Badli ka chand [part 94 ]

सिम्मी अपने पति मैक को जिस कमरे में धकेलती है ,वो किसी और का कमरा था जो उनके कमरे से भी जुड़ा था उसका एक दरवाजा ,उनके कमरे से भी खुलता था और मैक को इसकी जानकारी भी नहीं ,अभी वो उस कमरे को निहार ही रहा था तभी एक आदमी अपने कमरे में आता है। किन्तु मैक को नहीं देख पाता किन्तु उस व्यक्ति की पत्नी देख लेती है और मैक को  देखकर उसकी चीख निकल जाती है। तब तो उसे वो व्यक्ति भी देख  लेता है और कहता है -तुम..... 


क्या ,तुम इसे जानते हो ?शब्बो बोली।वो कमरा किसी और का नहीं करतार सिंह का था। करतार ने ये कमरा जानबूझकर लिया था ताकि कोई भी परेशानी या समस्या हो  तो वो अपने असिस्टेंट'' मैक'' से मिल सके या बात कर सके। 

करतार मुस्कुराया और मैक से बोला -आखिर बीवी ने मारकर,कमरे से बाहर निकाल ही  दिया।

 सर ! आप  तो जानते ही हैं ,वो कितनी ख़तरनाक है ?वो मुझे छोड़ेगी नहीं किन्तु मैंने कैमरा लगा दिया है। 

हाँ ,मैं देख रहा था ,वो तो उन पर भी भारी पड़  रही है। 

क्या तुम दोनों एक -दूसरे को जानते हो ?शब्बो ने आश्चर्य से पूछा। 

हाँ, ये मेरा असिस्टेंट मैक है ,इसका अभी कुछ दिनों पहले ही विवाह हुआ ,मैंने इसे यहीं बुलवा लिया।

क्या ,'सिम्मी 'तुम्हारी पत्नी है ? 

जी ,क्या हुआ ?क्या उसने आपको भी कुछ कह दिया ? उसके इसी बिंदास अंदाज के कारण ही मैंने उससे विवाह किया किन्तु अब वो मुझे समझानी भी भारी पड़ जाएगी। 

क्यों ,तुमने ऐसा क्या किया ?

मैंने साहब के कहने पर ,उसे बिना बताये ही ,अपनी योजना में शामिल कर लिया किन्तु जब उसे पता चलेगा तो वो मुझे छोड़ेगी नहीं। 

नहीं नाराज होगी ,शब्बो पूरे यकीन से बोली ,दोनों उसकी तरफ देख रहे थे ,तब शब्बो ने बताया ,जब ये [मैक ]की तरफ अपनी पत्नी और उस आदमी से बातें का रहा था ,तब मुझे ये सब बहुत बुरा लगा  मैंने उसे सब  बता दिया और उसे ये भी बताया कि ये उसे ये अच्छा मौका मिला है ,इस शहर में इस तरह के बहुत कांड होते हैं ,तुम उनका पर्दाफ़ाश कर सकती हो किन्तु उसने मुझे ये नहीं बताया कि उसका पति भी पुलिस में है। मैंने उसे समझाया- कि मेरे पति पुलिस में है ,कुछ भी गलत होता है ,तो हम संभाल लेंगे इसीलिए वो तैयार भी हो गयी। 

इसका अर्थ है ,वो आपके कहने पर..... सोचकर मैक ने अपना माथा पीट लिया और मैं समझ रहा था कि इसने इंकार क्यों नहीं किया ? सच में ,मैं बताऊँ ,मैं घबरा गया था इसीलिए उसे लेने भी गया था किन्तु वो मानी नहीं और मुझे इधर धकेल दिया। एक तो  बात है सर ! उसमें हिम्मत बहुत है ,जबान की पक्की भी है। तभी तो भाभीजी के कहने पर तैयार हो गयी। आप तो जानते ही हैं कितने ख़तनाक गुंडे हैं ?ये ! 

करतार मुस्कुराते हुए बोला -मैक ,देखा तुमने ! ये दोनों पुलिसवालों को ही चकमा दे रही थीं कितनी बहादुर हैं ?हमारी बीवियाँ !आखिर हमारी संगत का असर जो है। 

रहने दीजिये ,इस बात का 'क्रेडिट' भी तुस्सी ले जाओ !कहकर शब्बो ने मुँह फुलाया किन्तु साथ ही बोली -चलो ! उधर देख लेते हैं कि क्या हुआ ?वैसे जो जानकारी हमें मिलनी थी सबूत लेने थे ,वो तो हमको मिल ही गए।

वो कैसे ? मैक और करतार दोनों ने एकसाथ पूछा  

मैंने उसको एक कैमरा दिया था ,बस इक वार टोनी आ जाये।

हाँ ,हमारा उद्देश्य , उसे ही तो पकड़वाना है , कहकर वो कैमरे की स्क्रीन पर नजर गड़ाते हैं। वो देखते हैं ,सिम्मी अभी भी ,उन लोगों पर भारी पड़ रही थी ,वो महाशय तो घबरा ही गए ,क्या बैठे -बिठाये मुसीबत मोल ले ली ? वो टोनी को फोन पर धमकाते हैं ,और उससे अपना पैसा वापस मांगते हैं। कुछ देर तक इसी तरह बात होती रही। उन्हें तो किसी भी तरह का लफ़ड़ा नहीं चाहिए था। टोनी से कहते हैं, तुम फौरन इधर आओ !और साथ में मेरे पैसे भी लेते आना। 

टोनी गुस्से में भिनभिनाते हुआ आता है ,और सिम्मी पर चिल्लाता है ,ये तुम क्या कर रही हो ?नहीं करना था तो..... किसी ने जबरदस्ती तो नहीं की थी। उनसे पैसा लिया है ,तुम्हें उनके साथ रहना होगा। 

किसी ने मुझसे जबरदस्ती नहीं की, तो मुझसे पूछा भी नहीं। 

पूछा नहीं होता तो ,तुम्हें ऐसी घुट्टी पिलाते तुम्हें कुछ भी नहीं पता चलता ,समझीं !इसमें तुम्हारी भी रजामंदी थी। अब चुपचाप अपना दिया कार्य पूर्ण करो ,जिसका  तेरे पति ने पैसा खाया है। 

मुझसे तुम इस तरह की बात नहीं कर सकते, सिम्मी चिल्ला उठी। 

टोनी को और भी काम हैं ,तुम्हारे लिए ही नहीं बैठा है ,तुम्हें और तुम्हारे उस पति को ऐसे [चुटकी बजाते हुए ]गायब करवाऊंगा तुम्हारी लाश का भी पता नहीं चलेगा ,कहकर उसको पकड़ने के लिए आगे बढ़ता है। इससे पहले कि वो कुछ कर पाता ,सिम्मी ने घूमकर उसे पटक दिया ,ये देखकर शब्बो और करतार भी हैरत में पड़ गए। किन्तु मैक ने माथा पकड़ लिया और बोला -मैंने इससे पहले ही कहा था कि इसे अबला नारी की तरह बनकर रहना है किन्तु ये देखो ! जरूर मुझे पिटवाकर छोड़ेगी। 

 करतार और शब्बो बहुत तेज  हँसे। 

सर !आप लोग क्यों हँसे ?

शब्बो ,हँसते -हँसते बोली -भइया मैं ये सोचकर हँस रही हूँ ,कि इसने तो गुंडों को भी नानी याद दिला दी आपका क्या होगा ? कहकर फिर से हंसने लगी। उसे हँसते देखकर करतार खुश हुआ ,आज उसने शब्बो को पहली बार इस तरह खिलखिलाकर हँसते हुए देखा है।

 


भाभी जी ,आपको मेरी हालत सोचकर हंसी आ रही है ,ये सोचिये ! मैं कैसे झेलूँगा ,मेरे साथ तो ये सब घटेगा और आपको अपने देवर की दुर्गति पर सोचकर ही हंसी आ रही है , कुछ तो तरस खाइये। 

करतार उन दोनों की तरफ देखते हुए बोला -तुम दोनों देवर भावज कब बने ?

करतार की बात सुनकर ,शब्बो एकदम शांत हो गयी ,मैक और शब्बो ने एकदूसरे को देखा और फिर दोनों तेजी से हंस दिए और बोले -आज और अभी से। 

वहां तुम्हारी बीवी उन गुंडों से लड़ रही है और तुम यहाँ अपनी भाभी के साथ गप्पें लड़ा रहे हो कहकर करतार भी हंसने लगता है।    

 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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