Bevfa sanam [part 8]

अभी तक आपने पढ़ा ,मनु जिसका रिश्ता बचपन में ही ,श्याम से तय हो जाता है जिसकी जानकारी न ही मनु को थी न ही श्याम को। बड़े होने पर ,जब दोनों को पता चलता है ,तब तक मनु तो अपने दोस्त मोहित से प्रेम करने लगती है और उसी के साथ घर बसाने के सपने भी देखती है।श्याम से मिलकर ,उससे दोस्ती का प्रस्ताव रखती है किन्तु उसके व्यवहार से प्रभावित हुए  बिना भी नहीं रह पाती। इसी तरह एक दिन मस्ती में ,अपने दोस्तों संग श्याम के गांव पहुंच जाती है। श्याम घर में किसी को भी नहीं बताता कि यही मनु है। उसे और उसके दोस्तों को अपने ''फार्म हाउस ''में ठहराता है और अपनी कहानी भी सुनाता है ,जिसे सुनकर मोहित उससे चिढ़ जाता है ,उसे लगता है ,श्याम जरूरत से ज्यादा शरीफ़ और अच्छा बनकर दिखा रहा है।मनु श्याम की सोच और उसके काम को देखकर प्रभावित होती है।



 तब मोहित  उससे कहता है - दूसरों के लिए ,अपने माता -पिता के सपने और अपने अरमानों की बलि वो नहीं दे सकता। श्याम के पास तो पैतृक सम्पत्ति है ,उसके बल पर बड़ी -बड़ी डींगें हाँक रहा है। 

सभी लोग गाड़ी में बैठकर सम्पूर्ण गांव में घूमते हैं , तब तक शाम हो जाती है ,वे सभी वापस जाने की तैयारी करते हैं किन्तु श्याम मना कर देता है। इस समय वापस जाना सही नहीं ,कल चले जाइएगा। 

क्यों ,हम लोग अभी भी जा सकते हैं ,इसमें क्या परेशानी है ?

नहीं ,ये रास्ता ठीक नहीं ,इसके रास्ते में ,जब आप लोग आये होंगे ,बहुत घना जंगल देखा होगा। एक -दो ने कहा - हाँ !

मनु बोली -मैंने तो ध्यान ही नहीं दिया। क्यों उस जंगल में क्या है ? क्या इसकी भी कोई कहानी है ?मनु ने व्यंग्य से मुस्कुराकर कहा। 

अरे ,कुछ नहीं है ,शहरों में तो हम रात्रि के बारह- एक बजे तक खूब बाहर घूमे हैं ,क्या उस जंगल में भूत है ?

चलो !आज तुम्हारा गांव तो देखा  ही है ,आज उस जंगल के भूत भी देख लेते हैं।

नहीं ,ऐसा कुछ नहीं है ,वो जंगल बहुत बड़ा और घना है। बचपन में हमने  जब भी इसके विषय में सुना तो हमारे बड़ों ने इसकी तरफ जाने से इंकार कर दिया।

क्यों ?????कई आवाज एक साथ आईं। 

जंगल में तो जंगली जानवर  ही होते हैं ,जूही ने जबाब दिया। 

पता नहीं ,जानवर हैं कि नहीं किन्तु मैंने सुना है -जो भी ,एक बार इसके अंदर चला गया फिर वापस नहीं आया। 

ऐसा क्या है  ? इस जंगल में , पुलिस को बुलाते। 

मोहरतमा ! जो उपाय तुम हमें बता रही हो ,वो सब लोगों ने करके देख लिए ,श्याम ने बताया। 

क्या ?ये सब तुम्हारी आँखों के सामने घटा ,या फिर सुनी -सुनाई बातें हैं ,मनु ने पूछा। 

अभी मेरे सामने तो ऐसा तो कुछ नहीं घटा किन्तु एक बार एक व्यक्ति गया फिर वापस नहीं आया। पुलिस भी गयी ,कहीं कुछ भी नहीं मिला। 

उसकी लाश भी नहीं मिली। 

नहीं ! 

तुमने एक बार भी उधर जाने का प्रयत्न भी नहीं किया ,डरपोक कहीं  के ,कीर्ति ने धिक्कारा। 

जब हम कम उम्र के थे ,तो अक्सर दिल में इच्छा होती कि एक बार तो अंदर जाएँ किन्तु इससे पहले की हम अपनी सोच को अंजाम देते ,वो दुर्घटना हो गयी। उसके पश्चात तो जाने का साहस ही नहीं हुआ और पुलिस ने भी आस -पास के गाँवों में भी ये हिदायत दी गयी -कि भूलकर भी, इस जंगल में कोई न जाये  इसीलिए आबादी की तरफ से ,कांटेदार तार लगा दिए गए हैं। 

मनु को ये सभी बातें ,बेहद रोमांचक लगीं ,उसकी जिज्ञासा बढ़ गयी। जब वो इस गांव में आई थी ,तब उसने उस जंगल की ओर ध्यान भी नहीं दिया किन्तु अब वही जंगल उसके लिए  दिलचस्प बन गया। जाना तो वो अभी ही चाहती थी। घर में भी किसी को नहीं मालूम,मम्मी -पापा से सिर्फ घूमने के लिए कहकर आई थी किन्तु जिन लोगों को साथ लेकर आई है ,उनके माता -पिता को भी नहीं मालूम कि वो लोग कहाँ गए हैं ? सभी को उनकी चिंता होगी। हम तो शाम तक आने के लिए कहकर आये थे। किन्तु श्याम के दबाब के कारण ,उन्हें रात्रि में वहीं  रुकना पड़ जाता है। 

अब तो मनु के मन में ,श्याम की बताई बातें घूम रही थीं। रात्रि में खाना खाकर ,छत पर टहलने चली जाती है ,साथ में मोहित भी था। दोनों ही छत पर टहल रहे होते हैं ,छत से ,श्याम के बसाये मजदूरों के घर भी दिख रहे थे ,जो उसके ''फार्म हाउस ''में काम करते थे। मनु मोहित से बोली -श्याम ने भी कितना बड़ा कार्य किया ? ऐसा हर कोई नहीं सोच सकता ,शहर से गरीब लोगों को लाकर उन्हें रोजगार देना और उनके लिए अपनी ही जमीन पर घर बनवाना। 

इन्हें तुम घर कहती हो ,छोटे एक -एक कमरे के मकान मोहित व्यंग्य से मुस्कुराया। 

मनु को इस तरह मोहित का मुस्कुराना अच्छा नहीं लगा ,बोली -जब ये लोग सड़क पर बैठे भीख मांग रहे थे। घर के खर्चों के लिए ,अपनी बेटी का सौदा कर रहे थे ,उससे तो बेहतर है ,एक -एक कमरे में रहना। भीख नहीं मांग रहे। मेहनत से कमा तो रहे हैं। 


ये सब अमीरों के चोंचले हैं ,सहायता के नाम पर ,बिना फायदे  कोई कार्य नहीं करता।मनु को मोहित पर क्रोध आया और वो उसकी तरफ जबाब देने के लिए मुड़ी। तभी उसने खंबे की रौशनी में ,एक व्यक्ति  को मुँह ढ़के दूर से ही , उस जंगल में घुसते देखा। मनु एकदम से चिल्लाई ,मोहित देखो !वो आदमी ,उस जंगल में जा रहा है। जब तक मोहित पलटता ,देखता ,वो व्यक्ति दिखाई देना बंद हो गया। 

मोहित बोला -किधर ,कहाँ ? मुझे तो कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा। 

तुमने देरी कर दी ,मैंने एक आदमी को उस तरफ जाते देखा है। 

इतनी दूर से कैसे स्पष्ट दिखाई देगा ? तुम्हें वहम हुआ होगा ,जब से तुमने उस जंगल के विषय में सुना है ,तब से उसी के विषय में सोच रही हो। नीचे चलो ,सोने ! कल वापस भी तो जाना है। 

 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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