,जो अब जीने लगी हूँ ,मैं ,तेरी होने लगी हूँ। 


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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