' ज़िंदगी का सफ़र 'सुहाना लगता है।
इसे जी लो तो ,ख़्वाब सुहाना लगता है।
लोग मिलते हैं अनेक , रिश्ते भी !
परखो तो ,सब बेगाना लगता है।
बेगाना अपना,अपना बेगाना लगता है।
रिश्तों का ये छल ,पुराना लगता है।
कभी -२ ख़ुशियों सा सुहाना लगता है।
कभी -कभी दुखों का खज़ाना लगता है।
प्यार भरे रिश्ते ,मिलते हैं बहुत......
समझो तो हर कोई अनजाना लगता है।
जिंदगी के हर पड़ाव में ,लोग मिलते हैं।
दूर का हर ''ढोल सुहाना लगता'' है।
