नमस्कार बहनों और दोस्तों !आज हमारी चर्चा का बिषय ,बहुत ही प्यारा और हसीन है। प्यार से हसीन प्यारा और क्या हो सकता है ? प्यार एक खूबसूरत एहसास है। वो प्यार ,जो बिन देखे ही न जाने कितने सपने सजाने लगता है ? प्यार में पड़कर ,आदमी अपनी एक नई दुनिया बना लेता है। अपनी दुनिया को, अपने सपनों को ,रंगीन चित्रपट पर देखने लगता है। लगता है जैसे -सम्पूर्ण दुनिया ही बहुत खूबसूरत है ,सब कुछ हसीन ,प्यारा लगता है। लगता है ,जैसे सम्पूर्ण दुनिया मेरी है ,सब कुछ अच्छा ही नजर आता है। ऐसे में यदि उसे प्रशंसा मिले तो ''सोने पर सुहागा ''हम महिलाएं तो हैं ही ऐसी ,कोई थोड़ी सी प्रशंसा क्या कर दे ?बस न्यौछावर हो जाती हैं अपने उस प्यार के लिए।
तभी तो उसी बात का ,ये लोग लाभ उठाते हैं ,एक प्यार के बदले में सम्पूर्ण ज़िंदगी के लिए हमें गुलाम बना लेते हैं और जब हम उनके मोहपाश में बंध जाती हैं तब हमें तेवर दिखाने लगते हैं ,नंदिनी तुनकर बोली।
क्या हुआ ?आज चाँद इतना खफ़ा -खफ़ा सा क्यों है ?
मैं खफ़ा कहाँ हूँ दीदी ! अब तो खफ़ा होने का हक भी नहीं रहा , ये तो उन्हें बचकानी हरकतें लगती हैं।
ओह...... तो मैडम पतिदेव से नाराज हैं ,क्या हुआ ?
होना क्या है ?जब हमारी नई -नई शादी हुई थी ,तब लट्टू की तरह मेरे आगे -पीछे घूमते थे। मैं कुछ भी पहन लूँ ,मेरी प्रशंसा में ,चार चाँद लगा देते थे। अब तो देखो ,''घर की मुर्गी ,दाल बराबर '''जैसी हालत हो गयी है। अब कुछ भी पहनूँ ,प्रशंसा करना तो दूर ,नजरभरकर देखते भी नहीं। मैं कई बार उनके आगे -पीछे से निकलती हूँ किन्तु ये ''राम के बंदे ''नजर भरकर भी नहीं देखते ,अपने ही काम में उलझे रहते हैं।
जब तक इन आदमी लोगो को ,अपना प्यार नहीं मिल जाता ,तब तक आगे -पीछे दुम दबाये घूमते रहते हैं और विवाह होते ही ,पड़ोसन पसंद आने लगती है। फिर इधर -उधर नजर दौड़ाने लगते हैं। सोचते होंगे -ये तो अब अपने घर आ ही गयी ,अब कहाँ जायेगी ?क्यों न और जगह भी कोशिश की जाये रेनू भी मुँह बिचकाते हुए ,नंदिनी के समर्थन में बोली।
क्यों रेनू जी तुम्हारे पतिदेव तो सीधे से लगते हैं ,क्या वे भी ऐसे ही हैं।
ह्म्म्मम्म सीधे ,आपसे किसने कह दिया ? कि सीधे हैं ,मुस्कुराकर बोलीं - सीधे हैं , तभी दो माह भी नहीं हुए थे मेरे विवाह को ,मेरी गोद भर गयी थी ,मेरे विवाह को सालभर भी नहीं हुआ और मैं माँ बन गयी थी। सीधे -विधे कुछ नहीं ,बस कुछ लोग लगते हैं होते नहीं।
उनकी बातें सुनकर सभी हँस दीं ।
ये हँसी की बात नहीं ,शुरू -शुरू में तो इतना प्यार दिखलाते हैं ,और बाद में पता ही वही प्यार कहाँ चला जाता है ? कहते थे -रेनू तुम्हारे ये घने और रेशमी बाल....... जब हवा में लहराते हुए ,तुम्हारे चेहरे पर आ जाते हैं ,तब लगता है ,जैसे चाँद को बादलों ने ढ़क लिया हो। और आज हालात ये हैं ,मेरे कितने बाल उतर गए? ,मैंने इनसे कहा भी ,मेरे सर के बाल झड़ रहे हैं ,डॉक्टर को दिखला दो ! तब कहने लगे -ये तो मौसम ही ऐसा चल रहा है ,सभी के झड़ते हैं। मैंने तो क्रोध में ,अपने बाल ही कटवा दिए। किन्तु उन पर जैसे कोई असर ही नहीं पड़ा। पता नहीं ,उनका प्यार ,उनकी मुहब्बत कहाँ चली गयी ?
अच्छा रेनू जी ,अब आप मुझे बताइये ,पहले आप..... जब आपका नया -नया विवाह हुआ था। तब आप मिश्रा जी का कितना ख़्याल रखती थीं ? मैंने देखा है ,उनके कपड़े ,उनका इत्र हर चीज बढ़िया होती थी ,अब वो ऐसे नहीं रहते। क्या अब आप उनका इस तरह ख़्याल रख पाती हैं ?
कैसे रखती ?एक बरस हुआ नहीं ,कि सपना गोद में आ गयी। वो थोड़ी बड़ी हुई ,तो विशाल आ गया दो बच्चे घर का काम ,उन्हें देखूं या मिश्रा जी को !ये भी तो उन्हीं का काम कर रही थी ,उनके बच्चे ,उनका घर संभाल रही थी।
उन सबके खाने -पीने और पढ़ाई -लिखाई ये सब ज़िम्मेदारियाँ कौन निभा रहा था ?
और कौन निबाहेगा ?उनका परिवार है ,वही तो निभायेंगे। ये भी कोई पूछने वाली बात है।
जी हाँ ,पूछने वाली ही तो बात है ,अब आप देखिये ,दो बच्चे होने पर ,आप उन्हें समय नहीं दे सकीं ,तब उनके सिर पर तो पूरे परिवार की ज़िम्मेदारियाँ थीं उसमें भी उन्हें अपना और बच्चों का भविष्य सुरक्षित करना था। तब उन जिम्मेदारियों के चलते ,कैसे समय निकालते ?कभी ये सब सोचा है ,आपने !
आप तो ,इन पुरुषों की तरफ़दारी कर रही हैं ,ये बहुत ही चालाक होते हैं ,कोई सुंदर लड़की या महिला दिखी नहीं कि बीवी को छोड़कर ,इनकी गर्दन उधर ही घूम जाती है। तब समय बर्बाद नहीं होता। आप उनकी तरफ़दारी मत कीजिये। ये बात तो आपको माननी ही होगी।
मोहब्बत का वो एहसास ,अब नहीं होता ,अब पहले जैसा प्यार नहीं रहता कृति बोली।
अब तुम भी तो पहले जैसी नहीं रहीं ,पहले और अब का फोटो मिला लो ,पहले पतली कमर और आज कमर का कमरा बन गया। सभी हंसने लगीं।
इसका अर्थ तो ये हुआ ,प्यार हमसे नहीं हमारे तन से था तन बिगड़ते ही ,मन भी बदल गया।
ये तो सभी मस्ती की बातें थीं किन्तु प्यार कम नहीं होता समय के साथ ,उसकी नींव भी गहरी होती जाती है। बालपन जैसी चंचलता नहीं रही ,युवावस्था जैसी सादगी भी नहीं रही किन्तु प्यार आज भी है किन्तु आज उसे प्रदर्शन की आवश्यकता नहीं रही ,उसमें ठहराव जो आ गया है।
नहीं दीदी !अभी हम इतने बूढ़े भी नहीं हुए ,ये आदमी जात ही ऐसी है ,फिसलती है तो फिसलती है किन्तु अपनी बीवी पर नहीं ,आस -पास की औरतों पर ..... क्यों बहनों !
ये तो आदमी के चरित्र की बात हो गयी ,जिनकी नियत खराब होती है ,वो तो फिर चाहे किसी भी उम्र में हों ,ऐसा आदमी तो इधर -उधर ताक -झांक करेगा ही। तुमने कभी देखा है या महसूस किया है ,जब तुम बिमार हो जाते हो तो ,उनकी क्या हालत हो जाती है ? दोगुनी मेहनत होती है ,घर की भी और अपने काम की भी और मिस्टर कपूर को मैंने देखा है ,अपनी पत्नी के बीमार होते ही ,उनकी भी हालत ऐसे हो जाती थी ,जैसे वही बीमार हो गए हों। जबकि उनकी पत्नी उनसे लड़ती भी बहुत थी। ऐसे समय में प्यार नजर आता है।
यदि ऐसे समय में ,भी पति ध्यान न दे ,तो......
तो क्या ?''लापरवाह ''कहकर पूजा हंसने लगी।
अच्छा दोस्तों !आज की चर्चा यहीं समाप्त करते हुए ,हम फिर भी यही कहेंगे ,खुश रहिये ,अपने साथी का साथ दीजिये ,उसकी भावनाओं को समझिये।'' प्यार ''ये कुदरत की दी अनमोल नियामत है '',प्यार से ही रहिये ,ये कोई खेल नही ,न ही इसमें कोई सौदेबाजी होती है एक दूसरे को समझना ,अपने साथी को दर्द न देना ,उसकी भावनाओं की कदर करना भी ,प्रेम का ही हिस्सा है। सभी के प्रेम दर्शाने का तरीका अलग हो सकता है किन्तु उसे महसूस किया जा सकता है।
