Bevafa sanam [part 19 ]

श्याम बेहद आहत था ,उसके कारण आज किसी की जान चली गयी ,इस बात को वो कैसे भुला दे ?अभी कुछ देर पहले तो वो उस लड़के से  बातें कर रहा था और  वो देखते ही देखते लाश बन गया। यदि वो उसका हाथ पकड़कर उसे रोकता नहीं ,तो शायद वो जिन्दा होता। समझ नहीं आता ये सब अचानक से कैसे हो गया ? मनु उसे धैर्य बंधाते हुए बोली -अब तुम शांत हो जाओ !जो होना था सो हो गया। रामफल के लिए तो उसका बेटा पहले से ही गायब था।

'' वो रामफल का बेटा नहीं था ,उसने तो मुझे देखा ही नहीं।''

''तो फिर तुम किससे  बातें कर रहे थे '' मनु आश्चर्य से बोली। 


कोई मोहन नाम का लड़का था ,जब मैं रामफल के बेटे का ध्यान अपनी ओर खींचने का प्रयत्न कर रहा था उसका ध्यान तो गया नहीं किन्तु उस लड़के ने मुझे देख लिया ,वो मेरे समीप आया ,मैंने सोचा -शायद इससे ही कुछ जानकारी मिले ,'' वो मुझसे कह रहा था'' -'मुझे बचा लीजिये। 'किन्तु मैंने तो उसे मौत के मुँह में डाल दिया ,सब मेरी गलती है। वो लोग काफी डरे हुए थे।

अच्छा एक बात बताओ ! उसने कुछ बताया। 

नहीं ,इससे पहले कि कुछ कहता ,वो..... कहकर  श्याम फिर से ग़म की गहराइयों में डूब गया। 

मनु उसे पकड़कर सीढ़ियों से नीचे ले आई ,किन्तु वहाँ उसे कोई नहीं दिखा ,उसने श्याम से कहा भी -हमारे सभी दोस्त कहाँ गए ?

तब श्याम ने भी अपना ध्यान ,मोहन की मौत से हटाकर ,अपने दोस्तों को ढूँढने में लगाया  ,बोला -मुझे तो लगता है ,अवश्य ही किसी न किसी ने हम पर नजर रखी है। 

 अगर कोई हमें देख रहा है ,तो अभी तक उसने हम पर हमला क्यों नहीं किया ?क्या चाहता है वो !

वो तो मैं भी नहीं जानता ,चलो ! ढूँढो सभी कहाँ गए ?या किसी ने उन्हें बंदी तो नहीं बना लिया।

दोस्तों को ढूंढते हुए ,मनु ने एक दरवाजा देखा ,उस दरवाजे को देखकर उसे लगा जैसे उसने वो दरवाजा पहले भी कहीं देखा है ,किन्तु कहाँ देखा है ?कुछ याद नहीं आ रहा। वो दरवाजा बार -बार उसकी स्मृतियों में दस्तक़ दे रहा था।

 तभी उसके अन्य दोस्त भी आ गए और उन्होंने बताया -'तन्मय हमें  मिल गया ,इस गलियारे के सबसे 'लास्ट 'में एक बड़ी सी दीवार है ,उस दीवार के सहारे -सहारे जाओ तो एक दरवाजा मिलेगा ,उस दरवाजे से किसी अन्य स्थान पर पहुंच जाओगे ,वहाँ तन्मय  फंसा हुआ था ,उसे हमने निकाला। 

तन्मय बोला -मैं तुम लोगों से अलग होकर किसी सुरंग में फंस गया था ,फंस क्या गया था ? उसमें फ़िसल गया था ,फिसलते -फिसलते ,मैं न जाने कहाँ आ गया ?किन्तु मैंने देखा ,वहाँ  तो अत्याधुनिक  मशीनें हैं। 

कैसी मशीनें ????

खुदाई के लिए भी हैं और एक स्थान पर मैंने देखा -''कुछ डॉक्टर्स  भी हैं ''

डॉक्टर्स..... वे यहां क्या कर रहे हैं ?हो सकता है ,कभी इन लोगों की योजना हस्पताल बनवाने की हो। कुछ समझ नहीं आ रहा। यहाँ क्या हो रहा है ?तभी कुछ लोग उधर ही आते दिखे सभी दोस्त इधर -उधर छिप गए। ये तो अच्छा था ,वहां कुछ खम्बे थे। छुपते -छुपाते मनु उस बंद दरवाजे के समीप पहुंच गयी। उसे फिर से कुछ  महसूस होने लगा। उसे दो 'सर्प 'भी दिखे ,एक' शिव लिंग 'भी ,कुछ पुरानी जगह। इसके  अंदर क्या हो सकता है ?उसने अपने आप से ही प्रश्न किया। उस दरवाजे पर कोई ताला भी नहीं था। मनु उस दरवाजे की तरफ बढ़ी और उसे खोलने के लिए धक्का दिया किन्तु वो तो हिला भी नहीं। 

तन्मय ने उसे ऐसे करते देख लिया था। उसके समीप आकर बोला -तुम लड़की हो ,ऊपर से ये दरवाज़ा पता नहीं कितना पुराना  होगा  ?

लगभग चार सौ साल पुराना !


तन्मय आगे बढ़ते -बढ़ते रुक गया और बोला -तुम्हें कैसे पता चला ? तुम कोई इतिहासकार हो। 

अरे बुद्धू !वो दादाजी ने जो कहानी सुनाई थी ,उस नगरी के धरती में समा जाने की ,और इस समय हम कहाँ घूम रहे हैं ?जानते हो !

जमीन के अंदर ,जहाँ गुप्त रूप से कार्य हो रहे थे ,उसी जमीन पर हम भी खड़े हैं ,यदि ये उसी नगरी के खंडहर हुये तो......उस कहानी में तनिक भी सच्चाई हुई तो ये चार सौ साल पुरानी चीजें हैं जिनकी कीमत अच्छी -ख़ासी मिल सकती है। मनु फिर से  फुसफुसाकर बोली - तुम जानते हो ,ये एक मंदिर है ,इस मंदिर की कई मूर्तियाँ  ,जो यहाँ से हटा दी गयी हैं और अभी भी खुदाई चल रही है। क्या तुम जानते हो ?हम मंदिर  में ही खड़े हैं। ये मंदिर का गुप्त स्थान है ,वैसे इन लोगों ने इसे ढूंढ़ ही लिया है किन्तु अभी भी इसमें बहुत सी चीजें हैं जो इनकी पहुंच से दूर हैं। 

वो क्या ? 

वो तो अभी मैं भी नहीं जानती किन्तु मुझे लगता है , इन लोगों का ध्येय सिर्फ़ यहाँ इमारतें बनाना ही नहीं ,वरन बहुत कुछ है ,जो सही नहीं है। 

हम यहाँ से कैसे बाहर निकल सकते  हैं  ?

तुम तो  पूछ रहे हो जैसे मैं यहाँ पहले भी आई हूँ। 

नहीं ,श्याम ने मुझे बताया कि तुम्हें पहले से ही उन सीढ़ियों के विषय  में जानकारी थी और तुमने  उनसे ये भी कहा 'कि इधर से ही नदी की तरफ जाने का रास्ता है।' 

हो सकता है ,मैं हड़बड़ाहट में कह गयी हूँ। हो भी सकता है ,ये बात सही हो। 

तभी दो बंदूकधारी लोग किसी को ले जाते दिखे ,उस मंदिर के दूसरे छोर की तरफ जा रहे थे। उन्हें देख तन्मय बोला -ये शायद ,उसी तरफ जा रहे हैं जिधर डॉक्टर हैं ,हमें छुपकर इनका पीछा करना होगा। कहकर वो अन्य दोस्तों के पास पहुंच गया। मनु अभी भी वहीं खड़ी थी। उसने फिर से उस दरवाजे  की तरफ देखा और अपनी आँखें बंद की कुछ देर इसी तरह खड़े रहने के पश्चात उसे वही दरवाजा उसके विचारों में घूमने लगा और भी कई चीजें स्पष्ट हुईं। मन ही मन, मनु कुछ बुदबुदाने लगी और दरवाजा स्वतः खुल गया। उसके खुलते ही मनु यत्रवत अंदर चली गयी। जहाँ भयंकर अंधकार था किन्तु जैसे -जैसे उसने प्रवेश किया वहाँ स्वतः ही रौशनी फेेल गयी। उस जगह  पर उसके  मध्य में शिवलिंग उसे दिखा। जिसे देखते ही उसके कानों में घंटियां बजने लगीं। घंटियों की आवाज का पीछा करते हुए वो किसी अन्य स्थान पर ही पहुंच गयी। 

चारु ने मनु को उस दरवाजे के अंदर जाते हुए देख लिया था ,बाक़ी सभी लोग तन्मय के साथ गए किन्तु चारु मनु का साथ देने के लिए रुक गयी थी। जब तक वो मनु के समीप पहुंचती ,तब तक दरवाजा बंद हो चु का था। चारु ने उसे दरवाजे को खोलने का बहुत प्रयास किया किन्तु खोल न सकी। उसके मन में अनेक प्रश्न उठ खड़े हुए ,आखिर मनु इस दरवाजे से अंदर कहाँ गयी ?उसने  तो कोई जोर भी नहीं लगाया और दरवाजा अपने आप कैसे खुला ?

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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