Bhai ko apne ghar bulati hain !

यम की  पूजा कर ,उन्हें मनाती हैं । 

बहनें अपने भाई को,अपने घर बुलाती हैं। 

उनके लिए ,स्वादिष्ट पकवान बनाती हैं। 

इसीलिए बहनें उन्हें अपने घर बुलातीं हैं।



 

उसकी लम्बी उम्र की, दुआ मनाती हैं। 

इसीलिये भाई को ,आपने घर बुलाती  हैं। 

अक्षत ,कुमकुम ले ,व्रत का संकल्प कर......  

थाली सज़ा ,बड़े प्रेम से उसे घर बुलाती हैं।

दीर्घ आयु हो भाई मेरा ,ये आस लगाती हैं।  

अपने भाई के लिए ,दुनिया से लड़ जाती हैं ,

इसीलिए बहनें भाई को अपने घर बुलाती हैं। 

वैसे तो बात -बात पर लड़ती जाती हैं ,

समय आने पर  भाई की ढाल बन जाती हैं। 

इसीलिए भाई के लिए ,ख़ुशियाँ मनाती हैं। 

पापा की मार से बचाने के लिए ,

हर बात छुपाती हैं ,

यमुना में नहा ,बैकुंठ का द्वार खुलवाती हैं ,

इसीलिए भाई को अपने घर बुलाती हैं। 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

Post a Comment (0)
Previous Post Next Post