Ram ram !

 नमस्कार दोस्तों और बहनों ! राम -राम ! जी हाँ ,किसी से अभिवादन करना हो ,तो भी हम राम -राम ही कहते हैं। वैसे तो राम हमारे हैं ही ,किन्तु कहते हैं -राम नाम में ,राम से भी ज्यादा शक्ति होती है। किन्तु संतों के अनुसार तो राम के विभिन्न रूप हैं। जैसे -


                                                                 एक राम दशरथ का बेटा ,

                                                                 एक राम घट -घट में बैठा। 

                                                                एक राम का सकल पसारा ,

                                                                 एक राम त्रिभुवन से न्यारा।

                                                                तीन राम को सब कोई ध्यावे ,

                                                                  चतुर्थ राम का मर्म न पावै।

                                                                 चौथा छोड़ी जो पंचम ध्यावे।

                                                                  कहे कबीर सो हमको पावे।

एक राम ,जो राजा दशरथ के बेटे थे ,जो चौदह  बरस का वनवास काटकर आये और अयोध्या नगरी में राज्य किया। जो दसों द्वार वाली देह में स्थित  है और एक राम जो सभी के दिलों में बैठा है जो सच्चाई के रूप में ,अच्छाई के रूप में विद्यमान है। इन स्वासों पर जिसका अधिकार है ,वो आत्मा रूप में स्थित है ,जो इस तन का  होकर भी ,उससे भिन्न है।  

किन्तु दीदी ,ये भी तो कहा जाता है कि राम तो सम्पूर्ण जगत में  ही व्याप्त है। राम कोई राजा नहीं एक व्यक्ति नहीं बल्कि राम तो हर जगह है तान्या बोली।  

हाँ ,जो राम को मानने  वाले है , उनके लिए तो राम सम्पूर्ण जगत  में व्याप्त है। क्या वो राम अलग हैं ? 

तीनों राम को हर कोई जानता है , मानता  भी है किन्तु कबीर के अनुसार ,एक राम इन तीनों राम से ,त्रिभुवन से भी न्यारा है ,तीनो लोकों से अलग है। जिसका रहस्य हर कोई नहीं जानता।

चौथा राम कौन  सा हुआ ? 

मैंने जहाँ तक पढ़ा है ,चौथा राम काल है ,जिससे कोई नहीं बच सकता। किन्तु कबीरदास जी ये भी दावा  करते हैं कि जिस राम को मैंने पाया है ,जिसे मैं जानता हूँ ,वो राम सबसे अलग है ,उस तक हर कोई नहीं पहुंच पाता। किन्तु कबीरदास जी ने ऐसे राम को पाया है। जो संतों को ही प्राप्त होते हैं। वो कुलमालिक ही कबीर का ही नहीं , सभी का राम है किन्तु अभी तक उस राम तक कुछ लोग ही पहुंच पाते हैं। वो परमात्मा यानि राम निर्गुण ,निराकार है। 

आइये अब चलते हुए बताते चलते हैं ,राम जिसका अर्थ है -ठहर जाना यानि स्थिर हो जाना। शून्य में रम जाना। इसको दो बार बोलने से , माना जाता है कि एक माला पूर्ण हो जाती है। ज्यादा विस्तार में तो हम  नहीं जायेंगे किन्तु राम में रम जाना ही ,राम को पाने का सूत्र हो सकता है। किन्तु हम तो उसी राम को जान पाते हैं ,जिसको हमारे नेत्र देख सकें ,कर्ण  सुन सकें। आरम्भ के तीनों राम का ही पार ,हम अल्पज्ञानी लोग नहीं पा  सकें हैं। उस राम को पाने से पहले इन तीनों को समझ ,उनसे आगे शून्य में रमना होगा। ऐसा तो कोई महा ज्ञानी या संत ही कर सकते हैं। हम सामाजिक ,पारिवारिक जीवन जीने वाले व्यक्ति उस राम तक नहीं पहुंच पाते हैं।  राम को भी हम समझते हैं ,उसी में ठीक से रमने पर ,कम से कम मन को प्रसन्नता तो अवश्य मिलती ही है और सांसारिक कर्म ही ठीक से हो जाएँ। राम का नाम इतना पवित्र है ,राम का नाम लेने से ही मानव जीवन के  उद्धार का मार्ग तो खुल ही जाता है।आज यहीं राम -राम !करते हैं ,धन्यवाद ! 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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