2070 mein hum

 दो हजार सत्तर में हम न होंगे ,

हमारे क़दमों के निशाँ होंगे। 

न रीति ,न रिवाज़ होंगे ,संस्कार भी,

 किसी कोने में पड़े सिसकते होंगे। 

 जात -पाँत का भेदभाव समाप्त होगा। 

लहु कैसे लहु को पुकारेगा ?

वो तो ठंडा पड़ा होगा। 


मशीनें ,करती काम होंगी ,

मशीनी  हर मानव होगा। 

महिला घूमती सरेआम  होगीं । 

महिला का तब न ,इतना सम्मान होगा ,

वो घर की नारी न रहकर...... 

 बराबर की साथी बन ,उसका इस्तेमाल सरेआम होगा।

भावनाओं जज़्बातों से ,न किसी का सरोकार होगा। 

न बड़ों का सम्मान होगा ,स्वार्थी हर इंसान होगा।

पैसा होने पर भी ,इंसान पैसे का लालची होगा।  

उस वक़्त भी ,कुछ लोग ,लोगों को...... 

 जागरूक तो करते होंगे ,वे भी बस एक मिसाल होंगे। 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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