Meri jaan

 माता -पिता आदरणीय हैं ,

सम्मानीय हैं ,उनकी जान हैं,हम।  

बच्चे ,माता -पिता की जान हैं।

यही उनकी पहचान है।  


ज़िंदगी में ,एक जान ऐसी आ जाये ,

 ज़िंदगी के मायने ही बदल जाएँ। 

 चलती हवा,

 बहती बयार लगने लग जाये। 

उसके आने पर, 

हवा का झोंका भी ,

महकी पवन का झोंका लगता है। 

दिन में भी ख्वाब,सुहावना दीखता हैं। 

उसके संग ,

हर ख्वाब  लुभावना  लगता  हैं।

 वो जान.. जिसके प्यार में ,

 दुनिया सुहावनी  लगती है। 

 वो जान....!

 ज़िंदगी में आये ,बाहर बनकर ,

 दिल लुभाये करार बनकर ,

वो जान,जीवनभर साथ निभा जाए ,

ऐसी कोई ,मेरी ज़िंदगी में आ जाये।

''मेरी जान'' बने, ऐसी कोई मिल जाये।  

 


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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