चाहता नहीं कौन ? शिखर पर चढ़ना।
प्रकृति से ओत -प्रोत ,पर्वत पर चढ़ना।
बुलंदी किसको नहीं पसंद ?औआगे बढ़ना।
आसान नहीं जीवन में भी, शिखर पर चढ़ना।
सम्भलकर -संभलकर ,डग आगे भरना।
लड़खड़ाते ही ,तब सम्भव है ,नीचे गिरना।
पहुंच शिखर पर, परचम तुमअपना लहराना।
नीचे भी ,तुमको आना ,ये कभी भूल न जाना।
शिखर ' सौंदर्य' में ,कहीं तुम ,खो मत जाना।
जिस विश्वास से बढ़े आगे ,उसे मत झुठलाना।
पर्वत की भांति, तुम भी कठोर ,मत बन जाना।
कठोर जीवन इसका ,जितना लगता है ,सुहाना।
इस यात्रा में ,''मैं ''कभी न.... अपने मन में लाना।
कितना भी तुम ?ऊपर चढ़ लो !वापस तुमको यहीं पर आना।
