जब तक उससे ,मिले न थे ,
अपने में ,अच्छे -भले थे।
रातों को देखते थे ,सपने ,
अब तो सपनों को भी.....
उसने अपना बना लिया।
कैसे रहें ,दूर उससे !
तड़प उठता है दिल......
उसकी मोहक संगत ने ,
ये केेसा असर किया ?
कुछ बेचैनी ,बेक़रारी.....
और बेबस सा बना दिया।
अब तो ,जान की भी परवाह नहीं ,
सब कुछ उस पर लुटा दिया।
क्या ?ये ''मोहब्बत का जादू ''हैं।
मैं ,अपना होकर भी अपना न रहा।
उसकी मोहब्बत में ,सब कुछ भुला दिया।
वो समझ सके न..... प्यार मेरा ,
मैंने तो मरकर भी, उसका साथ निभा दिया।
