इस साल..... भी ,
कुछ गिले ,शिकवे होंगे।
कुछ पराये अपने, होंगे।
कुछ अपने , पराये होंगे।
कुछ और दोस्त बनेंगे।
कुछ घर आबाद होंगे।
कुछ अधूरे ख़्वाब पूरे होंगे।
कुछ तमन्नाओं के महल टूटेंगे।
इक नई मुस्कान खिलेगी।
इच्छाओं की लम्बी सूची होगी।
कल्पनायें अपने चरम पर होंगी।
कुछ किस्से और कहानी बनेगीं।
इस साल भी इक उम्मीद होगी।
ग़म और तन्हाई की परीक्षा होगी।
कल से बेफ़िक्र खूबसूरत शाम होगी।
